ऐतिहासिक फैसला….जुआ खेलने को उच्च न्यायालय ने माना असंज्ञेय अपराध……मजिस्ट्रेट की बिना अनुमति एफआईआर दर्ज की रद्द

एसएनई नेटवर्क.चंडीगढ़। 

पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए कहा कि जुआ खेलना असंज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है और ऐसे में मजिस्ट्रेट की अनुमति के बिना स प्रकार छापा मारना कानून के अनुरूप ठीक नहीं है। जालंधर में 25 जुलाई 2020 को याची सौरभ वर्मा के घर छापा मारकर सवा करोड़ रुपये, मोबाइल व लैपटॉप की बरामदगी के मामले में न्यायालय ने एफआईआर को रद्द करने का आदेश दिया है। 

मजिस्ट्रेट की अनुमति नहीं ली गई थी
याचिका दाखिल करते हुए जालंधर निवासी सौरभ वर्मा ने हाईकोर्ट को बताया कि 25 जुलाई, 2020 को पुलिस ने उसके घर छापा मारा था। इस दौरान उन्होंने (पुलिस) सट्टा खेलने के आरोप में एफआईआर दर्ज कर याची (उसे) गिरफ्तार कर लिया था। याची ने कहा कि यह सब करते हुए मजिस्ट्रेट की अनुमति नहीं ली गई थी। पंजाब पुलिस ने कहा कि मौके पर याची पकड़ा गया था और इतनी बड़ी मात्रा में कैश बरामद किया गया है।


पुलिस की कमियों को बनाया आधार
हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि पुलिस ने तय प्रक्रिया के तहत कार्रवाई नहीं की है। हर मामले में जांच का तरीका अलग होता है और तय प्रक्रिया का पालन करना जरूरी होता है। असंज्ञेय मामलों में तो प्रक्रिया का पालन और अधिक आवश्यक हो जाता है। इस मामले में पुलिस ने गुप्त सूचना को आधार बनाते हुए सीधा छापा मार दिया और तय प्रक्रिया का पालन करना जरूरी नहीं समझा। हाईकोर्ट ने पुलिस के स्तर पर पाई गई कमियों को आधार बनाते हुए एफआईआर को रद्द करने का आदेश दिया है।

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