बड़ी जानकारी….अमृतपाल एसजीपीसी में लड़ना चाहता था चुनाव, इसलिए कुछ कर्मचारियों के संपर्क में था

वरिष्ठ पत्रकार विजय शर्मा.नितिन धवन.चंडीगढ़। 

खालिस्तान समर्थक और वारिस पंजाब दे के प्रमुख अमृतपाल सिंह को लेकर नया खुलासा हुआ है। वह एसजीपीसी में अपना दखल कायम करना चाहता था। अमृतपाल शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के कुछ कर्मचारियों के संपर्क में था। एसजीपीसी में चुनाव के माध्यम से एंट्री की भी तैयारी शुरू कर ली थी।


वह भविष्य में एसजीपीसी चुनाव लड़ने की भी तैयारी कर रहा था। उसने खालसा वहीर (धार्मिक जुलूस) के माध्यम से संपर्क बनाना शुरू कर दिया था। उसने श्री अकाल तख्त साहिब के पूर्व जत्थेदार भाई रणजीत सिंह की जत्थेबंदी और श्री हरिमंदिर साहिब के पूर्व हुजूरी रागी भाई बलदेव सिंह वडाला की जत्थेबंदी के कुछ कार्यकर्ताओं से संपर्क बनाया था।

यह जत्थेबंदियां दे रही थी साथ


इन जत्थेबंदियों के लोग भी अमृतपाल के खालसा वहीर में शामिल होते थे। इस के लिए सारी योजना पपल प्रीत सिंह ने ही तैयार की थी। क्योंकि पपल प्रीत सिंह दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (डीएसजीपीसी) के चुनाव में भी अहम भूमिका निभा चुका है। उसे पता था कि कोई भी संगठन तब तक पंथक क्षेत्रों में शक्तिशाली नहीं हो सकता, जब तक वह एसजीपीसी के अंदर प्रवेश नहीं करता।


इसलिए चुनाव लड़ने की थी तैयारियां


इसलिए उसने अपनी भविष्य की योजनाओं को पूरा करने के लिए एसजीपीसी के चुनाव लड़ने की तैयारियां कर ली थीं। इसके लिए अमृतपाल के साथियों ने सभी शिअद विरोधी जत्थेबंदियों के वर्करों और नेताओं के साथ संपर्क जोड़ना शुरू कर दिया था।


यूथ को कहा जा रहा था एसजीपीसी वोट बनाने के लिए


खुफिया एजेंसियों को यह भी इनपुट मिला था कि खालसा वहीर के दौरान शामिल होने वाले सभी अमृत धारी युवाओं को कहा जाता था कि वह आने वाले समय में एसजीपीसी के चुनाव को मुख्य रख अपने वोट एसजीपीसी के लिए जरूर बनवाएं।


पुलिस के बाद आयकर विभाग का शिकंजा


खालिस्तान समर्थक अमृतपाल सिंह के करीबी पपल प्रीत सिंह पर पुलिस के बाद आयकर विभाग ने भी शिकंजा कस दिया है। आयकर विभाग ने उनके खाते में जमा हुए 4.48 लाख रुपये का स्रोत स्पष्ट करने के लिए नोटिस भेजा है। वहीं, उनके पहले दिए गए जवाब को खारिज कर दिया है। पपल प्रीत सिंह 18 मार्च से अभी तक अमृतपाल सिंह के साथ फरार चल रहा है।

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