सिद्धू से राहुल-प्रियंका गांधी की फोन पर लंबी चर्चा…..पंजाब में नवजोत को मिल सकती बड़ी जिम्मेदारी

एसएनई नेटवर्क.चंडीगढ़। 

पंजाब कांग्रेस के पूर्व प्रधान नवजोत सिंह सिद्धू पटियाला जेल से बाहर आ गए हैं। हालांकि अभी तक पंजाब कांग्रेस के किसी बड़े नेता ने उनसे मुलाकात नहीं की है वहीं कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व का सिद्धू से प्यार बरकरार है। सूत्रों के अनुसार, रविवार को राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने नवजोत सिंह सिद्धू से फोन पर बात की। इसके बाद से पंजाब कांग्रेस में हलचल मच गई है।


वैसे नवजोत सिंह सिद्धू का अगला सियासी सफर आसान नहीं रहने वाला है। कांग्रेस में मुकाम बनाने के लिए उनको सियासी जंग लड़नी होगी। पंजाब कांग्रेस के सीनियर नेता उन्हें पहले ही विधानसभा चुनाव में पार्टी की हार का जिम्मेदार ठहरा चुके थे। जबकि पिछली कांग्रेस सरकार के दौरान सिद्धू जिस भूमिका में रहे, वह पार्टी में दोबारा बड़ी भूमिका चाहेंगे। पूर्व प्रदेश प्रधान को कांग्रेस आलाकमान का वरदहस्त हासिल है। पंजाब में ‘भारत जोड़ो’ यात्रा के समय राहुल गांधी भी नवजोत सिंह सिद्धू को बड़ी जिम्मेदारी सौंपने की बात कह चुके हैं। 


गुटबंदी तेज होने की संभावना


पंजाब कांग्रेस प्रधान अमरिंदर राजा वड़िंग ने जिन्हें दरकिनार कर रखा है उन्होंने सिद्धू के साथ कंधे से कंधा मिला लिया है। खासकर पीपीसीसी के तीन पूर्व प्रधान सिद्धू के गले लग गए हैं। समीकरण ऐसे बनते जा रहे हैं कि निश्चित तौर पर आने वाले दिनों में कांग्रेस में गुटबंदी तेज होने की प्रबल संभावना बन गई है।


जेल में  सिद्धू से लगातार मुलाकात करते रहे 3 पूर्व प्रधान


यह किसी से छिपा नहीं है जितनी देर नवजोत सिंह सिद्धू पटियाला जेल में बंद थे, उनसे पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के तीन पूर्व प्रधान महेंद्र सिंह केपी, बीबी राजिंदर कौर भट्ठल, शमशेर सिंह दूलो लगातार मुलाकात करते रहे हैं। सिद्धू ने इन्हीं नेताओं के साथ लगातार अपनी आगामी रणनीति पर मंत्रणा की । दूलो राज्यसभा सदस्य भी रह चुके हैं और अबकी बार कांग्रेस ने उन्हें संसद में नहीं भेजा।


सजा के दौरान कांग्रेस ने नहीं ली सुध


यह बात किसी से छिपी नहीं कि सिद्धू के पंजाब कांग्रेस के अधिकतर नेताओं के साथ संबंध भी अच्छे नहीं रहे हैं। उनकी सजा के एक साल के दौरान कांग्रेस ने उनकी सुध नहीं ली, हालांकि मनप्रीत सिंह बादल जैसे नेता उन्हें पटियाला जेल में मिलने पहुंचते रहे, लेकिन वह भी कांग्रेस छोड़कर भाजपा में जा चुके हैं। दरअसल, कैप्टन अमरिंदर सिंह के साथ उनके संबंध जगजाहिर हैं। कैप्टन से मुख्यमंत्री पद छीनने और उन्हें पार्टी से बाहर करने के लिए सिद्धू को ही जिम्मेदार माना जाता रहा है।


आक्रामक शैली के पीछे राहुल गांधी-प्रियंका गांधी सिद्धू के साथ निकटता 


सिद्धू के इस हौसले और आक्रामक शैली के पीछे राहुल गांधी और प्रियंका गांधी से उनकी निकटता को माना जाता रहा। कैप्टन और सिद्धू के बीच खींचतान जब चरम पर थी, आलाकमान ने सिद्धू की मांग को स्वीकार करते हुए सुनील जाखड़ को हटाकर उनको प्रदेश अध्यक्ष का ओहदा भी दिया। इसके बाद चरणजीत सिंह चन्नी की सरकार के दौरान भी मुखर रहे, क्योंकि कैप्टन से बाद वह मुख्यमंत्री पद चाहते थे, जिसे लेकर सुखजिंदर रंधावा ने भी दावेदारी पेश कर दी थी। विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की करारी हार हुई तो खामोश बैठे पंजाब कांग्रेस के अधिकांश सीनियर नेता खुलकर सिद्धू के खिलाफ हो गए और हार के लिए उनको ही सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया। सिद्धू पर पार्टी में फूट डालने के आरोप भी कांग्रेस के नेता लगाते रहे हैं।

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