वरिष्ठ पत्रकार.अंतरराष्ट्रीय डेस्क।
बेल्जियम की सर्वोच्च अदालत कोर्ट ऑफ कैसशन ने मंगलवार को भगोड़े हीरा व्यापारी मेहुल चोकसी की उस अपील को खारिज कर दिया, जिसमें उसने भारत प्रत्यर्पण के फैसले को चुनौती दी थी। इस याचिका के बाद मेहुल चोकसी को भारत लाने का रास्ता साफ हो गया है। शीर्ष अदालत के के प्रवक्ता हेनरी वेंडरलिंडन ने कहा, कोर्ट ऑफ कैसशन ने अपील खारिज कर दी है। इसलिए कोर्ट ऑफ अपील का निर्णय बरकरार रहेगा।
इससे पहले एंटवर्प की कोर्ट ऑफ अपील ने भारत के प्रत्यर्पण अनुरोध को सही ठहराते हुए उसे “कार्यान्वयन योग्य” करार दिया था। चार सदस्यीय अभियोजन ने 29 नवंबर 2024 को जिला अदालत के प्री-ट्रायल चैंबर के आदेश को भी सही पाया था। इसमें मुंबई की विशेष अदालत द्वारा मई 2018 और जून 2021 में जारी गिरफ्तारी वारंट को प्रवर्तनीय माना गया था, जिससे चोकसी के भारत लाने का रास्ता साफ हो गया था।
कोर्ट ऑफ अपील्स ने फैसला सुनाया था कि 13000 करोड़ रुपये के पीएनबी घोटाले के मुख्य आरोपी चौकसी को अगर भारत प्रत्यर्पित किया जाता है, तो उसे निष्पक्ष सुनवाई से वंचित रखने या दुर्व्यवहार का सामना करने का कोई खतरा नहीं है। चोकसी 2018 में घोटाला सामने आने से कुछ दिन पहले एंटीगुआ और बारबुडा भाग गया था, उसे बेल्जियम में देखा गया था, जहां उसने कथित तौर पर इलाज करवा रहा था। जिसके बाद भारत ने 27 अगस्त, 2024 को मुंबई की विशेष अदालत द्वारा जारी गिरफ्तारी वारंट के आधार पर बेल्जियम को प्रत्यर्पण का अनुरोध भेजा था।
बेल्जियम में क्यों गिरफ्तार हुआ मेहुल चोकसी?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, मेहुल चोकसी ने बेल्जियम में निवास कार्ड पाने के लिए जाली दस्तावेज जमा किए। भारत ने इसे लेकर यूरोपीय देश को आगाह भी किया। बताया गया कि चोकसी ने यह भी छुपाया कि वह भारत और एंटीगुआ का नागरिक है। इससे पहले फरवरी में चौकसी के वकील ने मुंबई की एक अदालत को बताया था कि वह भारत नहीं लौट सकता, क्योंकि वह रक्त कैंसर के इलाज के लिए बेल्जियम में था। भगोड़े कारोबारी ने कहा था कि वह भारतीय एजेंसियों के साथ सहयोग करने और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालतों में पेशी के लिए तैयार है। हालांकि, इस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया गया और एजेंसियां उसके प्रत्यर्पण की दिशा में काम करती रहीं।

