चर्चा का विषय…..सौदेबाजी करने लग पड़ा P.O. STAFF का एक दरोगा……….।

Bribe BY Punjab Police through internet media (image)

शहर के पुलिस विभाग की हवा का रुख इस समय कुछ सही नहीं चल रहा है। क्योंकि, खाकी पर भ्रष्टाचारी छींटे के दाग पड़ने लगा है। यह दाग पीओ स्टाफ के एक दरोगा की सौदेबाजी की चर्चा ने लगाया है। चर्चा का बाजार गर्म है कि मोटी तोंद वाला दरोगा किसी को नहीं बख्श्ता है। पैसा उसका माइबाप है, जो दे उसका भला, नहीं तो झूठे केस में फंसाना उसका काम है। चर्चा , इस बात की भी चल रही है इस दरोगा के सौदेबाजी के चर्चे दूर-दूर तक मशहूर है। ऐसा नहीं है कि विभाग को इस बात की खबर नहीं है। क्योंकि, दरोगा की काली कमाई का हिस्सा ऊपर तक पहुंच जाता है, इसलिए, सब खामोश हो जाते है। खास बात यह भी है कि विभाग के कुछ अधिकारियों-कर्मचारियों को इसकी करतूतों का भली भांति पता चल चुका है, फिर भी उसके केस को मीडिया में इतनी पब्लिसिटी दिलाते है, जैसा कि दरोगा जी ने बहुत बड़े अपराध को खत्म कर दिया हों। कहते है कि दरोगा जी को खुद भी इतना शौक है कि वह मीडिया में हमेशा ही चर्चा का विषय बने रहे, इसके लिए उन्हें किसी हद तक जाना पड़े तो वह पीछे भी नहीं हटते है। 

दरोगा का इतिहास फोलने पर पता लगता है कि वह इस विभाग में बड़ी सिफरिश के उपरांत आए थे। बतौर सिपाही से विभाग में अपनी शुरुआत की। दरोगा जी का जवानी के समय बड़े-बड़े बदमाशों के साथ उठना बैठना भी रहा है। लेकिन, भीतरघात वे वहां की जानकारी विभाग के पास शेयर करते रहे, जिस वजह से इनकी विभाग में तरक्की होती रही। दरोगा जी का होटल से लेकर बार तक पूरा-पूरा डंका बजता है। एक इशारे पर सब सामान पैक हो जाता है। पैसे तो कोई मांग नहीं सकता है, क्योंकि, दरोगा जी से सब डरते है। उन्हें पता अगर पैसे मांग लिए तो दरोगा जी ने उनकी उल्टी गेम चला देनी है। इसलिए वे शांत या फिर खामोश रहना ही उचित समझते है। अंदर की खबर है कि दरोगा जी पीड़ितों से पैसे लेकर सेटलमेंट भी करवाने में काफी माहिर है। क्योंकि, दरोगा जी की हर थाना के प्रभारियों के साथ अच्छा तालमेल है। इसलिए वह फायदा लेने में भी कोई कसर नहीं छोड़ते है। पता चला है कि दरोगा का परिवारिक इतिहास पुलिस विभाग से जुड़ा है। फायदा-मुनाफा दरोगा जी ने परिवार से ही सीख लिया था। इसलिए, भ्रष्टाचारी काम करने में वह बिल्कुल संकोच नहीं करते है। माना जाता है कि दरोगा जी रिश्वतखोरी से जुड़ा सबूत मिटाने में भी एकदम एक्सपर्ट है, इसलिए विभाग इनकी बेइमानी पर बिल्कुल शक नहीं करता है। 

विभाग में चर्चा इस बात की चल रही है कि दरोगा जी की करतूतों की एक फाइल ईमानदार छवि वाले पुलिस अधिकारी के पास पहुंच चुकी है। उस फाइल में दरोगा जी के खिलाफ रिश्वतखोरी से लेकर भ्रष्टाचारी से जुड़े अहम सबूत साथ में लगें है। ऐसा नहीं है कि दरोगा इस बात को लेकर अंजान है, उनकी करतूतों की फाईल के बारे में कार्यालय में तैनात करीबीयों ने बता दिया है। सुनने में आ रहा है कि अब दरोगा जी वो चाल खेलने की स्कीम लगा रहे है, जिससे वह बच जाए और मामला वैसे ही दब जाए, जैसे पहले भी कई बार हो चुका है। कुछ ईमानदारी पुलिस अधिकारियों तथा कर्मचारियों की एक श्रेणी इस भ्रष्ट दरोगा की करतूत को अच्छा नहीं समझती है। वह पहले भी कई बार मांग कर चुकी है कि इसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई के साथ-साथ विभागीय कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि, खाकी पर लगें दाग को मिटाया जा सकें। एक कुर्सी पर इतने लंबे समय तक चिपक कर बैठना भी विभाग की मंशा पर सवाल खड़ा करता है। पता नहीं विभाग इस दरोगा पर क्यों आंख बंद करके विश्वास करता है। कहते है एक तलाब की गंदी मच्छली सारे तलाब को गंदा कर देती है। ऐसे ही इस तरह के लोगों का गंदे दाग का परिणाम सब को ही भुगतना पड़ता है। इससे बेहतर होगा कि विभाग के अधिकारियों को इसके खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए जनता के बीच एक ईमानदारी वाली मिसाल का संदेश भेजना चाहिए।

प्रधान संपादक————–विनय कोछड़ (एसएनई न्यूज़)।   

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