चंडीगढ़ की खाकी पर लगा दाग….मामले की सुनवाई करते हाईकोर्ट ने पंजाब डीजीपी को दिए जांच के आदेश

एसएनई नेटवर्क.चंडीगढ़। 

आपराधिक मामले में कोर्ट के आदेश पर जांच में शामिल होने जा रहे व्यक्ति का गायब होना और बाद में उसकी किसी अन्य केस में गिरफ्तारी के मामले को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने बेहद संजीदा बताया है। हाईकोर्ट ने कहा कि यह मामला न्याय प्रशासन आम आदमी के विश्वास को डगमगाने की क्षमता रखता है। कोर्ट ने कहा कि इस मामले में चंडीगढ़ पुलिस पर गंभीर आरोप हैं और ऐसे में अब पंजाब के डीजीपी इस मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन करें और इसका मुखिया एसएसपी स्तर के नीचे का अधिकारी नहीं होना चाहिए।


याचिकाकर्ता ने अदालत में दायर की थी अपील


डॉ. मोहित धवन के खिलाफ 2 सितंबर 2020 को एफआईआर दर्ज हुई थी और इस मामले में अग्रिम जमानत की मांग को लेकर उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। उन्होंने पुलिस अधिकारियों पर दो अन्य एफआईआर में समझौते के लिए दबाव का आरोप लगाया था। कोर्ट ने उन्हें मामले में जांच में शामिल होने का आदेश दिया था। आरोप के अनुसार जब वह 7 जनवरी को सुबह साढ़े 10 बजे केस की जांच में शामिल होने पहुंचे तो एएसआई अजमेर, हेड कांस्टेबल अनिल कुमार, कांस्टेबल विकास हुड्डा व सुभाष कुमार ने उसे कोर्ट परिसर से उठा लिया। इसके चलते वह कोर्ट में पेश नहीं हो सके। इसके बाद पुलिस ने 6 अक्टूबर 2021 में दर्ज एक एफआईआर में उसकी गिरफ्तारी दिखा दी।


पिछले 2 वर्ष से मामला था विचाराधीन


मामला पिछले दो साल से हाईकोर्ट में विचाराधीन था और अब इस मामले में में सभी पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने पाया कि प्राथमिक तौर पर यदि इस मामले के साक्ष्यों पर गौर किया जाए तो पुलिस की दो टीमों के बीच तालमेल दिखाई देता है। आरोप के अनुसार एक टीम कोर्ट में याची को जांच में शामिल करवाने के इंतजार में बैठी रहती है तो वहीं दूसरी टीम याची को उठाकर उसकी कुछ समय बाद गिरफ्तारी दिखाती है। याची ने आरोप लगाया है कि इस मामले में पुलिस ने बड़े नियोजित तरीके से अपहरण व न्याय व्यवस्था के कार्य में बाधा डालने का प्रयास किया है और इसकी जांच शहर की पुलिस नहीं कर सकती।


जांच आगे बढ़ाने का आदेश


कोर्ट ने कहा कि यह ऐसा मामला है जो न्याय व्यवस्था में आम आदमी के विश्वास को डगमगाने की क्षमता रखता है। यदि आरोप सत्य पाए जाते हैं तो यह पुलिस के न्याय व्यवस्था के क्रियान्वयन में हस्तक्षेप का मामला बनता है। ऐसे में इस मामले की जांच अब हाईकोर्ट ने पंजाब के डीजीपी को सौंपते हुए अब एफआईआर दर्ज कर जांच आगे बढ़ाने का आदेश दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि इस मामले में होने वाली जांच का मुखिया एसएसपी स्तर से नीचे का न हो।


यह कहा अदालत ने


हाईकोर्ट ने कहा कि इस मामले में टावर लोकेशन, जियो मैपिंग, सीसीटीवी फुटेज व अन्य तकनीकी पक्षों पर गौर करना जरूरी है। कोर्ट ने अंग्रेजी लोकोक्ति का उपयोग अपने आदेश में करते हुए शेक्सपियर के स्वर की कुछ लाइनों का जिक्र करते हुए कहा कि सीजर्स वाइफ शुड बी अबव सस्पीशंस। कोर्ट कहा कि इस मामले में अब चंडीगढ़ पुलिस भी इसी स्थिति में है। पावर में रहने वाले लोगों को ही नहीं बल्कि उनसे जुड़े लोगों को भी संदेह के घेरे से दूर रहना चाहिए। इस मामले में संदेह के घेरे में पुलिस है।


यह है पूरा मामला


डा. धवन ने तत्कालीन डीजीपी के खिलाफ शिकायत दी थी। इस शिकायत के बाद उन्होंने बताया कि लगातार देश की बड़ी एजेंसी के अधिकारियों से समझौते के लिए कॉल कर दबाव बनाया जा रहा है। इसके बाद उन पर दबाव बनाने के लिए एक फर्जी एफआईआर भी दर्ज की गई थी। 2020-2021 के दौरान मामला सुर्खियों में रहा था। डा. धवन द्वारा फर्जी बताए जा रहे मामले मे जमानत की मांग को लकर उन्होंने हाईकोर्ट की शरण ली थी। हाईकोर्ट के आदेश पर ही वह अदालत पहुंचे थे जहां आरोप के अनुसार उन्हें किडनैप किया गया था।

100% LikesVS
0% Dislikes