LEGITIMATE ISSUE……कम पड़ी रही कब्रिस्तान के लिए जगह बना गंभीर मुद्दा….जानिए, किस समाज सेवक ने उठाई आवाज़………?

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पवन कुमार.अमृतसर /चंडीगढ़। 

अल्पसंख्यक समुदाय (मसीह बिरादरी) से जुड़े समाज सेवक तथा पूर्व पुलिस शिकायत निवारण समिति के सदस्य विल्सन मसीह ने कब्रिस्तान के लिए राज्य भर में कम पड़ रही जगह को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने समुदाय से जुड़े नेताओं पर हमला बोलते कहा कि वह सरकार में पद लेकर इस मुद्दे को अब तक नहीं उठ पाए, जो एक प्रकार से बड़ा चिंता का विषय है। प्रदेश के मुख्यमंत्री भगवंत मान से मांग करते कहा कि वह इस मुद्दे पर गंभीरता से गौर करें तथा जितना जल्द हो सके इसका प्राथमिकता से हल निकाले। यह मुद्दा कोई नया नहीं है, बल्कि, 70 साल पुराना है।  

विल्सन ने बताया कि पंजाब में मसीह समुदाय की कुल आबादी में 2 फीसद आबादी है। पंजाब के जिला गुरदासपुर, अमृतसर, तरनतारन में उक्त आबादी का काफी संख्या में दबदबा है। लेकिन, काफी दुख की बात है, उनकी जायज मांग को उनके खुद के नेताओं से लेकर किसी सरकार के नेता ने कब्रिस्तान के मुद्दे को सदन में नहीं उठाया । अब हालात यह पैदा हो चुके है कि शव को दबाने के लिए राज्य भर में जगह कम पड़ी रही है। इतना ही नहीं, अब पुराने शव के कंकाल साफ दिखाई देने लग पड़े है। जो कि एक प्रकार से काफी चिंता का विषय है। ऐसा देख मन को ठेस भी पहुंचता है और भीतर से तकलीफ भी होती है। लेकिन, इस दर्द का इलाज सिर्फ तो सिर्फ राज्य सरकार के पास है, जो वो ही उसे पूरा कर सकती है।  

क्या है पूरी समस्या..समझिए, इस खास रिपोर्ट में…?

मसीह भाईचारा के मुताबिक, मरने वाले का शव कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-खाक किया जाता है। राज्य भर में जितने भी कब्रिस्तान है, उन सभी को ब्रिटिश शासन काल में स्थापित किया गया था। चिंता का यह विषय है कि पिछले 70 वर्ष में कब्रिस्तान के लिए किसी सरकार ने कुछ खास नहीं किया। ऐसे में सुपुर्द-ए-खाक करने वाले शवों की संख्या बढ़ती गई तथा जमीन कम पड़ती गई। अब तो परिस्थितियां यह हो चुकी है कि खुदाई के 4-5 फीट गहराई पर पुराने शवों के कंकाल दिखाई देते है। जिससे मसीह (ईसाई) धर्म की भावनाओं को काफी क्षति पहुंचती है।

समस्या समाधान नहीं होने के पीछे यह भी बड़ा कारण

सूत्रों से पता चला है कि समुदाय से जुड़े कुछ नेता ही नहीं चाहते कि वह इस समस्या को सरकार के समक्ष जोर शोर से उठाए। क्योंकि, उन्हें इस बात का भय लगा रहता है कि कहीं उनकी कुर्सी न छीन जाए। ईसाई समुदाय से जुड़े जानकारों का मानना है कि यह मुद्दा वाक्य एकदम जायज होने के साथ-साथ बहुत बड़ा है। अगर , कोई उसे उठाने का प्रयास करता भी है तो किसी न किसी प्रकार से उसकी आवाज को दबा लिया जाएगा। कुछ की यह भी राय है कि यह मुद्दा सरकार के नाक में दम भी कर सकता है। इसलिए कोई भी नहीं चाहता है कि इस मुद्दे का समाधान हों। 

…जानिए, कैसे उसका हो सकता है हल 

विशेषज्ञों का मानना है कि समस्या कोई भी हो, उसका हल निकाला जा सकता है। इस समस्या के लिए सबसे पहले समुदाय के लोगों को एक मंच पर इकट्ठा होना होगा। इसमें किसी प्रकार की कोई राजनीति नहीं होनी चाहिए। समुदाय से जुड़े धर्म गुरु, नेताओं को एक मंच पर आवाज को बुलंद करना होगा। प्राथमिकता के तौर पर इसे सरकार तक पहुंचाने के लिए प्रशासन तक मांग पत्र देना होगा। इससे सरकार तक उनकी आवाज पहुंच जाएगी तथा उन्हें (सरकार) को भी इस बात पर सोचने के लिए विचार करना होगा कि कैसे जल्द से जल्द इस मुद्दे का हल निकाला जाए। 

डीसी को सौंपा जाएगा मांग-पत्र

मसीह ने बताया कि वे अपने समुदाय से जुड़े लोगों को इकट्ठा कर जल्द जिला उपायुक्त साक्षी साहनी से मुलाकात करने के लिए जा रहे है। उन्हें इस समस्या का एक मांग पत्र भी सौंपा जाएगा। उन्हें विश्वास है कि यह मांग उनकी जायज है तथा प्रशासन उनकी आवाज को सरकार के समक्ष जरूर पहुंचाएगा। वैसे भी जिला उपायुक्त ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पीड़ित परिवारों तक जरुरत का सामान पहुंचाने से लेकर उनकी हर समस्या को पहल के आधार पर हल किया।  वह एक तरह से समाज सेवक नारी है। 

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