STRIKE…..पूरा दिन कामकाज ठप कर हड़ताल पर रहे वकील……ग्राम न्यायालय एक्ट (2008) से नाखुश…तत्काल निरस्त करने की मांग की

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चेतावनी……मांग नहीं मानी गई तो प्रदेश स्तर पर चलेगा तीखा संघर्ष-अध्यक्ष गुरदीप सिंह रंधावा

कल जालंधर में प्रदेश बार एसोसिएशन के पदाधिकारी होंगे इकट्ठा…सरकार के खिलाफ लिया जाएगा बड़ा फैसला

मोहित बटालवी.बटाला /गुरदासपुर /चंडीगढ़। 

शुक्रवार को बार एसोसिएशन (बटाला) के सभी वकील अपना कामकाज छोड़ कर पूरा दिन के लिए हड़ताल पर चले गए। बार एसोसिएशन बटाला के अध्यक्ष गुरदीप सिंह के नेतृत्व में सभी वकीलों ने अदालत परिसर में एकजुट होकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। हाल ही में राज्य सरकार द्वारा पारित किए गए ग्राम न्यायालय एक्ट (2008) को तत्काल निरस्त करने की मांग की गई। कल शनिवार को पूरे प्रदेश के बार एसोसिएशन के पदाधिकारी इस प्रमुख मांग को लेकर बड़ा फैसला लेने जा रहे है। चेतावनी देते प्रधान ने कहा कि अगर जल्द सरकार फैसला वापस नहीं लेती तो उनका संघर्ष आने वाले दिनों में तीखा हो जाएगा। किसी प्रकार का बीच में कोई नुकसान होता है, उसके लिए राज्य सरकार जिम्मेदार होगी। 

शुक्रवार सुबह 10 बजे बार एसोसिएशन (बटाला) अध्यक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता गुरदीप सिंह रंधावा सहित सभी अधिवक्ता अपना कामकाज ठप कर हड़ताल पर चले गए। इस बीच सभी अदालत में कानूनी तौर पर चलने वाला कार्य बिल्कुल ठप ही रहा। अध्यक्ष ने कहा कि राज्य सरकार ने ग्राम न्यायालय एक्ट (2008) को पूरे राज्य में पारित कर दिया है। चिंता की बात यह है कि यह पंजाब में लागू करना ठीक नहीं रहेगा। सबसे बड़ा कारण ग्राम में अभी तक न्यायालयों की पूरी व्यवस्था नहीं है। किसी के बैठने उठने का कोई खास बंदोबस्त नहीं है। वाहन लगाने के लिए पार्किंग की कोई सुविधा नहीं है। सबसे बड़ी समस्या तो यह है कि सरकार के पास वहां पर ग्राम न्यायालय स्थापित करने के लिए इंफ्रास्ट्रक्टर ही नहीं है। इतना ही नहीं, आम जनता भी सरकार के इस फैसले पर सहमत ही नहीं है। क्योंकि, उन्हें आम अदालत में हर प्रकार की सुविधा हासिल हो रही है। 

रंधावा ने कहा कि इस मसले को लेकर पिछले कई दिनों से वह हड़ताल भी कर रहे है। 1 अक्टूबर को पूरे पंजाब की बार एसोसिएशन ने एक फैसला किया था वे अब अपने कदम पीछे हटाने वाले नहीं है। इस मसले पर राज्य सचिव से लेकर कई उच्च अधिकारियों से मुलाकात कर फैसला वापस लेने के लिए मांग पत्र भी दिया गया। लेकिन, वे इस मामले को काफी हल्के में ले रहे है। कल जालंधर में पंजाब के सभी पदाधिकारियों (बार एसोसिएशन) की  होने वाली बैठक में अंतिम फैसला लिया जाएगा। जब तक सरकार फैसला वापस नहीं ले लेती तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा। मांग करते कहा कि सरकार को इस फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए। 

..बड़े राज्यों के लिए ही बेहतर विकल्प

कानून विशेषज्ञों की मानें तो ग्राम न्यायालय का फायदा सिर्फ बड़े राज्य या फिर बड़े क्षेत्राधिकार के रहने वाले नागरिकों को मिलता है। चूंकि, पंजाब के कई शहरों में 15 किलोमीटर दूरी पर ही न्यायालय हैं। ऐसे में वहां पर ग्राम पंचायत एक्ट का लागू होना कोई बेहतर विकल्प नहीं माना जा सकता है। ऐसा करने से उल्टा न्याय हासिल करने वाले लोगों ही परेशान होंगे। क्योंकि, ग्राम पंचायत स्थापित करने के लिए सरकार का काफी पैसा खर्च होगा। ऊपर से हर प्रकार की सुविधा देना सरकार के लिए इतना आसान भी नहीं होगा। 

…जानिए, क्या है ग्राम न्यायालय एक्ट- 2008

ग्राम न्यायालय एक्ट-2008 का मतलब है कि ग्रामीण स्तर पर ऐसा न्यायालय जो ग्रमीणीय नागरिकों सिविल या फ़ौजदारी सम्बंधित विवादों के उत्पन्न होने पर न्याय प्राप्त करने का सामान अवसर उपलब्ध हो सके।  ग्रामीण नागरिक को न्याय से वंचित न होना पड़े। संविधान का अनुच्छेद 14 का मुख्य उद्देश्य विधि के समक्ष समता को पूर्ण करना है। इसके अलावा कोई भी नागरिक आर्थिक या किसी अन्य कारणों से न्याय प्राप्त करने से वंचित न रहे ।

कैसी होती है ग्राम न्यायालय की स्थापना..समझिए, इस खास रिपोर्ट में….?


ग्राम न्यायालय अधिनियम 2008 की धारा 3 उपधारा 1 में न्यायालय स्थापना के सम्बन्ध में प्रावधान दिया गया है। राज्य सरकार अपनी शक्ति का प्रयोग करते हुए , इस अधिनियम द्वारा ग्राम न्यायालय को प्रदान की गयी अधिकारिता और शक्तियों का प्रयोग करने के प्रयोजन के लिए उच्च न्यायालय से परामर्श करने के  अधिसूचना द्वारा जिले में मध्यवर्ती स्तर पर प्रत्येक पंचायत या मध्यवर्ती स्तर पर निकटतम पंचायतों के समूह के लिए या जहाँ किसी राज्य में मध्यवर्ती स्तर पर कोई पंचायत नहीं है वहां निकटवर्ती ग्राम पंचायत के समूह के लिए एक या अधिक ग्राम न्यायालय स्थापित करती है।

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