एसएनई नेटवर्क.चंडीगढ़।
विवादों में चल रही फिलिप्स कंपनी मोहाली को गैर कानूनी तरीके से डी-रजिस्टर करने की वजह से राज्य सरकार को हुए 700 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ है। वहीं, सरकार को विभिन्न कानूनी केसों का सामना करना पड़ रहा है। इस मामले में विजिलेंस ब्यूरो पंजाब ने अब ज्वाइंट डायरेक्टर फैक्टरी नरिंदर सिंह को नामजद कर सेक्टर-68 मोहाली स्थित उनकी रिहायश से गिरफ्तार किया है।
इस धारा के अधीन दर्ज हुआ केस
इस मामले में विजिलेंस ने पहले ही भ्रष्टाचार निरोधक एक्ट की धारा 13 (1) (ए), 13 (2) व आईपीसी की धारा 409, 420, 465, 467, 468, 471, 201, 120- बी केस दर्ज किया था। अभी तक इस मामले में नौ आरोपी अधिकारी-कर्मचारी पकड़े जा चुके हैं।
जांच में यह सामने आया
जांच में सामने आया है कि उक्त अधिकारी को 28 दिसंबर 2018 को ज्वाइंट डायरेक्टर व फिलिप्स कंपनी की तरफ से श्रम कमिश्नर पंजाब से एक पत्र डाक के माध्यम से भेजा गया। लेकिन नरिंदर सिंह ने यह एप्लीकेशन श्रम कमिश्नर पंजाब को भेजे बिना खुद ही कार्रवाई शुरू कर दी।
कंपनी को डी रजिस्टर कर दिया
आरोपी अधिकारी ने अपने पत्र नंबर (19) 10 जनवरी 2019 के माध्यम से बिना कोई पड़ताल किए और फिलिप्स कंपनी के किसी भी वर्कर के बयान लिए बिना श्रम कमिश्नर की मंजूरी से बिना कंपनी को डी रजिस्टर कर दिया। इसके अलावा फैक्टरी डी-रजिस्टर करने संबंधी विभिन्न इंडस्ट्रीज, डायरेक्टर फैक्टरीज आदि के दफ्तरों की जानकारी हेतु डी-रजिस्टर करने के लिए 25 जनवरी 2019 को पत्र भेजा।
अधिकारी की गलती से कंपनी पहुंच गई सुप्रीम कोर्ट
यदि नरिंदर सिंह इस फैक्टरी को डी रजिस्ट्रर नहीं करता तो यह फैक्टरी बंद नहीं हो सकती थी। साथ ही औद्योगिक विवाद कानून की धारा -25 के अधीन चालान देना ही नहीं बनता था। ऐसा चालान करने से पहले नरिंदर सिंह को बकायदा पड़ताल करनी चाहिए थी। जो कि उसने इस काम में नहीं की है। इस वजह से कंपनी वालों को फायदा हुआ। उन्होंने इसी चीज का फायदा उठाकर पंजाब सरकार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में विशेष आज्ञा याचिका दायर करके 25 अगस्त 2019 को धारा -25 के तहत पेश किए चालान के खिलाफ स्टे हासिल की। वहीं, जांच में यह भी सामने आया है कि उक्त अधिकारी यदि इस कंपनी को भी रजिस्टर न करते हुए सरकार को 700 करोड़ का राजस्व प्राप्त होना था।

