WORLD…क्या, भारत चीन से नाराज, क्यों और किस बात को लेकर दी चेतावनी…?

एडिटर-इन-चीफ.विनय कोछड़.राष्ट्रीय डेस्क। 

भारत के शक्सगाम घाटी में चीन की बढ़ती गतिविधियों ने एक बार फिर उसकी नीयत पर सवाल खड़े कर दिए हैं। दूसरी ओर अब भारत ने घाटी में चीन द्वारा किए जा रहे निर्माण कार्यों पर कड़ी आपत्ति जताई है। भारत सरकार ने साफ-साफ कहा है कि शक्सगाम घाटी भारत का हिस्सा है और अपने हितों की रक्षा के लिए भारत जरूरी कदम उठाने का अधिकार सुरक्षित रखता है। विदेश मंत्रालय ने इसे भारत की संप्रभुता को चुनौती देने वाला कदम बताया है और संकेत दिया है कि अपने हितों की रक्षा के लिए जरूरी कदम उठाए जाएंगे। ऐसे में सवाल खड़ा हो रहा है कि क्या चीन जानबूझकर क्षेत्रीय तनाव बढ़ रहा है?


प्रेस ब्रीफिंग में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि पाकिस्तान ने वर्ष 1963 में अवैध रूप से कब्जे वाले भारतीय क्षेत्र की 5,180 वर्ग किलोमीटर जमीन चीन को सौंप दी थी, जिसे भारत कभी भी मान्यता नहीं देता। उन्होंने कहा कि भारत ने 1963 में हुए तथाकथित चीन-पाकिस्तान सीमा समझौते को कभी स्वीकार नहीं किया।
जायसवाल ने आगे कहा कि चीन और पाकिस्तान के समझौते को भारत ने हमेशा से ही मान्यता नहीं दी है। भारत का मानना है कि यह समझौता पूरी तरह गैरकानूनी और अमान्य है। 


विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत ने शक्सगाम घाटी में जमीन की स्थिति बदलने की कोशिशों के खिलाफ चीन से लगातार विरोध दर्ज कराया है। साथ ही भविष्य में भी अपने हितों की रक्षा के लिए जरूरी कदम उठाएगा। इस दौरान जायसवाल ने चीन की तरफ से ताइवान के पास किए जा रहे सैन्य अभ्यासों पर भी प्रतिक्रिया दी। 

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