SNE NETWORK.MOHALI/CHANDIGARH.
पंजाब और चंडीगढ़ क्षेत्र में नशीली दवाओं के अवैध कारोबार के खिलाफ नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने बड़ी कार्रवाई की है। एनसीबी की चंडीगढ़ जोनल यूनिट ने अंतरराज्यीय दवा तस्करी नेटवर्क से जुड़ी 20.10 करोड़ रुपए की 25 अचल संपत्तियों को फ्रीज की है। इन संपत्तियों में औद्योगिक प्लॉट, दुकानें, व्यावसायिक इकाइयां और आवासीय फ्लैट शामिल हैं। ये मुख्य रूप से मोहाली के गिल्को इंडस्ट्रियल पार्क, सिटी सेंटर-3, सिटी सेंटर वॉक समेत कई इलाकों में स्थित हैं।
दिल्ली स्थित सक्षम प्राधिकारी ने 30 अक्टूबर 2026 को NDPS एक्ट की धारा 68F(2) के तहत यह पुष्टि की। इससे पहले एनसीबी ने 2 अक्टूबर को संपत्तियों को फ्रीज करने का आदेश जारी किया था। अब इन संपत्तियों को बेचा, हस्तांतरित या किसी अन्य तरह से इनके लेनदेन नहीं किया जा सकेगा।
एनसीबी की वित्तीय जांच में सामने आया कि अवैध तरीके से सप्लाई की गई दवाओं की बिक्री से मिली रकम को अलग-अलग फर्मों के बैंक खातों के जरिए घुमाया गया। जांच एजेंसी के मुताबिक, आरोपियों ने अपने और परिजनों के नाम पर संपत्तियां खरीदी थीं, लेकिन इनके लिए कानूनी आय का स्रोत नहीं बता सके। फ्रीज की गई 25 संपत्तियों में औद्योगिक प्लॉट, दुकानें, दुकान-सह-ऑफिस और आवासीय अपार्टमेंट शामिल हैं। इनमें मोहाली के अलावा गिल्को इंडस्ट्रियल पार्क, जनता इंडस्ट्रियल एस्टेट, गैलेक्सी हाइट्स-2 और क्वींसटाउन जैसे इलाके शामिल हैं।
इस पूरे नेटवर्क का खुलासा 7 फरवरी 2025 को अमृतसर में 5,000 ट्रामाडोल टैबलेट पकड़े जाने के बाद हुआ था। दवाओं की पैकेजिंग पर हरिद्वार की मेसर्स जेआर फार्मास्युटिकल्स को निर्माता और देहरादून की मेसर्स तिवारी मेडिकल एजेंसीज को मार्केटिंग फर्म बताया गया था।
जांच में मार्केटिंग फर्म का कोई वास्तविक अस्तित्व नहीं मिला। इसके बाद एनसीबी ने विशेष जांच टीम (SIT) बनाकर सप्लाई नेटवर्क की जांच शुरू की। इसमें उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की दवा कंपनियों से जुड़ा नेटवर्क सामने आया। आरोप है कि ये कंपनियां फर्जी संस्थाओं के नाम पर दवाओं की सप्लाई कर अवैध कारोबार कर रही थीं।
एनसीबी के मुताबिक, इस मामले में अब तक भारी मात्रा में नशीली दवाएं और कच्चा माल बरामद किया जा चुका है। कार्रवाई के दौरान 17 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। जांच में इस नेटवर्क के तार 7 राज्यों से जुड़े मिले हैं।
करीब 34 लाख साइकोट्रॉपिक गोलियां।
10.57 लाख कोडीन आधारित सिरप की बोतलें।
50 हजार ट्रामाडोल एम्पुल।
5 हजार मिडाजोलम शीशियां।
करीब 2,200 किलो साइकोट्रॉपिक पाउडर और कच्चा माल।
इन 7 राज्यों में फैला था नेटवर्क: पंजाब, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान, उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश।
जांच के दौरान हिमाचल प्रदेश के काला-अंब स्थित मेसर्स डिजिटल विजन और मेसर्स वेलिंटन हेल्थकेयर से भी बड़ी मात्रा में साइकोट्रॉपिक दवाएं और कच्चा माल जब्त किया गया था।
इस मामले में अंबाला कैंट के रहने वाले कोनिक गोयल, मानिक गोयल और उनके पिता परशोत्तम लाल गोयल फरार बताए गए हैं। एनसीबी के अनुसार, समन और गैर-जमानती वारंट जारी होने के बावजूद वे जांच में शामिल नहीं हुए। सुप्रीम कोर्ट भी उनकी अग्रिम जमानत याचिकाएं खारिज कर चुका है।
फ्रीज की गई संपत्तियां इन्हीं आरोपियों और उनके परिवार के सदस्यों के नाम पर दर्ज हैं। एनसीबी अब इस कार्रवाई के जरिए नशे के अवैध कारोबार से जुटाई गई रकम और उससे बनाई गई संपत्तियों पर शिकंजा कस रही है।
एनसीबी ने आम लोगों से नशीली दवाओं की तस्करी से जुड़ी जानकारी देने की अपील की है। इसके लिए मानस (MANAS) राष्ट्रीय नारकोटिक्स हेल्पलाइन का टोल फ्री नंबर 1933 जारी किया गया है। एजेंसी के मुताबिक, सूचना देने वाले की पहचान गोपनीय रखी जाएगी।###USA###CANADA###UK###PUNJAB###CHANDIGARH###NCB###AUSTRALIA###NEWZEALAND###FRANCE###GERMANY###ITLAY###SINGAPORE###

