….फिर से मान सरकार का यू-टर्न…..सहकारिता पंजीकरण फीस का पुराना फैसला लिया वापस……..अब 10 हजार होगी पंजीकरण फीस

सहकार भारती ने सीएम मान के फैसले का जताया आभार…..प्रमुख सचिव वीके सिंह का दिल से किया धन्यवाद

वरिष्ठ पत्रकार.AMRITSAR/चंडीगढ़।   

देश के प्रत्येक प्रांत में सहकारिता मुहिम एक प्रकार से एक अलग पहचान रखती है। यू कहें कि देश के हर वर्ग की उन्नति का रास्ता ही इस मुहिम के साथ जुड़ा होता है। युवा से लेकर प्रत्येक वर्ग के लिए रोजगार के साथ-साथ उन्नति का रास्ता ही सहकारिता विभाग ही तय करता है। लेकिन, पिछले दिनों पंजाब में सहकारिता विभाग ने एक नया कानून पारित कर सहकारी सभा की पंजीकृत फीस को लाख रुपए में कर दिया था। इससे हर क्षेत्र से जुड़ा वर्ग काफी निराश हो गया था। लेकिन,  सहकार भारती संगठन से जुड़े वरिष्ठ नेता शंकर दत्त तिवारी के संज्ञान में जब मामला आया तो उन्होंने इस मामले की प्रमुखता को देखते हुए सरकार के समक्ष पूरे जोर-शोर से उठाया। आखिरकार , लंबे समय के उपरांत पंजाब सरकार को अपना फैसला लेने के लिए मजबूर होना पड़ गया। अब सहकारिता विभाग के अधीन सहकारी सभाओं की फीस 10 हजार निर्धारित कर दी गई। शंकर तिवारी ने प्रदेश के मुख्यमंत्री भगवंत मान तथा प्रमुख सचिव वीके सिंह का आभार जताया है। 

यह था सरकार का पहला फैसला

इससे पहले वर्ष 2023 में पंजाब सरकार के सहकारिता विभाग ने पंजीकृत फीस को हजारों की बजाय लाखों रुपए में कर दिया गया। इस फैसले को लेकर प्रदेश के हर वर्ग से लेकर राजनीति से जुड़ी पार्टियों ने मान सरकार का प्रमुखता से विरोध किया। लेकिन, इस फैसले के खिलाफ सहकार भारती के प्रदेश संगठन मंत्री ने काफी प्रमुखता से उठाया। प्रदेश के हर जिला स्तर पर जिलाधीश को प्रदेश के सीएम के नाम पर ज्ञापन सौंपा गया। साफ विवरण किया गया कि फैसले को तत्काल वापस लिया जाए। इसके बाद प्रदेश की सरकार पर दबाव बढ़ना शुरु हो गया। क्योंकि, देश के किसी भाग में सहकारिता विभाग ने सहकारी सभा पंजीकरण फीस इतनी नहीं बढ़ाई थी। मजबूर होकर मान सरकार के आदेश पर सहकारिता विभाग के प्रमुख सचिव को अपना फैसला वापस लेना पड़ा तथा अब 10 हजार निर्धारित फीस का नोटिस जारी करना पड़ा।  

20 लाख कर दी गई थी फीस

सरकार के पुराने फैसले के मुताबिक, तब फीस को 20 लाख कर दिया गया था। पूर्व में हजार के करीब पंजीकरण फीस हुआ करती थी। इतनी फीस किस के दबाव में आकर राज्य सरकार को करनी पड़ी, यह बात अब तक स्पष्ट नहीं हो पाई। हालांकि, सहकारिता विभाग के प्रभारी खुद सीएम मान है। सूत्रों से इस बात का भी पता चला था कि विभाग को पिछले समय इस विभाग में काफी हानि हुई थी। शायद, इस हानि को पूरा करने के लिए विभाग ने यह कदम उठाया हो सकता है। फिलहाल, सरकार को पुराना फैसला लेने के उपरांत फिर से सहकारिता विभाग से जुड़े वर्ग में खुशी लौट आई। उन्होंने सीएम का आभार भी जताया साथ ही साथ इस बात का भी अहसास दिला दिया कि वे सरकार के गलत फैसले के खिलाफ हमेशा आम जनता की आवाज बन कर खड़े रहेगें। 

बार-बार पत्र हुए कारगर साबित

सहकार भारती के प्रदेश संगठन मंत्री शंकर दत्त तिवारी ने बताया कि इस मामले को लेकर उन्होंने सरकार के खिलाफ पहले ही दिन मोर्चा खोल दिया था। प्रदेश के हर हिस्से में रहने वाले सहकारिता विभाग से जुड़े वर्ग के लोगों से मुलाकात की। उनकी मांग को प्रमुखता से सरकार के समक्ष उठाया गया। पहले स्तर में प्रदेश के सीएम तथा सहकारिता सचिव को ई-मेल के माध्यम से पत्र भेजे गए। जब कोई उचित जवाब नहीं मिला तो जिला स्तर पर सीएम के नाम ज्ञापन सौंपा गया। इसमें प्रमुखता से मांग को बताया गया तथा फैसले को गलत ठहराते हुए तत्काल वापस लेने के लिए मांग की गई। जब मामला, प्रमुख सचिव वीके सिंह के पास पहुंचा तो उन्होंने मुलाकात के लिए समय दिया। मुलाकात दौरान उन्हें बताया गया कि सहकारिता मुहिम प्रदेश की रीढ़ है, अगर फीस अधिक रहेगी तो इस वर्ग से जुड़े खासकर युवा दूर हो जाएगे। इससे सरकार तथा विभाग को भविष्य में हानि होगी। आखिरकार सरकार को अपना पुराना फैसला वापस लेना पड़ा। 

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