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लद्दाख के एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे. अंगमो ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि उनके पति का भाषण हिंसा फैलाने के लिए नहीं, बल्कि हिंसा को रोकने के लिए था। उन्होंने आरोप लगाया कि तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया और वांगचुक को अपराधी की तरह दिखाने की कोशिश की जा रही है।
गुरुवार को हुई सुनवाई में वांगचुक की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने वांगचुक के भाषण का वीडियो चलाकर कहा कि यह भाषण अनशन तोड़ते समय दिया गया था, जिसमें वांगचुक ने साफ कहा था कि वे किसी भी तरह की हिंसा स्वीकार नहीं करते और लोगों से हिंसा रोकने की अपील कर रहे थे।सिब्बल ने कहा कि महात्मा गांधी ने भी चौरी-चौरा कांड के बाद इसी तरह हिंसा के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया था। वांगचुक को उनकी हिरासत के पूरे आधार नहीं बताए गए और न ही उन्हें इसके खिलाफ सही तरीके से अपनी बात रखने का मौका दिया गया।
24 सितंबर को लेह में हुए हिंसक प्रदर्शन के बाद वांगचुक को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत 26 सितंबर को गिरफ्तार किया गया था। सोनम फिलहाल जोधपुर सेंट्रल जेल में हैं। इस मामले में अगली सुनवाई 12 जनवरी को होगी।

