कड़वा सच…नहीं पचा पा रहे जीत को कांग्रेसी……इसलिए, गुरुर में डूबे

लेखक विनय कोछड़.अमृतसर।

जीत की खुशी को लेकर कांग्रेसी नेताओं का दिमाग भी सातवें आसमान पर पहुंच चुका है। अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अब इन्होंने लोगों से संपर्क करना ही छोड़ दिया है। रविवार को चर्चा का विषय रहा कि कांग्रेस के पूर्व उप-मुख्यमंत्री के भतीजे ने तो फोन से लेकर मुलाकात करना ही बंद कर दिया है। माहौल यह भी रहा कि वे लोग अपनी जीत को पचा ही नहीं पा रहे हैं, इसलिए गुरुर में डूब चुके हैं। अमृतसर में 44 सीट जीतने के साथ कांग्रेस पार्टी निगम चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी उभर कर आई।  ऐसे में इनका महापौर बनना लगभग तय है, लेकिन, अफवाह का बाजार गर्म है कि झाड़ू इधर-उधर से निर्दलीय तथा कुछ विपक्ष के पार्टियों से जीत कर आए खिलाड़ियों से मदद मांग रहा है। उन्हें निगम में कुछ खास तोहफा देने का न्यौता मिल चुका है। अब यह लोग इकट्ठे होकर सौदेबाजी का दांव खेलने लग पड़े है। वैसे भी आम आदमी पार्टी (आप)  इस हार को पचा नहीं पा रही है, इसलिए मेयर की कुर्सी के लिए गठजोड़ का रास्ता अपनाने के लिए नए-नए तरीकों का इस्तेमाल करना आरंभ कर दिया। चर्चा, इस बात की भी है कुछ लोग कांग्रेस के गुरूर को तोड़ने के लिए भीतरघात आप की मदद के लिए जुट चुके है। वे लोग कांग्रेस के ही कुछ प्रत्याशियों की खरीद-फरोख्त में उन्हें राह दिखाने में मदद कर रहे है। वह दिल ने नहीं चाहते है कि कांग्रेस का मेयर किसी तरीके से बन जाए, क्योंकि, उन्हें पूर्व उप मुख्यमंत्री द्वारा बेइज्जत किया गया। दरअसल, पूर्व उप मुख्यमंत्री अपने लाडले भतीजे को मेयर की कुर्सी पर बैठाना चाहते है। लेकिन, ऐसा मुमकिन नहीं दिखाई दे रहा है। क्योंकि कांग्रेसियों का आधे से ज्यादा गुट विकास सोनी के खिलाफ खड़ा हो चुका है। उन्होंने भीतर ही भीतर उसके पर काटने के लिए खेल रचना आरंभ कर दिया। इसलिए आप के साथ मिलकर एक नई पारी का आगाज करना चाहते है। लंका को आग लगा दी गई है धुआ ने धीरे-धीरे फैलना आरंभ हो चुका है। 

वीरवार का दिन कांग्रेस के लिए खूब चर्चा का विषय बना रहा, क्योंकि, मामला उनकी नई-नई जीत के साथ जुड़ा था। जश्न तो एक रात पहले ही मना लिया गया। शराब-मुर्गे का सेवन खूब हुआ। पता चला है कि इसकी कीमत लाखों तक पहुंच गई। नेता जी की खुशी इस कदर तक झूम रही थी कि उन्होंने पैसे की बिना परवाह किए पानी की तरह बहा दिए। ढोल-नगाड़ों के साथ भांगड़ा से लेकर पश्चिमी डांस का लुत्फ करते दिखाई दिए। इस जीत को खुशी को वीरवार के दिन वे लोग पचा ही नहीं पाए। क्योंकि, जिनकी बदौलत उनकी जीत की राह आसान हुई, उनके साथ फोन तथा संपर्क करना बंद कर दिया। फिर चर्चा इस बात की होने लगी कि कांग्रेसी अब गुरुर में डूब चुके है। शायद, इन्हें इस बात का बिल्कुल अंदाजा नहीं है कि यह मतदाता तथा उनके समर्थक ही उन्हें जीत की कुर्सी पर विराजमान करते है, अगर वे लोग आपकी जरा सी गलती से नाराज हो गए तो फिर आगे से सत्ता में आना या फिर स्वप्न लेना बिल्कुल ही छोड़ दीजिए। आरंभिक तौर से मतदाता तथा समर्थकों के हाथ में ही नेता जी की डोर की कमान रहीं है, इन्होंने अगर फैसला कर लिया कि नेता जी की जीत या फिर हार का तो समझ लीजिए फिर कोई भी इनके फैसले को कोई भी टाल नहीं सकता है। 

ऐसा नहीं है कि एक नेता जो कि कितने साल तक मतदाता तथा अपने समर्थकों के बीच काफी पसंदीदा रहा, उसे उप मुख्यमंत्री का ताज भी नसीब हुआ। लेकिन, उनके गुरुर को मतदाता ने उनके खिलाफ वोटिंग कर चोट पहुंचाई। उन्हें हार का सामना करना पड़ा है। उस समय चर्चा इस बात की भी थी नेता जी को एक पल हारने का इतना धक्का लगा कि उन्हें अस्पताल लेकर जाने की जरुरत पड़ गई। तब उन्हें इस बात का अहसास हो चुका था कि मतदाता की नाराज़गी कितनी बुरी होती है, वह कुछ बोलती नहीं है, इसका जवाब वोट के द्वारा देती है। लेकिन, इस बार उनकी मेहनत से पार्टी प्रत्याशियों ने निगम चुनाव में अच्छा तो जरुर किया, लेकिन, मतदाता तथा समर्थक उनके भतीजा से नाराज भी हो गए है, क्योंकि, उनका मानना है कि हमारे युवा नेता जी तो मेयर बनने से पहले ही उनसे दूर होने लग पड़े है। पता नहीं जिस दिन महापौर की कुर्सी पर बैठ गए तब पता नहीं क्या करेंगे। मतदाता तथा समर्थकों का मानना है कि नेता जी शायद अपनी जीत को पचा नहीं पा रहे है, इसलिए गुरुर उनके सिर चढ़ कर बोल रहा है।  

प्रधान संपादक विनय कोछड़…..(एसएनई न्यूज)। 

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