एसएनई नेटवर्क.अमृतसर।

पंजाब में अपराध का ग्राफ दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। आम जनता गैंगस्टर, अपराधियों से बिल्कुल असुरक्षित महसूस कर रही है। आप नेतृत्व सरकार लाख दावे कर रही है कि गैंगस्टरों को समाप्त करने के लिए उनकी एंटी गैंगस्टर टास्क फोर्स काफी अच्छा काम करने की दुहाई देकर अपनी पीठ को थपथपा रही है। लेकिन, सच्चाई यह है कि यह दावे सब झूठ है। क्योंकि, कुछ गैंगस्टर वर्तमान में फिरौती तथा कई प्रकार अवैध काम पूरी धड़ल्ले से कर रहे है। मामला पंजाब के शहर अमृतसर से जुड़ा है। पिछले दिनों एक आम नागरिक पेशे से कारोबारी ज्वाला एस्टेट के रहने वाले अमित भंडारी के आवास बाहर शहर के कुख्यात बदमाश आते है। लगभग उनकी संख्या दर्जन भर के करीब थी। सरेआम जान से मारने की परिवार को धमकी दी गई। इतना ही नहीं, 10 लाख रुपए की फिरौती मांगी गई। पुलिस ने पीड़ित के भाई दीपक भंडारी की शिकायत पर सिमर कबड्डी, ढोला, भूमन गिल, दीपू, अमनजोत सहित लगभग एक दर्जन के खिलाफ विभिन्न धाराओं के अधीन मामला दर्ज कर लिया। मामला 14 मई की रात का बताया जा रहा है। सीसीटीवी फुटेज में सभी की चेहरे चिनिहत हो गए। बड़ा सवाल, 48 घंटा बीत जाने के उपरांत किसी की गिरफ्तारी नहीं हो पाने से एक बात साबित हो जाती है कि पंजाब की अमृतसर पुलिस , इस मामले में बिल्कुल नाकाम साबित हुई।

कुछ घंटे पूर्व पीड़ित अमित भंडारी ने सोशल मीडिया पर लाइव होकर आंसू बहाते हुए कहा कि रोज-रोज की धमकियों से तंग आकर मैं, आत्महत्या करने जा रहा हू…..। कृपया, इन बदमाशों तथा इनके सरगना गैंगस्टर को बिल्कुल नहीं छोड़ा जाना चाहिए…..। मुझे प्रतिदिन फोन करके धमकाया जा रहा है कि तुझे तथा तेरे बेटे एवं परिवार को गोली मार दी जाएगी…….। तंग आ चुका हूं…..। मेरा कसूर क्या है…..। इन लोगों को बिल्कुल स्पेयर नहीं किया जाना चाहिए………। अपील करता हूं कि मेरी परिवार की सुरक्षा की जाए…….। साफ तौर पर बदमाश यहीं कह रहे है कि खुलेआम शहर में बदमाशी करेंगे…..। शहर में लाशें ही लाशें बिछा देंगे…..। कृपया मेरे परिवार को बचा लिया जाए……….। वीडियो लगभग 2 मिनट के करीब का है।

इस खौफनाक घटनाक्रम से यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि अब अमृतसर बिल्कुल सुरक्षित नहीं रही है। सिर्फ तो सिर्फ गैंगस्टर एवं बदमाशों की शहर में तूती बोल रही है। मन चाहा किसी को फोन कर , उनसे फिरौती मांग ली जाती है। जिला पुलिस हमेशा अपनी पुलिस की काबिलियत की थपथपाई करती है, लेकिन, इस मामले ने एक बात साबित कर दी है कि पुलिस की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में आ जाती है।

पीड़ित का भाई वरिष्ठ पत्रकार
पीड़ित एक काफी शरीफ तथा शिक्षित परिवार से संबंध रखता है। पीड़ित का भाई एक वरिष्ठ पत्रकार होने के साथ-साथ जाने-माने पत्रकार है। समाज में परिवार एक अच्छा रुतबा रखता है। सच्चाई के लिए अपनी कलम से हमेशा ही बुराई के खिलाफ लड़ाई लड़ी। लेकिन, दुख की बात है कि एक पत्रकार के भाई के खिलाफ इतनी बड़ी साजिश के तहत शहर के नामी बदमाश एवं गैंगस्टर उनके परिवार को जान से मारने की धमकी तथा 10 लाख रुपए की फिरौती की मांग करते है, इससे साफ संकेत मिल जाते है कि शहर में पत्रकार के परिवार अब सुरक्षित नहीं है। पुलिस को अब एक्शन में आकर इस प्रकार के कथित अपराधियों को सलाखों के पीछे धकेलना होगा।

सफाई करनी होगी गैंगस्टर-बदमाशों की
कहते है कि पुलिस के हाथ में बहुत कुछ अच्छा होता है। यह कहना बिल्कुल गलत भी नहीं होगा। पुलिस को इस मामले को गंभीरता से लेना होगा। मामला दर्ज होने तक पुलिस कार्रवाई सीमित नहीं रह जाती, बल्कि गुनाह को अंजाम देने वालों को ढूंढ कर, उन्हें सलाखों के पीछे धकेलने तक अंतिम अंजाम गिना जाता है। फिलहाल, इस मामले को लेकर पंजाब की पत्रकार संगठन ने वरिष्ठ पत्रकार दीपक भंडारी के समर्थन में उतर आई है। उन्होंने भरोसा दिया कि वह उनके तथा परिवार के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं। इधर, पुलिस को भी शहर में बढ़ रहे गैंगस्टर एवं बदमाशों की सफाई करनी होगी। तब जाकर आम नागरिक चैन की सांस से अपनी जिंदगी व्यतीत कर पाएगा।
सीएम भगवंत मान फ्री हैंड करे पुलिस
पंजाब में आपराधिक ग्राफ इतना बढ़ चुका है कि अब वह वक्त आ चुका है कि पंजाब के सीएम भगवंत मान को पंजाब पुलिस को फ्री हैंड करना ही होगा। आतंकवाद के काले दौर में पंजाब पुलिस ने ही आतंकवाद को पंजाब से खत्म किया था। अब पंजाब में गैंगस्टर तथा ए श्रेणी के कथित अपराधियों ने पुलिस की नाक में दम कर रखा है। पकड़ लेने से गैंगस्टर के कुख्यात धंधे खत्म नहीं हो जाते है, इसके लिए नई प्रणाली के तहत पुलिस को गैंगस्टरों को शूट आउट करने का पंजाब सरकार द्वारा आदेश जारी करना होगा। फिर जाकर पंजाब में गैंगस्टर का खात्मा हो सकेंगा।
पुलिस आयुक्त का फोन स्विच ऑफ
इस घटनाक्रम को लेकर पुलिस आयुक्त के दोनों मोबाइल नंबर पर कई बार संपर्क किया गया। लेकिन, दोनों फोन नंबर ही स्विच आफ आ रहे थे। एक जिम्मेदार पुलिस अधिकारी का फोन स्विच ऑफ आना जनता के बीच एक अच्छा संदेश नहीं है। इसके लिए दूसरा विकल्प निकालना पुलिस की नैतिक ड्यूटी बनती है।

