दीप सिद्धू परिवार नहीं पसंद करता था अमृतपाल को, फोन नंबर कर रखा था ब्लॉक

एसएनई नेटवर्क.चंडीगढ़। 

पूरे देश में पुलिस खालिस्तानी समर्थक संगठन वारिस पंजाब दे के मुखिया अमृतपाल सिंह की खोज में जुटी हुई है। हालांकि, अमृतपाल अभी भी पुलिस की पहुंच से दूर है। इस पूरे मामले में हाल ही में एक बड़ी जानकारी सामने निकलकर आ रही है कि मशहूर पंजाबी एक्टर दीप सिद्धू के भाई मनदीप ने सबसे पहले वारिस पंजाब दे संगठन का रजिस्ट्रेशन करवाया था। लेकिन जब पुलिस ने दीप सिद्धू के घरवालों से बातचीत की तो उन्होंने अमृतपाल सिंह को इस संगठन के उत्तराधिकारी के रूप में पहचानने से साफ इनकार कर दिया है।


रिपोर्ट्स के मुताबिक अमृतपाल सिंह एक अन्य संगठन ‘वारिस पंज-आब दे’ बनाने जा रहा था, जो कि असली ‘वारिस पंजाब दे’ से मिलता जुलता था. अमृतपाल का मकसद इसके पीछे एक्टर दीप सिद्धू की पॉपुलैरिटी का इस्तेमाल करने का था। यह कदम अमृतपाल ने तब उठाया था जब कि वह असली वारिस पंजाब दे संगठन का कंट्रोल नहीं ले पाया था। यह बात कट्टरपंथी उपदेशक के खिलाफ हुई। पुलिस की कार्रवाई के दौरान मिले दस्तावेजों से पता चला है। बता दें कि दीप सिद्धू का फरवरी 2022 में एक कार एक्सिडेंट में मर्डर हुआ था। इससे पहले उसने अमृतपाल का नंबर अपने फोन में ब्लॉक कर रखा था।


अमृतपाल सिंह के केस से जुड़े 10 बड़े अपडेट्स-
1) पुलिस को जो डॉक्यूमेंट मिले हैं उनके अनुसार दीप सिद्धू के भाई मनदीप ने फतेहगढ़ साहिब से 4 जुलाई 2022 को इस संगठन की शुरुआत की थी. इसका उद्देश्य मृत दीप की इच्छा से जुड़ा था वह चाहते थे कि इससे शिक्षा, स्वच्छता, ड्रग की लत में पड़े युवाओं को भी स्पोर्ट्स की ओर ले जाना, प्राकृतिक आपदा से ग्रसित लोगों की मदद करना जैसे मुद्दे शामिल किए गए थे।


2) दीप के भाई ने कहा था कि यह संगठन उनके मृत भाई के विजन को पूरा करने के लिए और पंजाब के लोगों की सेवा करने के लिए बनाया गया है. इस संगठन के कई सख्त नियम भी बनाए गए थे।


3) जब अमृतपाल विदेश से अगस्त 2022 में वापस लौटा, उसने वारिस पंजाब दे के पेपर मांगे, जिसे मनदीप ने देने से इनकार कर दिया.


इसके ठीक बाद एक नया ऑर्गेनाइजेशन जिसका नाम ‘वारिस पंज-आब दे’ रखा गया लोगों के सामने आया. इसके ऑफिशियल पेज पर सिद्धू के फेसबुक को भी लिंक किया गया था. यह संगठन मोगा जिले में रजिस्टर्ड करवाया गया था. इसकी डेट 15 दिसंबर 2021 दिखाई गई।


4) वारिस पंज-आब दे के फेसबुक पेज पर कई फॉलोअर्स आने लगे। क्योंकि, इससे लोगों के बीच कन्फ्यूजन पैदा कर दिया था। सभी को लगा कि दीप के संगठन को अमृतपाल ने टेकओवर किया है।


5) रिपोर्ट के अनुसार अमृतपाल ने इस संगठन का रजिस्ट्रेशन बैक डेट में जाकर करवाया था. इसमें डूनेके गांव का पता लिखा गया जो कि मोगा जिले में आता है. यह पता अमृतपाल के करीबी गुरमीत सिंह बुक्कानवाला के नाम पर था।


6) बुक्कानवाला पर नेशनल सिक्योरिटी एक्ट का मुकदमा दायर किया गया है वह फिलहाल पुलिस की गिरफ्त में है. इसे असम के डिब्रूगढ़ जेल में ले जाया गया है. पूछताछ में गुरमीत ने बताया कि यह संगठन काफी दिनों बाद बनाया गया था लेकिन कॉन्टैक्ट का इस्तेमाल करके उसे इसे बैकडेट में रजिस्टर्ड करवाया गया था. हालांकि इससे अधिक जानकारी उसके पास भी नहीं है।


7) अमृतपाल के खिलाफ पंजाब पुलिस ने 18 मार्च को बड़ी दबिश दी थी जिसके अंतर्गत इसके कई सहायकों को पुलिस ने गिरफ्तार किया था. हालांकि इस दौरान अमृतपाल पुलिस को चकमा देकर फरार होने में कामयाब हो गया था।


8) पंजाब पुलिस ने इस दौरान एक स्टेटमेंट जारी किया है जिसमें उन्होंने कहा है कि अमृतपाल के कुल 353 समर्थकों को पुलिस ने हिरासत में लिया था जिसमें से पूछताछ के बाद 197 को छोड़ दिया गया है. लॉ एंड ऑर्डर में शांति बनाए रखने के लिए पुलिस ने यह सख्त कदम उठाया था।


9) पुलिस ने इस पूरे मामले में अब तक 7 लोगों को नेशनल सिक्योरिटी एक्ट के तहत गिरफ्तार किया है. इन सभी को असम राज्य में भेजा गया है।

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