SPECIAL REPORT…..कई सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारी आतंकियों के निशाने पर, सुरक्षा की समीक्षा जारी, विदेश से रची जा रही साजिश

वरिष्ठ पत्रकार.चंडीगढ़। 

चंडीगढ़ ग्रेनेड हमले के बाद पंजाब पुलिस आतंकवाद के दिनों में सक्रिय रहे पुलिसकर्मियों की सुरक्षा की समीक्षा कर रही है। पंजाब पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि चहल कुछ महीने पहले तक चंडीगढ़ के सेक्टर 10 घर में किराएदार के तौर पर रहते थे।

सूत्रों ने बताया कि घटना के बाद रिटायर्ड पुलिसकर्मियों की सुरक्षा का आकलन किया जा रहा है। अमेरिका स्थित गैंगस्टर-आतंकवादी हरप्रीत सिंह उर्फ ​​हैप्पी पाशिया ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में दावा किया था कि उन्होंने 1986 में नकोदर पुलिस फायरिंग की घटना में उनकी भूमिका के कारण चहल पर हमला किया था, जिसमें चार युवक मारे गए थे। पाशिया ने पिछले साल अक्टूबर में भी चहल पर इसी तरह के हमले की योजना बनाई थी, लेकिन पंजाब पुलिस की काउंटर-इंटेलिजेंस विंग ने इसे नाकाम कर दिया था।

पुलिस ने तब बिक्रमजीत सिंह उर्फ ​​राजा बैंस और बावा सिंह समेत 4 युवकों को गिरफ्तार किया था। इसके बाद चहल चंडीगढ़ वाले घर से बाहर चले गए थे। पुलिस ने दावा किया है कि बब्बर खालसा इंटरनेशनल ने पाकिस्तान स्थित गैंगस्टर से आतंकवादी बने हरविंदर सिंह रिंदा और पाशिया के साथ मिलकर साजिश रची थी। इस घटना ने नकोदर गोलीबारी मामले को फिर से चर्चा में ला दिया है।

..पुलिस पर लगा था आरोप

पिछले साल अक्टूबर में पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने फरवरी 1986 में हुई पुलिस गोलीबारी की घटना की विशेष जांच दल (एसआईटी) द्वारा जांच का आदेश दिया था। पीड़ितों के परिवारों के अलावा कई मानवाधिकार संगठनों ने आरोप लगाया था कि पुलिस ने चारों को बेरहमी से मार डाला। चार युवकों में से एक हरमिंदर सिंह के पिता बलदेव सिंह ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी। न्याय के लिए लड़ने वाले वे अकेले व्यक्ति थे, क्योंकि अन्य पीड़ितों के रिश्तेदार या तो मर चुके हैं या मामले से पीछे हट चुके हैं।

चहल को  बताया गया   “ट्रिगर-हैप्पी इंस्पेक्टर” 


अक्टूबर 1986 में पेश जस्टिस गुरनाम सिंह आयोग की रिपोर्ट में गोलीबारी की घटना के लिए जालंधर पुलिस और नागरिक प्रशासन को दोषी ठहराया गया था। इसमें चहल को “ट्रिगर-हैप्पी इंस्पेक्टर” बताया गया है। 4 फरवरी, 1986 को पुलिस ने कथित तौर पर नकोदर गुरुद्वारे में बेअदबी के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे लोगों पर गोलियां चलाईं। इस घटना में कुछ उपद्रवियों ने कई “बीर” जला दिए थे। आयोग की रिपोर्ट में पुलिस अधिकारियों को दोषी ठहराया गया, जिसमें जसकीरत सिंह चहल भी शामिल थे, जो उस समय नकोदर के एसएचओ थे। रिपोर्ट में कहा गया कि चहल ने हरमिंदर सिंह को बहुत करीब से मारा। रिपोर्ट में कहा गया, “यह एक सरकारी कर्मचारी द्वारा की गई निर्मम हत्या है।” दुख की बात है कि आयोग की रिपोर्ट का केवल पहला हिस्सा ही सार्वजनिक किया गया, जबकि दूसरा हिस्सा, जिसमें दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की गई थी, गायब बताया गया। इसका अभी तक पता नहीं चल पाया है।

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