वरिष्ठ पत्रकार.अंतरराष्ट्रीय डेस्क।
ब्रिटेन की नेशनल क्राइम एजेंसी (एनसीए) ने भारत की केंद्रीय जांच एजेंसी (सीबीआई) और अमेरिका की एफबीआई (एफबीआई) के साथ मिलकर नोएडा में चल रहे एक फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़ किया है। इस कॉल सेंटर से ब्रिटेन और अमेरिका के लोगों को निशाना बनाकर लाखों पाउंड की ठगी की गई थी।
इस अंतरराष्ट्रीय जांच की शुरुआत पिछले साल हुई थी जब माइक्रोसॉफ्ट ने अमेरिका में अपने तकनीकी विशेषज्ञों के जरिए एक संदिग्ध गतिविधि की जानकारी दी। यह जानकारी अमेरिका में मौजूद एनसीए के इंटरनेशनल ऑफिसर्स को मिली, जिन्होंने इसे ब्रिटेन की एक्शन फ्रॉड रिपोर्ट्स से मिलाया। उसके बाद सीबीआई, एनसीए और एफबीआई के बीच आपसी सूचनाओं का आदान-प्रदान हुआ, जिससे जांच को आगे बढ़ाया गया।
सीबीआई की त्वरित कार्रवाई के बाद दो लोगों को नोएडा से गिरफ्तार किया गया। जांच में सामने आया कि इस गैंग ने ब्रिटेन में 100 से अधिक लोगों को धोखा दिया था। उनसे कहा गया कि उनके कंप्यूटर में वायरस या हैकिंग हो गई है, जिसे ठीक करने के लिए माइक्रोसॉफ्ट के कर्मचारी उनसे शुल्क मांगते थे। असल में ये लोग माइक्रोसॉफ्ट से जुड़े नहीं थे, बल्कि ठग थे।
केवल ब्रिटेन में इस गिरोह ने अब तक करीब 3.9 लाख पाउंड (लगभग 4 करोड़ रुपये) की ठगी की है। ठगों ने फर्जी स्क्रीन पॉप-अप और कॉल्स के जरिए लोगों को डराया और फिर उनसे पैसे वसूले।जानकारी के मुताबिक, ठगों ने अपनी पहचान छिपाने के लिए स्पूफ्ड कॉल्स, इंटरनेट टेलीफोन (VoIP), और कई देशों के सर्वरों का इस्तेमाल किया, जिससे कॉल्स को ट्रेस करना मुश्किल हो जाए।
एनसीए के डिप्टी डायरेक्टर निक शार्प ने कहा, ‘यह सफलता इस बात को साबित करती है कि जब दुनिया की एजेंसियां और निजी कंपनियां मिलकर काम करती हैं, तो हम कहीं भी बैठे अपराधियों तक पहुंच सकते हैं।’ वहीं माइक्रोसॉफ्ट के डिजिटल क्राइम्स यूनिट के कानूनी सलाहकार स्टीवन मसादा ने कहा, ‘तकनीकी फ्रॉड को रोकने के लिए सरकारी और निजी क्षेत्रों का मिलकर काम करना जरूरी है। तभी हम ऐसे रैकेट को खत्म कर सकते हैं।’
इस साल की शुरुआत में एनसीए के अधिकारियों ने भारत का दौरा किया था, जहां सीबीआई को इस गिरोह की गतिविधियों की जानकारी दी गई थी। तभी से कार्रवाई तेज की गई। इस मामले में ब्रिटेन के फ्रॉड मामलों के मंत्री लॉर्ड डेविड हैनसन ने कहा, फ्रॉड एक वैश्विक समस्या है, जिसे केवल अंतरराष्ट्रीय सहयोग से ही हल किया जा सकता है। मैं अमेरिका और भारत की एजेंसियों को इस अहम सहयोग के लिए धन्यवाद देता हूं।

