राज्य ब्यूरो.चंडीगढ़।
एक निजी चैनल में कुख्यात गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के इंटरव्यू मामले को पंजाब सरकार ने गंभीरता से लिया। राज्य सरकार ने इस मामले की जांच डीजीपी को सौंप दी है। इस मामले में पंजाब और राजस्थान की पुलिस अपना-अपना झाड़ रही हैं।
वीडियो कॉल सूबे की जेल में नहीं हुई
पंजाब पुलिस ने कहा है इंटरव्यू के लिए लॉरेंस बिश्नोई की वीडियो कॉल सूबे की जेल में नहीं हुई है। पंजाब के आईजी जेल रूप लाल अरोड़ा ने कहा कि हमारी जांच के अनुसार यह इंटरव्यू राजस्थान से हुआ है। वहीं, राजस्थान ने भी पंजाब पुलिस के इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया है।
राजस्थान से नहीं हुई इंटरव्यू
राजस्थान के आईजी जेल विक्रम सिंह का कहना है कि उन्होंने प्रारंभिक जांच करवाई है, जिससे यह स्पष्ट हो गया है कि यह इंटरव्यू राजस्थान की किसी जेल से नहीं हुआ। जयपुर के पुलिस कमिश्नर आनंद श्रीवास्तव का कहना है कि लॉरेंस जब जयपुर पुलिस की हिरासत में था, तब न तो वह किसी मीडियाकर्मी से मिला था और न ही किसी को इंटरव्यू दिया।
बठिंडा जेल की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
इंटरव्यू के बाद पंजाब में खासकर बठिंडा जेल की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। इसी बीच, डीजीपी गौरव यादव ने बुधवार को जेल अधिकारियों के साथ बैठक कर स्थिति की समीक्षा की। वहीं, मुख्य सचिव विजय कुमार जंजुआ ने डीजीपी को मामले की जांच कर दो दिन में जांच रिपोर्ट पेश करने को कहा है।
जेल अधीक्षक ने दिया यह जवाब
मुख्य सचिव की ओर से डीजीपी को भेजे गए जांच संबंधी निर्देश में इस बात का पता लगाने पर जोर दिया गया है कि गैंगस्टर का इंटरव्यू किस स्थान लिया गया और जेल में बंद बिश्नोई का मीडिया से संपर्क कैसे हुआ। इस बीच, मंगलवार रात को ही बठिंडा सेंट्रल जेल के सुपरिंटेंडेंट एनडी नेगी ने दावा किया कि यह संभव ही नहीं है कि उनकी जेल से कैदियों का इंटरव्यू हो सके।
विपक्ष ने मांगा मान का इस्तीफा
लॉरेंस के इंटरव्यू के बाद इस मुद्दे पर राजनीति भी गरमा गई है। शिअद के अध्यक्ष सुखबीर बादल ने ट्वीट कर मुख्यमंत्री भगवंत मान से इस्तीफे की मांग की है। उन्होंने कहा कि इस घटना ने सारी साठगांठ को खोल कर रख दिया है। वहीं, भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष अरविंद खन्ना ने कहा है कि पंजाब सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि जेल तक मोबाइल फोन कैसे पहुंचा।

