GOOD NEWS—केंद्र सरकार गेहूं उत्पादकों को बड़ी राहत देने पर कर रही विचार,नमी और दाने के रंग व आकार को लेकर निर्धारित मापदंड

एसएनई नेटवर्क.चंडीगढ़।

पंजाब समेत उत्तर भारत के राज्यों में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से खराब हुई गेहूं की फसल को मौजूदा खरीद सीजन के दौरान केंद्र सरकार गेहूं उत्पादकों को बड़ी राहत देने पर विचार कर रही है। इसके तहत गेहूं में नमी और दाने के रंग व आकार को लेकर निर्धारित मापदंड में छूट देने पर विचार किया जा रहा है। यह जानकारी गुरुवार को नई दिल्ली में केंद्रीय खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा ने दी।


112.1 मिलियन टन के रिकॉर्ड उत्पादन की उम्मीद


उन्होंने बताया कि खराब मौसम से फसलों के प्रभावित होने के बावजूद केंद्र सरकार वर्ष 2022-23 (जुलाई से जून) के दौरान देशभर में गेहूं के 112.1 मिलियन टन के रिकॉर्ड उत्पादन की उम्मीद कर रही है क्योंकि फसल खराब होने संबंधी अब तक मिली जानकारी के अनुसार बारिश, आंधी और ओलावृष्टि से गेहूं की फसल को 8-10 फीसदी ही नुकसान हुआ है। गौरतलब है कि फसल वर्ष 2021-22 के दौरान देश में गेहूं का उत्पादन रिकॉर्डतोड़ गर्मी के कारण अनुमानित 109.59 मिलियन टन से घटकर 107.74 मिलियन टन रह गया था। चोपड़ा का कहना है कि पिछले साल जैसी ही स्थिति इस बार बेमौसम बारिश के कारण बन गई है।


पंजाब में इतनी फीसदी नमी वाली गेहूं की हो रही खरीद


पंजाब की मंडियों में एक अप्रैल से शुरू हुई गेहूं खरीद फिलहाल एफसीआई द्वारा निर्धारित मापदंड के अनुसार ही हो रही है और किसानों को इसमें राहत के लिए अभी केंद्र सरकार के फैसले का इंतजार किया जा रहा है। फिलहाल गेहूं में नमी की मात्रा 12 फीसदी तय है और 12-14 फीसदी नमी वाली गेहूं के लिए एमएसपी में कटौती की जा रही है। वहीं 14 फीसदी से ज्यादा नमी वाली गेहूं को सरकारी एजेंसियां नहीं खरीद रहीं। सभी मंडियों में जिला आपूर्ति नियंत्रकों द्वारा किसानों से अपील की जा रही है कि वह गेहूं को सुखाकर और छानकर ही मंडियों में लाएं ताकि उन्हें पूरे दाम मिल सके।


40 फीसदी गेहूं की फसल प्रभावित


पंजाब में वर्ष 2022-23 के लिए 34.90 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में गेहूं की बुवाई की गई है। कृषि विभाग ने पिछले सप्ताह 180-185 लाख टन तक उत्पादन होने की उम्मीद के साथ बंपर फसल उत्पादन की भविष्यवाणी की थी लेकिन बेमौसम बारिश, आंधी और ओलावृष्टि के कारण पंजाब के कई हिस्सों में 15 लाख हेक्टेयर से अधिक रकबे में गेहूं की फसल बुरी तरह से प्रभावित हुई है, जो बुवाई क्षेत्र का 40 प्रतिशत से अधिक है।

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