…….शायद नहीं पनप पाता खालिस्तानी अमृतपाल, सही समय पर दबा दी जाती उग्र लहर

सुलगती आग में पानी का छिड़काव बहुत पहले कर दिया जाता, तो शायद पंजाब के हालात वर्तमान जैसे नहीं होते। लंबे समय तक हुकूमत देश विरोधी गतिविधियों के खिलाफ चुप्पी साधे बैठी रहीं। खालिस्तानी नारा देश में पूर्ण रूप से प्रतिबंधित है। पंजाब को तोड़ने की कोशिश कई बार की गई। लेकिन, कुछ हकुमतों ने इसे कुचल दिया। लेकिन, पंजाब की वर्तमान सरकार अमृतपाल के खिलाफ पहले जाग जाती तो शायद इतना बड़ा देश विरोधी आंदोलन खड़ा नहीं हो पाता। समय पर, उसे कुचला जा सकता था। उसकी देश-विरोधी गतिविधियों पर अंकुश लगाया जा सकता था। जब, पुलिस पर बड़ा हमला किया गया तो पुलिस इसलिए खामोश रही कि वह इस बात का इंतजार में थी कि उसे हुकुमत की तरफ से बड़ी कार्रवाई करने का संकेत मिले। 

देर आए, दुरुस्त आए, राज्य सरकार को लगा कि अब पंजाब में देश के खिलाफ चल रही उग्र लहर को दबाना ही चाहिए। राज्य के मुखिया , केंद्र के गृह मंत्री से मुलाकात करने के लिए पहुंचे तथा देश विरोधी खालिस्तानी अमृतपाल के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करने के लिए सहयोग की मांग की। पूर्व में ही , एक साक्षात्कार में देश के गृह मंत्री ने इस बात का संकेत दे दिया था कि वह पंजाब में खालिस्तान को पनपने नहीं देंगे। दिल खोल कर केंद्र ने पंजाब में अद्धसैनिक बल की कई टुकड़ियां भेजी। सूत्रों से पता चला है कि केंद्र के सहयोग के बिना राज्य सरकार अमृतपाल के खिलाफ इतनी बड़ी कार्रवाई करने में सक्षम नहीं थी। 

अमृतपाल, पिछले चार रोज से भगौड़ा चल रहा हैं। उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार के जवाब में फटकार लगाते कहा कि 80 हजार पुलिस जवान लगाने के बावजूद आप, उसको पकड़ क्यों नहीं पाए। इतनी फोर्स क्या जरूरत आ पड़ी। इसके बावजूद फरार हो जाए तो ठीक नहीं। इंटरनेट सेवाएं कुछ जगह बहाल कर दी गई हैं, लेकिन अभी भी कुछ जिलों में इसे बंद किया गया। सरकार की भूल का नतीजा हमेशा आम जनता को भुगतना पड़ता हैं। रास्ते से लेकर , कार्य तक की विलंबना आम जनता सहन करती हैं। 

आईएसआई की संलिप्तता, विदेश से फंडिंग, देश विरोधी गतिविधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने में राज्य सरकार अपना तंत्र इतना मजबूत नहीं दिखा पाई। शिकंजा कसने में राज्य सरकार अपने खुफिया विभाग तथा पुलिस की ताकत का सही तरीके से इस्तेमाल ही नहीं कर पाई। शायद, इन पर गंभीरता से पूर्व में ही भरोसा कर लिया होता तो शायद राज्य में देश-विरोधी ताकतें अपनी हिम्मत नहीं दिखा पाती।भविष्य में इस प्रकार की ताकत, फिर से  उबर नहीं पाए, इसके लिए राज्य सरकार को केंद्र से सहयोग लेकर मजबूत रणनीति बनानी होगी। 

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