एसएनई नेटवर्क.चंडीगढ़।
पंजाब में हजारों करोड़ रुपये के नशे के कारोबार में शामिल पुलिस अफसरों के खिलाफ कार्रवाई का रास्ता साफ हो गया है। हाईकोर्ट ने इस मामले से संबंधित आईपीएस सिद्धार्थ चट्टोपाध्याय की अध्यक्षता वाली एसआईटी की तीन सीलबंद रिपोर्ट को खोलकर पंजाब सरकार को कार्रवाई का आदेश दिया। वहीं, सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार ने कहा कि वह अब इस मामले में आरोपियों पर कार्रवाई करना चाहती है। कोर्ट ने कहा कि हमने न तो कभी किसी आरोपी के खिलाफ कार्रवाई पर रोक लगाई थी और न ही कभी लगाएंगे।
कई बड़े पुलिस अधिकारी शामिल
पंजाब में हजारों करोड़ के नशे के कारोबार मामले में पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट ने संज्ञान लेते हुए सुनवाई आरंभ की थी। इस मामले में लगातार पंजाब पुलिस के अधिकारियों की संलिप्तता की बात सामने आ रही थी। सुनवाई के दौरान कहा गया था कि बिना पुलिस अधिकारियों की संलिप्तता के नशे के इस कारोबार को अंजाम दिया ही नहीं जा सकता है।
दिशा से भटकाने का प्रयास
कोर्ट ने इसके बाद पुलिस अधिकारियों की संलिप्तता को लेकर आईपीएस अधिकारी सिद्धार्थ चट्टोपाध्याय, प्रबोध कुमार व कुंवर विजय प्रताप सिंह की एसआईटी गठित की थी। सुनवाई के दौरान पूर्व डीजीपी शशिकांत ने कहा कि यह मामला पंजाब में फैले नशे के कारोबार से जुड़ा हुआ है और पुलिस अधिकारियों को लेकर लंबित रिपोर्ट खोलने की मांग कोर्ट को इस दिशा से भटकाने का प्रयास है। रिपोर्ट खोलने की मांग करने वाले एडवोकेट नवकिरण ने कहा कि नशे के कारोबार में पुलिस अधिकारियों की भूमिका इन रिपोर्ट से सामने आती है। इन रिपोर्ट को इस मामले से अलग नहीं किया जा सकता।
जानें, कब सौंपी गई थी सीलबंद रिपोर्ट
एसआईटी ने अपनी तीन सीलबंद रिपोर्ट हाईकोर्ट में 2018 में सौंप दी थी। इसके साथ ही एक चौथी रिपोर्ट भी सौंपी गई थी, जिससे बाकी के दो आईपीएस ने खुद को अलग करते हुए हस्ताक्षर से इनकार कर दिया था। लंबे समय से इन रिपोर्ट को खोलने की मांग चल रही थी। इसी बीच एडवोकेट नवकिरण सिंह ने इस मामले में अर्जी दाखिल कर इन्हें खोलने की मांग की थी। हाईकोर्ट में अब इन रिपोर्ट के खुलने के बाद नशा तस्करी से जुड़े लोगों पर कार्रवाई का रास्ता साफ हो गया है।

