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भारतीय राजनीति में अफवाहें और समीकरण बहुत तेजी से बदलते हैं। इस समय दिल्ली से लेकर कोलकाता और चेन्नई तक एक नई चर्चा गर्म है। खबर है कि ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस के 20 सांसद बागी रुख अपना सकते हैं। वहीं दूसरी तरफ, दक्षिण भारत में विपक्ष का मजबूत चेहरा मानी जाने वाली डीएमके के भी इंडी गठबंधन से अलग होने के कयास लगाए जा रहे हैं।
असर आगामी मानसून सत्र पर पड़ेगा
अगर यह राजनीतिक उलटफेर हकीकत में बदलता है, तो इसका सबसे बड़ा असर आगामी मानसून सत्र पर पड़ेगा। केंद्र सरकार के लिए उस परिसीमन बिल को पास कराने की राह आसान हो जाएगी, जो हाल ही में संसद के भीतर संख्या बल के चक्रव्यूह में फंसकर गिर गया था। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि पिछली बार संसद में इस बिल को लेकर क्या हंगामा हुआ था, विपक्षी दलों को क्या आपत्ति थी, पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने इस पर क्या स्टैंड लिया था और अब नए समीकरणों से आंकड़े कैसे बदलेंगे?
विपक्ष ने इस बिल को एकतरफा और संघीय ढांचे के खिलाफ बताया
सरकार जब लोकसभा में परिसीमन बिल, 2026 और उससे जुड़ा संविधान संशोधन विधेयक लेकर आई थी, तो सदन में भारी गतिरोध पैदा हो गया था। विपक्ष ने इस बिल को एकतरफा और संघीय ढांचे के खिलाफ बताया था। विपक्षी सांसदों ने सदन के वेल में आकर नारेबाजी की थी। विपक्ष का मुख्य आरोप था कि सरकार बिना व्यापक सहमति के देश का राजनीतिक नक्शा बदलना चाहती है। संख्या बल के मामले में विपक्ष उस समय पूरी तरह एकजुट था। नतीजा यह हुआ कि सरकार विशेष बहुमत के लिए जरूरी आंकड़े नहीं जुटा पाई और यह महत्वपूर्ण बिल लोकसभा में गिर गया। इसे सरकार के लिए एक बड़े राजनीतिक झटके के रूप में देखा गया था।
दक्षिण भारत के राज्यों की तीन बड़ी आपत्तियां
परिसीमन का मतलब होता है देश में आबादी के हिसाब से लोकसभा और विधानसभा सीटों की सीमाओं को दोबारा तय करना और सीटों की संख्या को बढ़ाना। इस प्रक्रिया को लेकर विपक्षी दलों, खासकर दक्षिण भारत के राज्यों की तीन बड़ी आपत्तियां थीं।
दक्षिण भारत का प्रतिनिधित्व आनुपातिक रूप से कम हो जाएगा
डीएमके के नेता एमके स्टालिन और अन्य दक्षिण भारतीय नेताओं का सबसे बड़ा विरोध यह था कि उनके राज्यों ने पिछले पांच दशकों में जनसंख्या नियंत्रण पर बहुत शानदार काम किया है। इसके विपरीत, उत्तर भारत के राज्यों, जैसे उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश में आबादी तेजी से बढ़ी है। अगर सीटों का निर्धारण पूरी तरह से आबादी के आधार पर हुआ, तो उत्तर भारत की लोकसभा सीटें बहुत ज्यादा बढ़ जाएंगी और दक्षिण भारत का प्रतिनिधित्व आनुपातिक रूप से कम हो जाएगा। विपक्ष ने इसे अच्छा काम करने पर सजा मिलने जैसा बताया।
दो-तिहाई समर्थन मिलना जरूरी
लोकसभा में परिसीमन जैसे बड़े संवैधानिक बदलाव के लिए सरकार को विशेष बहुमत की जरूरत होती है। इसका मतलब है कि सदन में उपस्थित और वोटिंग करने वाले सांसदों का दो-तिहाई समर्थन मिलना जरूरी है। अगर मानसून सत्र से पहले टीएमसी के 20 सांसद टूटते हैं और डीएमके अलग राह पकड़ती है, तो संसद के भीतर दो ही स्थितियां बनेंगी और दोनों ही सरकार के हक में जाएंगी।
लोकसभा की कुल सीटें 543
राजनीति में कई बार दल सीधे समर्थन देने के बजाय वोटिंग के समय सदन से वॉकआउट कर जाते हैं या अनुपस्थित हो जाते हैं। मान लीजिए लोकसभा की कुल सीटें 543 हैं। अगर टीएमसी के 20 बागी और डीएमके के सांसद (कुल मिलाकर 40-50 सांसद) वोटिंग में हिस्सा नहीं लेते हैं, तो सदन की प्रभावी संख्या घटकर करीब 490 से 500 के बीच रह जाएगी।
इस आंकड़े को एनडीए अपने दम पर आसानी से हासिल कर लेगा
संख्या कम होते ही बहुमत का जादुई आंकड़ा भी नीचे गिर जाएगा। ऐसी स्थिति में सरकार को दो-तिहाई बहुमत साबित करने के लिए जहां पहले 362 वोटों की जरूरत थी, वह घटकर केवल 330 के आसपास रह जाएगी। इस आंकड़े को एनडीए अपने दम पर और कुछ अन्य मित्र दलों की मदद से बहुत आसानी से हासिल कर लेगा। यदि टीएमसी के बागी गुट के 20 सांसद और विपक्षी गठबंधन से नाराज अन्य नेता खुलकर सरकार के बिल का समर्थन कर देते हैं, तो विपक्ष का विरोध पूरी तरह ध्वस्त हो जाएगा। सरकार के पास लोकसभा और राज्यसभा दोनों जगह भारी बहुमत होगा।
इंडी गठबंधन का बिखरना विपक्ष के मनोबल को पूरी तरह तोड़ देगा
इंडी गठबंधन का बिखरना विपक्ष के मनोबल को पूरी तरह तोड़ देगा। संसद में सरकार को आक्रामक तरीके से घेरने की उनकी ताकत खत्म हो जाएगी। विपक्ष में इतनी बड़ी दरार देखने के बाद वाईएसआर कांग्रेस, बीजू जनता दल और बीआरएस जैसे अन्य न्यूट्रल क्षेत्रीय दल भी सरकार के खिलाफ कड़ा रुख अपनाने से बचेंगे। परिसीमन बिल पास होने से हिंदी बेल्ट और भाजपा के मजबूत गढ़ों में सीटों की संख्या बढ़ेगी। इससे आने वाले दशकों के लिए भाजपा की राजनीतिक स्थिति देश में और ज्यादा मजबूत हो जाएगी।###USA###CANADA###NATIONAL-BREAKING-NEWS###VIETNAM###IRELAND###SWEDEN###CHINA###INDIA###@

