वरिष्ठ पत्रकार.चंडीगढ़।
पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने व्यवस्था दी है कि सेवाकाल के दौरान दिव्यांगता प्राप्त करने वाले कर्मचारी भी शारीरिक रूप से विकलांग (पीएच) कोटे के तहत पदोन्नति में आरक्षण के समान हकदार हैं। पीठ ने कहा है कि यह लाभ केवल नियुक्ति के समय शारीरिक रूप से विकलांग उम्मीदवारों तक ही सीमित नहीं हो सकता। यह फैसला न्यायमूर्ति हरप्रीत बराड़ ने एक कर्मचारी द्वारा दायर याचिका को स्वीकार करते हुए सुनाया, जिसमें पंजाब राज्य विद्युत निगम लिमिटेड और अन्य प्रतिवादियों को निर्देश दिया गया था कि वे उसे 16 जुलाई, 2023 से, जिस दिन उसके कनिष्ठों को पदोन्नत किया गया था, सभी परिणामी लाभों के साथ, शारीरिक रूप से विकलांग कोटे के तहत सहायक अभियंता (विद्युत) के पद पर पदोन्नत करें। यह प्रक्रिया 8 सप्ताह के भीतर पूरी करने का आदेश दिया गया है।
याचिकाकर्ता वरिष्ठ अधिवक्ता पवन कुमार और वकील विदुषी कुमार के माध्यम से 11 मार्च के उस आदेश को रद्द करने का निर्देश मांग रहे थे, जिसके तहत निगम ने उनके दावे पर तत्काल विचार करने से इनकार कर दिया था। प्रतिवादियों ने कहा कि “यह प्रश्न कि क्या सेवा के दौरान विकलांगता प्राप्त करने वाला व्यक्ति विकलांग व्यक्ति के रूप में आरक्षण का लाभ पाने का हकदार है, अभी भी विचाराधीन है” और उनके मामले पर राज्य सरकार से स्पष्टीकरण मिलने के बाद ही विचार किया जाएगा।
स्थगन को अस्वीकार करते हुए, न्यायमूर्ति बराड़ ने कहा कि सरकार द्वारा दिया गया कोई भी स्पष्टीकरण विधायी और न्यायिक आदेश का अतिक्रमण नहीं कर सकता। विकलांग व्यक्ति (समान अवसर, अधिकारों का संरक्षण और पूर्ण भागीदारी) अधिनियम और विकलांग व्यक्ति अधिकार अधिनियम में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि कोई भी प्रतिष्ठान सेवा के दौरान विकलांगता प्राप्त करने वाले किसी कर्मचारी को सेवा से नहीं हटाएगा या उसके पद में कमी नहीं करेगा। यहाँ तक कि किसी व्यक्ति को केवल उसकी विकलांगता के आधार पर पदोन्नति से भी वंचित नहीं किया जाएगा।

