वरिष्ठ पत्रकार.चंडीगढ़।

जम्मू के पुंछ के बेला गांव में मौलाना कारी मोहम्मद इकबाल की 7 मई को पाकिस्तान की बमबारी में मौत हो गई थी। वे पुंछ में जामिया जिया-उल-उलूम नाम के मदरसे में पढ़ाते थे, लेकिन तब गोदी मीडिया जी न्यूज, न्यूज 18 इंडिया, रिपब्लिक टीवी और एबीपी न्यूज ने उन्हें पाकिस्तानी आतंकी बताकर खबरें चला दीं। खबरों में बताया गया कि कारी मोहम्मद इकबाल आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के कमांडर थे और 2019 के पुलवामा आतंकी हमले में शामिल थे। परिवार अब उनके सम्मान के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रहा है। कारी मोहम्मद की पत्नी नसीम अख्तर गुस्से में कहती हैं, ‘मेरे पति देश के लिए शहीद हुए। मीडिया ने उनके बारे में झूठी खबरें चलाईं। उन्हें बदनाम कर दिया।’
परिवार ने जी न्यूज और न्यूज-18 इंडिया को 5-5 करोड़ रुपए का मानहानि नोटिस भेजा है। पुंछ पुलिस ने इन चैनलों के खिलाफ FIR दर्ज की है। कारी मोहम्मद इकबाल के परिवार में उनकी 2 पत्नियां और 8 बच्चे हैं। उनका गांव पुंछ शहर से करीब 20 किमी दूर मंडी तहसील में है। संकरे पहाड़ी रास्तों से होते हुए हम उनके घर पहुंचे। एक मंजिल वाले कच्चे मकान में उनकी पत्नियां और बच्चे रहते हैं। कारी मोहम्मद की मौत के बाद छोटी पत्नी शहनाज को सरकार की तरफ से नौकरी दी गई है। वे ऑफिस गई हुई थीं। घर में बड़ी पत्नी नसीम अख्तर मिलीं। वे बताती हैं, ‘सारी जिम्मेदारी अब हमारे ऊपर ही है। भाई मदद कर रहे हैं, लेकिन बच्चों की पढ़ाई मेरे जिम्मे है।’
बगल में ही कारी मोहम्मद के भाई मोहम्मद असलम का भी मकान है। वे उन्हें याद करते हुए बताते हैं, ‘भाई 2004 से मदरसे में पढ़ा रहे थे। उनकी शुरुआती तालीम गांव में हुई थी। फिर जम्मू-कश्मीर और महाराष्ट्र के अकोला में मौलवी की पढ़ाई की। 2004 में गांव लौट आए और यहीं पढ़ाना शुरू कर दिया।’ मौलाना कारी मोहम्मद इकबाल इसी मदरसे में पढ़ाते थे। उन्होंने महाराष्ट्र से कारी की डिग्री ली थी। इसके बाद से पुंछ में ही पढ़ा रहे थे।
असलम आगे बताते हैं, ‘हम तीन भाई मिलकर परिवार की देखभाल कर रहे हैं। सरकार ने दोनों भाभी को 4 और 5 लाख रुपए का मुआवजा दिया है। छोटी भाभी शहनाज को मछली पालन विभाग में नौकरी दी गई है। 20 जून को उन्होंने ज्वाइन किया था।’ चैनलों पर गलत खबर दिखाने पर असलम कहते हैं, ‘शहर में हिंदू, मुस्लिम या सिख, आप किसी से भी बात कर लें, सभी मेरे भाई की देशभक्ति बता देंगे। चैनलों ने बिना जाने उन्हें आतंकी बता दिया। हम चाहते हैं कि इन चैनलों पर सख्त कार्रवाई हो। कुछ चैनलों ने माफी मांगी है, लेकिन कोर्ट ने कहा कि माफी से गलती ठीक नहीं होती। खबरें चलाने से पहले तहकीकात करनी चाहिए।’
रिपब्लिक ने अपनी वेबसाइट पर ये खबर पब्लिश की थी। इसमें लिखा था कि मोहम्मद इकबाल की मौत कोटली कैंप पर की गई एयर स्ट्राइक में हुई है। रिपब्लिक ने अपनी वेबसाइट पर ये खबर पब्लिश की थी। इसमें लिखा था कि मोहम्मद इकबाल की मौत कोटली कैंप पर की गई एयर स्ट्राइक में हुई है।
कोर्ट ने कहा- सम्मानित टीचर को आतंकी बताना गैर जिम्मेदाराना
कारी मोहम्मद इकबाल की मौत के बाद न्यूज चैनलों ने उन्हें आतंकी बताया तो 8 मई 2025 को पुंछ जिला पुलिस ने साफ किया ये खबरें निराधार और भ्रामक हैं। पुलिस ने कहा कि मौलाना कारी मोहम्मद इकबाल सम्मानित शिक्षक और धार्मिक व्यक्ति थे। उनका किसी आतंकी संगठन से संबंध नहीं था। पुंछ पुलिस ने 8 मई को मीडिया में चल रही खबरों को गलत बताया था। सोशल मीडिया पर प्रेस रिलीज जारी कर पुलिस ने कहा कि मोहम्मद इकबाल की मौत पाकिस्तान की फायरिंग में हुई है। पुंछ के वकील शेख मोहम्मद सलीम ने लोकल कोर्ट में याचिका दायर कर जी न्यूज, न्यूज 18 इंडिया और अज्ञात एडिटोरियल स्टाफ के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की। इस याचिका पर 28 जून 2025 को पुंछ के सब-जज और स्पेशल मोबाइल मजिस्ट्रेट शफीक अहमद ने FIR दर्ज करने का आदेश दिया।
इसके बाद जी न्यूज, न्यूज 18 और कुछ दूसरे न्यूज चैनलों के एडिटर और एंकर के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। ये केस अज्ञात में दर्ज किया गया। सब-जज शफीक अहमद के कोर्ट ने कहा कि आरोपियों की माफी से उनकी गैर-जिम्मेदाराना रिपोर्टिंग से हुआ नुकसान ठीक नहीं होता। यह गलत रिपोर्टिंग उस वक्त की गई, जब भारत ने पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था।’

