कंपकपाती ठंड में हर रसोई के लिए गैस का ज्यादा इस्तेमाल होना स्वभाविक है। इस बीच एक चर्चा का विषय खूब तेजी से अमृतसर शहर में वायरल हो रहा है। मुद्दा जो कि रसोई गैस के साथ जुड़ा हुआ है। पता चला है कि सरकारी गैस पनसप में इस समय कुछ ठीक नहीं चल रहा है। क्योंकि, नए साल शुरु होते ही उस पर गैस को ब्लैक करने के संघीन आरोप लग चुके है। इस गिरोह में गैस सप्लाई करने वाले से लेकर एक बड़े बाबूओं की फौज सक्रिय हो चुकी है। मौटे दाम पर वे लोग गैस को रेवड़ियों की तरह ब्लैक कर रहे है। गोलमाल पैसा सभी के हिस्से में बांटा जा रहा है। ताजुब की बात है कि इस गोलमाल की गूंज अब तक ऊपर तक नहीं पहुंच पाई है। उपभोक्ताओं की शिकायतों का पिटारा खुल नहीं रहा है। शिकायतों में सिर्फ एक बात को ही दोहराया जा रहा है कि गैस आन लाइन बुकिंग के बावजूद उन तक नहीं पहुंच पा रही है। मगर, उन्हें शायद इस बात का बिल्कुल अंदाजा नहीं है कि गैस तो बीच रास्ते में गोलमाल हो रही है। परेशान उपभोक्ता अब जाए तो कहां जाए, क्योंकि, कार्यालय में उनकी पुकार तो कोई सुनता नहीं है। सब कंपकपाती ठंड में हीटर के आगे यू बैठे रहते है। परेशान होकर फिर वापस लौट जाना ही बेहतर विकल्प मान कर चले मायूस होकर चले जाते है।शायद वह एक समय भूल जाते है कि यह तो भाई एक सराकरी दायरा है, भ्रष्टाचार तो इनके खून में रचा है।
अजीब बात है कि इतने गोलमाल के धंधे पर लगाम लगाने के लिए सरकार से सरकारी तंत्र क्यों खामोश बैठा है। या फिर संकेत इस बात की ओर मिल जाता है कि सब लोग इस काली दाल का हिस्सा है, जो चुपचाप इसका तमाशा देख रहे है। मगर जनता की परेशानी को दबाने का शायद इनको बिल्कुल अंदाजा नहीं है कि अगर उनका गुस्सा फूटा तो शासन से लेकर सरकारी तंत्र इसकी चपेट में आ जाएगा। इसका नुकसान कितना बड़ा होगा शायद ही किसे ने इस बात का कभी अंदाजा लगाया हो सकता है।
शायद ही किसी ने इस बात का अंदाजा लगाया हो सकता है कि गौरों से स्वतंत्रता हासिल करने के उपरांत वह अब ईमानदारी से अपना सिर ऊंचा कर चल सकेंगे। लोकिन, क्या पता था कि अब काले अंग्रेज देश की जड़ों को खोंखला कर रहे हैं। सरकार से लेकर बाबूओं के खून में भ्रष्टाचारी , रिश्वतखोरी कूट कूट कर भरी है। आम जनता इनकी करतूत से इतनी परेशान हो चुकी है , यहीं लोग उन्हें संघर्ष रास्ता अपनाने के लिए मजबूर करने लग पड़े है। ऐसा ही अमृतसर की आम जनता ने कभी इस बात का अंदाजा नहीं लगाया था कि अब गैस में भी उन्हें ब्लैक का सामना करना पड़ेगा।
वो भी आन लाईन के युग में, वहीं उफभोक्ताओं में इस बात की चर्चा छिड़ गई है कि क्या फायदा हुआ सरकार का जिसने आन लाइन का काम शुरु कर दिया। बात तो फिर वहीं पर आकर रुक जाती है। रिश्वतखोरी, कालाबाजारी पर तो अब तक कोई लगाम नहीं लगी। अब कालाबाजारी करने वाले आगे से और करने लग पड़े है। क्योंकि, उन्होंने इसके विकल्प को ढूंढ लिया है। खैर, इसमें उन्हें सहयोग सफेद बाबूओं का मिल रहा है। क्योंकि, उन्हें इतनी ठंड में उनकी जेब गर्म हो रही है। यह गौरखधंधे के बारे सरकार तक भी शिकायत जा रही है, लेकिन, इस पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है, यह तो एक प्रकार से सरकार की मंशा पर भी सवाल खड़ा कर रहा है। खैर सरकार के पास कई हथकंडे है क्योंकि उनके पास सत्ता है। शाक्ति है, जब चाहे जैसे चाहे इस बात को दबा भी सकती है। इसका पता भी नहीं चलेंगा।
पते की बात है कि परेशान उपभोक्ताओं ने अदालत में जाने का भी विचार कर लिया। ऐसे में खबर विभाग में आग की तरह फैल चुकी है। उन्हें भयं इस बात का सता रही है कि कहीं उनकी पोल न खुल जाए, इसलिए अपना फैलाया रैयता समेटने में लग पड़े है। सभी को कार्यालय में एक साथ बुलाने का फरमान जारी कर दिया गया। विभाग से खबर आ रही है कि अब सप्लाई को तेज करने का आदेश जारी कर दिया। उपभोक्ता इस बात को लेकर थोड़ा हैरान भी चल रहे है, क्योंकि, उन्हें यह बात पच ही नहीं रही कि कछुाएं की चाल चलने वाला विभाग एकदम शेर की चाल कैसे चलने लग पड़ा है। खैर , उन्होंने तो राहत की सांस ले लेनी है। लेकिन, विभाग की चिंता और बढ़ गई है, क्योंकि, विभाग से पता चला रहा है कि यह मुद्दा अब सरकार का बन गया है, इसलिए, सरकार अपने दायरे की साख बचाने के लिए बड़ा कदम उठाने की सोच रही है। पते की बात है कि इस बार बड़े -बड़े बाबूओं की कुर्सियां तक हिल सकती है। क्योंकि, ऊपर से इस बात के संकेत मिलने आरंभ हो चुके है।
पते की बात पता चली है कि करीब 3 दिन में कई करोड़ों की पवबस गैस की कालाबाजी हो गई। हैरान करने वाली बात है कि इस बात का चंडीगढ़ तक भी नहीं पता चलने दिया गया। क्योंकि, भ्रष्टाचारियों की श्रेणी ने काम ही इतनी बेहतर तरीके से किया कि किसी को कानों-कानों खबर तक न हों। अब विभाग इस जड़ को पकड़ने के लिए प्रयास कर रहा है, लेकिन, उसे कुछ समझ नहीं आ रहा है कि घबला कैसे किया गया। सुनने में तो यह बात आ रही है कि विभाग भी इसे हल्के में नहीं लेना चाहता है। इसलिए, सूत्रों से बात चली है कि एक बड़ी कमेटी इस घबले की जड़ तक पहुंचने के लिए काम पर जुट चुकी है। इतना ही नहीं, उसके लिए रिपोर्ट को पेश करने के लिए काफी समय मिला है। अब तो यह बात पक्की है कि इसमें नीचे से लेकर बड़े बाबूओं तथा सप्लाई करने वालों की चैन का पता चल जाएगा। खबर यह भी है कि इन्होंने अपने आपको सुरक्षित करने के लिए अभी से अपने-पने आंकाओं से मुलाकात करनी शुरु कर दी है। क्योंकि, उन्हें पता अगर सच बाहर आया तो इसमें सभी लपेट में आ जाएगी। यह तो पक्का है कि जिस जिस के खिलाफ आरोप साबित हुए, उस-उस को जेल जाने से लेकर विभागीय कार्रवाई को झेलना पड़ सकता है। इसलिए, सबके इतने ठंड के मौसम में भी पसीने छूटने लगे है।
प्रधान संपादक————–विनय कोछड़ (एसएनई न्यूज़)।

