वरिष्ठ पत्रकार.चंडीगढ़।
पंजाब में कांग्रेस (आईएनसी) ने अगले चुनाव में अपनी स्थिति को मजबूत करने के लिए एक रणनीति बनाई। बताया जा रहा है कि अब कांग्रेस भी अब बूथ स्तर पर संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने जा रही है। इसके लिए कई प्रकार की समितियों को बनाया जा रहा है। पता चला है कि प्रदेश में आने वाले विधानसभा (मिशन-2027) के तहत कांग्रेस अपने राष्ट्रीय नेता राहुल गांधी के आदेश पर संगठन सृजन अभियान के तहत इस पर काम कर रही है।
देखने में आया कि वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में शानदार प्रदर्शन करने वाली कांग्रेस की सियासी जमीन तेजी से खिसक गई है। इसके पीछे पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में दरार और कमजोर संगठन एक बड़ा कारण माना जा रहा है। यह ही वो वजह थी जिसके कारण कांग्रेस वर्ष 2022 में 18 सीटों पर ही सिमट गई। पंजाब में पार्टी की यह स्थिति कांग्रेस हाईकमान के लिए बड़ी चिंता का विषय है।
हाल ही गिद्दड़बाहा, डेरा बाबा नानक, चब्बेवाल और लुधियाना पश्चिमी सीटों पर उपचुनाव में भी कांग्रेस की हार ने इस चिंता को और बढ़ा दिया। इसी के मद्देनजर मिशन-2027 से पहले अपनी खोई हुई सियासी जमीन को वापस पाने के लिए पंजाब कांग्रेस अब संगठनात्मक तंत्र की सुदृढ़ता में जुट चुकी है।
जानिए, पार्टी का क्या होगा अगला मिशन
कांग्रेस हाईकमान इस बात को भांप चुका है कि पंजाब में दोबारा वापसी के लिए जमीनी स्तर पर जाकर लोगों से जुड़ना होगा। इसलिए बूथ कमेटियां गठित करने के बाद अब इनकी मजबूतियों पर जोर दिया जा रहा है। हर 20 बूथों पर एक मंडल कमेटी बनाई जाएगी, जिनकी संख्या सूबे में कुल 1208 होंगी। 29 जिलाध्यक्ष (कुछ जिलों में शहरी व ग्रामीण) और 280 ब्लॉक अध्यक्ष पहले से ही नियुक्त हैं। इसी तरह ग्रामीण क्षेत्रों में गांव और शहरी क्षेत्रों में वार्ड कमेटियों का गठन किया जा रहा है। उधर 117 विधानसभा हलकों के लिए ब्लॉक कोऑर्डिनेटर भी गठित किए गए हैं। इसी तरह हर दो इलाकों पर एक और कुल 58 संगठन ऑब्जर्वरों की नियुक्ति कर दी गई है। ये ऑब्जर्वर और कोऑर्डिनेटर सभी कमेटियों के पदाधिकारियों की गतिविधियों व सक्रियता पर नजर रखेंगे और एक माह के भीतर अपनी रिपोर्ट पंजाब कांग्रेस कमेटी को देंगे।

