वरिष्ठ पत्रकार.चंडीगढ़।
कांग्रेस के वर्तमान विधायक तथा वरिष्ठ नेता परगट सिंह ने कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह पर बहुत बड़ा आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि बेअदबी मामलों की जांच को लेकर कैप्टन ने वर्ष 2015 में बादल परिवार से समझौता कर लिया था, इसलिए, पार्टी ने उन्हें मुख्यमंत्री पद से हटा दिया था। परगट सिंह की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब सत्तारूढ़ आप और शिअद प्रमुख सुखबीर बादल ने कांग्रेस पर इन घटनाओं के दोषियों को “बचाने” का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि जब चरणजीत सिंह चन्नी ने पिछली कांग्रेस सरकार के अंतिम समय में मुख्यमंत्री का पद संभाला था, तो वर्षों की देरी के कारण उनके पास जांच को अंजाम तक पहुँचाने के लिए बहुत कम समय बचा था।

कांग्रेस नेता ने मुख्यमंत्री भगवंत मान को बेअदबी की घटनाओं में डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम के खिलाफ जांच में हुई देरी पर सफाई देने की भी चुनौती दी। फरीदकोट के बरगाड़ी और बुर्ज जवाहर सिंह वाला गांव में दो गुरुद्वारों में एक धार्मिक ग्रंथ की कथित बेअदबी तब हुई थी जब शिअद-भाजपा गठबंधन सत्ता में था और प्रकाश सिंह बादल और सुखबीर सिंह बादल क्रमशः मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री के पदों पर थे। कांग्रेस नेता ने संवाददाताओं से कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह, जो अब भाजपा में हैं, ने जांच में नरम रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि चन्नी के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने अपने 100 दिनों के कार्यकाल में जो कर सकती थी, वह किया।

सुखबीर पर निशाना साधते हुए उन्होंने उन पर “मुद्दे का राजनीतिकरण करने और उसे अनसुलझा रखने” का आरोप लगाया। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा और आप अपने कार्यकाल के दौरान डेरा प्रमुख को बचाने में मिलीभगत कर रहे थे। उन्होंने दावा किया, “भगवंत मान बेअदबी के मामलों में डेरा के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी देने का दावा करते हैं, लेकिन मुख्यमंत्री को वर्तमान स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

