MUST READ….किसी तानाशाह से कम नहीं ‘भगवंत मान’ सरकार, इसलिए, बार-बार कर रही है कलम पर प्रहार

देश विदेश में पत्रकारिता की अलग छाप छोड़ने वाले प्रधान संपादक बरजिंदर सिंह हमदर्द पर पर्चा दर्ज कर देना, इस बात की ओर बल देता है कि प्रदेश में भगवंत मान सरकार ने तानाशाही की सभी हदें पार कर दी। उनका यह संदेश इस बात को प्रमाणित कर रहा है कि जो भी उनके खिलाफ जाएगा , उसका भी परिणाम इस तरह का ही होगा। विशेषज्ञ मानते है कि जंग-ए-आजादी यादगार बनाने में गड़बड़ी तो एक प्रकार से बहाना है, दरअसल, मान सरकार ने तो देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार को तानाशाह कहने वालों बातों का तो उनकी खुद की सरकार ने राज्य में रिकॉर्ड तोड़ दिया। यह पहला मामला नहीं है मान सरकार के कार्यकाल में कई बेकसूर पत्रकारों के खिलाफ झूठे तथा बिना आधारहीन पर्चे दर्ज  कर दिए। इस बात का प्रमाण खुद भुक्तभोगी रहे पत्रकारों ने कहीं। 

हैरान करने वाली बात है कि अब बरजिंदर सिंह हमदर्द मामले में अन्य पत्रिका समूह के प्रधान संपादक तमाशा देख रहे है। किसी ने उनके समर्थन में एक भी संपादकीय नहीं लिखा। उल्टा उनके खिलाफ जाकर तरह-तरह की झूठी खबरें लिख कर अपनी पब्लिसिटी कर रहे है। शायद उन्हें लगता है कि वह जो कर रहे है बिल्कुल सही है जो सरकार की एजेंसी ने किया वह बिल्कुल ठीक काम है। लेकिन, उन्हें यह बात को भली-भांति समझ लेना चाहिए कि भविष्य का समय उनके लिए भी खतरा पैदा कर सकता है।  

पत्रकार शैली से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि राज्य में उन्होंने कई दौर देखें , कई सरकार आई गई, लेकिन, पत्रकारों के खिलाफ इतनी बड़ी कार्रवाई करने के बारे किसी सरकार ने नहीं सोचा। क्योंकि, पत्रकार समाज ही हर बुराई तथा अच्छाई को प्रकाशित कर लोगों के सामने लाता है। लेकिन, इस सरकार ने तो सभी हदें पार कर दी है, खासकर पत्रकार शैली से जुड़े प्रधान संपादक तथा शीर्ष पत्रकारों के खिलाफ आए दिन एजेंसी या फिर पुलिस से थर्ड डिग्री तक का टॉर्चर कराया जा रहा है। इतना संताप झेलने वाले सच्चे पत्रकारों के लिए तो अब पत्रकारिता करना ही बेहद मुश्किल होता जा रहा है। क्योंकि, उनके पास सरकार के खिलाफ लड़ाई करने का तंत्र नहीं है। क्योंकि, बड़ी बात तो यह है कि अधिकतर पत्रकार शैली ने सरकार के समक्ष अपने घुटने तक टेक दिए है। वह अब पैसे के साथ-साथ अपनी कलम को भी बेच चुका है। उसके लिए पत्रकार की लड़ाई में सहयोग करना कोई महत्व नहीं रहा है। 

अजीत अखबार लगभग 7 दशक से प्रकाशित हो रही है। इस अखबार ने हमेशा ही सच्चाई को ही प्रकाशित किया। समाज के हर मुद्दे को प्राथमिकता दी। पंजाब तथा केंद्र सरकार अखबार के प्रधान संपादक बरजिंदर सिंह हमदर्द का हमेशा ही सम्मान किया गया। लेकिन, वर्तमान सरकार ने उन्हे झूठे केस में फंसाने के लिए उनके हाथ की बन चुकी कठपुतली एजेंसी विजिलेंस ब्यूरो का सहयोग लिया। ठीक एक साल की जांच में उनके खिलाफ जंग-ए-आजादी यादगार इमारत में गड़बड़ी का हवाला देकर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई कर दी गई। हैरान करने वाली बात यह है कि अब तो पुलिस को उनके कार्यालय में भेजा जा रहा है। वहां पर नोटिस लगा दिया गया। अफवाहों का बाजार गर्म है कि वह भूमिगत हो चुके है। कुछ का कहना है कि वह अंतरिम जमानत लगवा रहे है, ताकि उन्हें अदालत से राहत मिल सके।

अन्य पत्रकारिता करने वाले समूह को भी अब समझना होगा कि अब पंजाब में पत्रकारिता करना उनके लिए कोई आसान काम नहीं रहा। क्योंकि, अगर प्रदेश सरकार इतने बड़े पत्रकार समूह के प्रधान संपादक के खिलाफ किसी न किसी मामले में फंसा सकती है तो अन्य पर भी यहीं कार्रवाई सरकार दोहरा सकती है। समय की मांग है कि अब इन पत्रकार समूहों को आपसी मनमुटाव को छोड़कर एक साथ इकट्ठा होने का। बरजिंदर सिंह हमदर्द के समर्थन में इन सबको एक आवाज बनना होगा। अगर ऐसा संभव हो जाता है तो शायद सरकार को सोचने के लिए एक बार मजबूर होना पड़ेगा कि उसने क्या कर दिया है। वैसे भी पत्रकारिता एक ऐसी शक्ति है जो समाज को चलाने का अहम किरदार निभाती है। इतना ही नहीं, सरकार के हर कार्य को कैसे प्रकाशित करना है, यह सब उनके हाथ में होता है। असल में एक वर्ग यह भी मानता है कि पत्रकारिता समूह तथा पत्रकारों के आपसी मनमुटाव का सरकार से लेकर एजेंसी फायदा लेती है। यह पहली बार नहीं बल्कि कई बार ऐसा हो चुका है।  

इस बीच अन्य राजनीतिक पार्टियों का भी प्रधान संपादक बरजिंदर सिंह हमदर्द के समर्थन में  एक-साथ खड़ा होने का समय आ गया। पिछले वर्ष सभी राजनीतिक पार्टियों के शीर्ष नेताओं ने एकजुट होने की एक अच्छी मिसाल कायम की थी। हमदर्द को भी इस बात का हौसला मिला था। तब मान सरकार को फिर से सोचने का अवसर मिल गया था कि अगर उनकी सरकार ने इस समय कोई कार्रवाई की तो सारा विपक्ष उनके खिलाफ तथा आम जनता खड़ी हो जाएगी। ठीक चुनाव प्रचार दौरान मान सरकार ने कितनी चुस्त चालाकी के साथ यह मामला दर्ज करवा दिया तथा अब पुलिस तथा एजेंसी पर इस बात का दबाव डाला जा रहा है कि किसी तरह से उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाए। चूंकि, आम चुनाव के मतदान की तारीख नजदीक आ चुकी है। सभी बड़ी पार्टियों के नेता चुनाव प्रचार में व्यस्त है। अब सत्ताधारी सरकार इस बात का पूरा-पूरा फायदा ले रही है। 

पता नहीं तानाशाह भगवंत मान सरकार इस बात को बिल्कुल ही नहीं सोचती है या फिर उनके मन में बहुत बड़ी गलतफहमी है कि उन्होंने प्रदेश के लोगों का दिल जीत है, इसलिए अब हमेशा के लिए उनकी पार्टी पंजाब की सत्ता पर बैठने वाली है। इसलिए जो मन में आता है उसे करा जा रहा है या फिर सरकारी एजेंसियां का गलत तरीके से इस्तेमाल किया जा रहा है। कहते है हर वो चीज उसकी कोई न कोई सीमा होती है। अगर बार-बार सीमा को लांघने की कोशिश की जाए तो आपका मुंह के बल गिरना भी स्वाभाविक है। यह कहावत इस समय मान सरकार पर बिल्कुल सटीक बैठ रही है। भविष्य में यह बात सच होगी, इस बात की अभी से कयास लगने भी शुरू हो चुके है।  

लेकिन, बात यह अभी नहीं रुकने वाली है, क्योंकि, तानाशाह मान सरकार अब एक-एक करके पत्रकारिता से जुड़े उन पत्रकारों को जेल में डालने की योजना बना रही है, जो सरकार के खिलाफ खबर लगाते है या फिर सच्चाई को बयां करते है। क्योंकि, मान सरकार का मूल महत्व अब यह रह गया है कि अगर कोई भी उनके खिलाफ कोई पत्रकार उठता है तो  उसकी आवाज को दबा लिया जाए। शायद, वह एक प्रकार से बहुत बड़ी गलती कर रहे है या कह सकते है कि यह उनकी एक प्रकार से बड़ी गलतफहमी हो सकती है। लोकतंत्र के राज में जनता के मुद्दों को उठाने वालों की आवाज को दबाना इतना आसान नहीं है। 

प्रधान संपादक विनय कोछड़।

100% LikesVS
0% Dislikes