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पंजाब और चंडीगढ़ में ED की रेड 50 घंटे बाद गुरुवार को खत्म हो गई। टीमें 5-6 गाड़ियों में मोहाली स्थित GMADA मुख्यालय से निकलीं। सूत्रों के मुताबिक, ED अधिकारी जब्त दस्तावेजों के करीब 30 बैग और स्कैन किए गए कागजों वाली हार्ड डिस्क साथ ले गए। इसी बीच, एक IAS अधिकारी के घर से करीब 2.5 करोड़ रुपए कैश, सवा किलो सोना-चांदी और जमीन के दस्तावेज मिलने की जानकारी भी सामने आई है। हालांकि, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
ED ने मंगलवार को पंजाब और चंडीगढ़ समेत 26 ठिकानों पर यह कार्रवाई शुरू की थी। ED ने बुधवार को मंत्री हरदीप सिंह मुंडियां के भजीते के घर लुधियाना में भी रेड की। इसके अलावा, रात को टीम दिल्ली के पूर्व मंत्री सतेंद्र जैन के चंडीगढ़ स्थित घर भी पहुंची। जांच तिरुपति इंफ्रा प्रोजेक्ट्स से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में की गई। इस दौरान GMADA और पंजाब सरकार के हाउसिंग विभाग के कार्यालयों में भी सर्च हुई। कार्रवाई के बीच पंजाब सरकार ने अधिकारियों को कथित तौर पर हिरासत में रखने का आरोप लगाते हुए देर रात हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की।
गुरुवार को हाईकोट्र में सुनवाई हुई, जिसमें ED की ओर से एएसजी सत्य पाल जैन और सीनियर एडवोकेट धीरज जैन पेश हुए। कोर्ट पंजाब सरकार ने कहा कि तलाशी पूरी हो चुकी है और जिन अधिकारियों को कथित तौर पर हिरासत में रखने का आरोप था, उन्हें मुक्त कर दिया गया है। परिस्थितियां बदलने के बाद सरकार ने याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी। जिसके बाद हाईकोर्ट ने याचिका वापस लेने की अनुमति दे दी।

ED की टीम ने बुधवार देर रात चंडीगढ़ के सेक्टर-39 स्थित कोठी नंबर 926 में रेड की। टीम कोठी का ताला तोड़कर अंदर घुसी थी। इस कोठी में दिल्ली के पूर्व मंत्री सतेंद्र जैन रहते थे। अब वह जेल में हैं।
LIVE-COURT-HEARING…?
ASG: मैं याचिका की सुनवाई योग्य होने के संबंध में अपनी दलीलें रखना चाहता हूं।
ASG: मुझे याचिका दायर किए जाने के बारे में किसी ने जानकारी नहीं दी।
जस्टिस संजय वशिष्ठ: ई-मेल कोर्ट को भेजा गया था। यह हैबियस कॉर्पस याचिका थी।
कोर्ट अब वारंट ऑफिसर की रिपोर्ट देख रही है। वारंट ऑफिसर की नियुक्ति कल देर रात हुई वॉट्सएप पर हुई सुनवाई के दौरान की गई थी।
सीनियर एडवोकेट विक्रम चौधरी (पंजाब सरकार की ओर से): मुझे पहले रिपोर्ट देख लेने दीजिए, फिर मैं इस पर अपनी बात रखूंगा। मुझे दोपहर 1 बजे रिहा किया गया। अगर माननीय अदालत रात में जागकर सुनवाई नहीं करती, तो वे मुझे रिहा नहीं करते।
विक्रम चौधरी: अधिकारी अपने कार्यालय में गद्दों पर लेटे हुए थे…
ASG: यहां याचिकाकर्ता कौन है? उन्हें हैबियस कॉर्पस याचिका दायर करने का कोई अधिकार नहीं है।
विक्रम चौधरी: जहां भी चुनाव लंबित होता है, वहां इसी तरह की स्थिति देखने को मिलती है। यही चलन बन गया है।
ASG: कृपया इसे हलफनामे पर दाखिल करें। हवा में बहस न करें।
जज: मैं आपसे पूछना चाहता हूं कि यहां याचिकाकर्ता कौन है?
विक्रम चौधरी: पंजाब सरकार।
जज: किसके माध्यम से? पार्टी के मेमो को देखिए।
विक्रम चौधरी: वह गृह विभाग के अधिकृत प्रतिनिधि हैं।
जज: आपको इसका जवाब देना होगा कि पार्टी के मेमो में यह याचिका किसके माध्यम से दायर की गई है? दूसरा, याचिका में कोई प्राधिकरण (ऑथराइजेशन) नहीं है। तीसरा, आपने जिस सपोर्टिंग एफिडेविट पर भरोसा किया है, वह कैलाश गौतम, संबंधित विभाग के माध्यम से दायर किया गया है।
विक्रम चौधरी: जी, वह अंडर सेक्रेटरी हैं।
कोर्ट (याचिका का हवाला देते हुए): यह याचिका अब तक उपलब्ध निर्देशों के आधार पर तैयार की गई है, जो अखबारों और मीडिया रिपोर्टों से मिले हैं। तो फिर अंडर सेक्रेटरी को यह अधिकार कैसे मिला?
कोर्ट: राज्य के तौर पर आप संविधान के तहत मौलिक अधिकारों के संरक्षक हैं, हालांकि आपके खुद के कोई मौलिक अधिकार नहीं हैं।
चौधरी ने अपने पक्ष के समर्थन में न्यायिक फैसले पेश करने के लिए समय मांगा।
विक्रम चौधरी: वारंट ऑफिसर की रिपोर्ट यहां मौजूद सभी संबंधित पक्षों के साथ साझा की जानी चाहिए। आइए, पहले हम इस रिपोर्ट को देख लेते हैं।
विक्रम चौधरी: मैं याचिका की वैधानिक स्थिति से जुड़े आपके सवालों और शंकाओं का जवाब दूंगा। लेकिन माननीय अदालत से अनुरोध है कि वारंट ऑफिसर की रिपोर्ट उपलब्ध कराई जाए, क्योंकि यह एक पारदर्शी दस्तावेज है।
कोर्ट: जब भी किसी व्यक्ति को अवैध रूप से हिरासत में रखा जाता है, तो अदालत के पास उसे तुरंत रिहा करने के लिए हैबियस कॉर्पस जारी करने की शक्ति होती है, लेकिन ऐसा लगता है कि अब वह स्थिति खत्म हो चुकी है।
कोर्ट: पंजाब सरकार की ओर से आपके अधिकारी एडिशनल एजी फेरी सोफत वहां मौजूद थे। पंजाब पुलिस भी वहां थी। उन्हें वहां हुई हर एक बात की जानकारी है। आप अपनी वैधानिक स्थिति (लोकस) साबित किए बिना वारंट ऑफिसर की रिपोर्ट नहीं मांग सकते।
कोर्ट: क्या अधिकारियों को रिहा कर दिया गया है?
ASG: हां, आज दोपहर 1 बजे रिहा कर दिया गया।
विक्रम चौधरी: उन्होंने माननीय अदालत के समय के साथ तालमेल बिठाकर अधिकारियों को रिहा किया, ताकि यह कहा जा सके कि याचिका अब निष्प्रभावी हो गई है। लेकिन मेरी कुछ अन्य प्रार्थनाएं भी हैं।
विक्रम चौधरी: हैबियस कॉर्पस ही ऐसी रिट है, जिसमें याचिका दायर करने वाले के लोकस (वैधानिक अधिकार) का सवाल ही नहीं उठता।
विक्रम चौधरी: यह तथ्य है कि तलाशी 50 घंटे से ज्यादा समय तक जारी रही। अधिकारियों को उधार के गद्दों पर दफ्तरों में सोने के लिए मजबूर किया गया। क्या यह लोकतांत्रिक व्यवस्था है?
विक्रम चौधरी: यह मामला केंद्रीय एजेंसी और राज्य सरकार के बीच का है।
विक्रम चौधरी: कृपया वारंट ऑफिसर की रिपोर्ट देखिए।
कोर्ट: ठीक है।

बुधवार दोपहर को टीम पंजाब के मंत्री के भांजे के घर पहुंची थी।
GMADA के अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों से पूछताछ की
ED ने मंगलवार सुबह मोहाली स्थित GMADA के फेज-8 में मुख्यालय में कार्रवाई शुरू की थी। इसके बाद से ED और केंद्रीय सुरक्षा बलों के जवान व अधिकारी मौके पर मौजूद रहे। ED अधिकारियों ने सरकारी रिकॉर्ड खंगालने के साथ GMADA के अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों से पूछताछ की। मोहाली दफ्तर के 3 मंजिलों को सील कर रिकॉर्ड जब्त कर लिए हैं। पूरी कार्रवाई की वीडियोग्राफी करवाई गई। इसके अलावा IAS अधिकारी राजीव गुप्ता की सेक्टर-19 स्थित कोठी में टीम पहुंची थी।
मंत्री के रिश्तेदार के घर पर भी ED ने तलाशी ली
इसी जांच के दौरान बुधवार को पंजाब के शहरी आवास एवं विकास मंत्री हरदीप सिंह मुंडियां के रिश्तेदार गुरप्रीत सिंह सैनी उर्फ प्रिंस के लुधियाना के साहनेवाल स्थित घर पर भी ED ने तलाशी ली। रिपोर्टों के अनुसार, वहां कार्रवाई दोपहर करीब ढाई बजे शुरू हुई और देर तक जारी रही। इसके बाद आज सुबह उसका कार्रवाई खत्म हुई।
26 ठिकानों पर सर्च और सर्वे की कार्रवाई की गई
ED के अनुसार, तिरुपति इंफ्राप्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े मामले में दिल्ली, मोहाली, चंडीगढ़, पंचकूला और लुधियाना में 26 ठिकानों पर सर्च और सर्वे की कार्रवाई की गई है। इनमें कंपनी के प्रमोटर, निदेशक और उनसे जुड़े लोगों के ठिकाने शामिल थे।ED के मुताबिक, GMADA और पंजाब सरकार के हाउसिंग एवं अर्बन डेवलपमेंट विभाग के कार्यालयों में भी PMLA के तहत सर्वे किया जा रहा है, ताकि संबंधित कंपनियों से जुड़े रिकॉर्ड और सबूत जुटाए जा सकें।
करीब 290 करोड़ रुपए के बैंक फ्रॉड का मामला भी शामिल
ED के मुताबिक, जांच में तिरुपति इंफ्राप्रोजेक्ट्स से जुड़े करीब 290 करोड़ रुपए के बैंक फ्रॉड का मामला भी शामिल है। एजेंसी के अनुसार, मामले में नई दिल्ली के पश्चिम विहार स्थित रेडिसन ब्लू होटल प्रोजेक्ट से जुड़े लेनदेन के साथ GMADA से कथित तौर पर वैधानिक बकाया में छूट और रद्द किए गए प्लॉट के दोबारा आवंटन की भी जांच की जा रही है। एजेंसी के अनुसार, रेमिगेट से जुड़े मामले में करीब 57 करोड़ रुपए का आर्थिक लाभ दिए जाने की भी जांच है। साथ ही जमीन अधिग्रहण से जुड़ी कथित अनियमितताओं में एक निजी कंसल्टेंसी फर्म की भूमिका और अधिकारियों से उसके संबंधों की भी पड़ताल की जा रही है।###USA###UK###CANADA###PUNJAB###LUDHIANA###CHANDIGARH###AUSTRALIA###NEWZEALAND###SINGAPORE###ITLAY###GERMANY###

