SPECIAL NEWS…किस देश ने एयर इंडिया विमान हादसे की मांगी रिपोर्ट…….इस हादसे में उस देश के कितने नागरिकों की हुई थी मौत…वो सब पढ़ें, इस खबर में….?

वरिष्ठ पत्रकार.राष्ट्रीय डेस्क। 

ब्रिटेन की हवाई दुर्घटना जांच शाखा (एएआईबी) ने रविवार (स्थानीय समयानुसार) को कहा कि वह अहमदाबाद से लंदन जाने वाली एयर इंडिया के विमान (एआई 171) हादसे प्रारंभिक रिपोर्ट की समीक्षा कर रहा है। पिछले महीने उड़ान भरने के कुछ ही क्षणों बाद विमान हादसे का शिकार हुआ था। इस हादसे में चालक दल के सदस्यों सहित 241 यात्रियों की मौत हो गई थी। जबकि एक ही शख्स जीवित बच पाया था।


भारत के विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (एएआईबी) की ओर से तैयार की गई रिपोर्ट में इस हादसे के शुरुआती निष्कर्षों का जिक्र है। वहीं, ब्रिटेन की एएआईबी भी जांच प्रक्रिया का हिस्सा है, क्योंकि इसमें 52 ब्रिटिश नागरिकों की भी मौत हुई थी। ब्रिटेन के एएआईबी ने एक बयान में कहा कि वह इस प्रारंभिक रिपोर्ट को जारी करने का स्वागत करता है। यह भारतीय एएआईबी की ओर से की गई जांच के तथ्यों का सारांश है।


ब्रिटेन के एएआईबी ने कहा कि वह इस प्रारंभिक रिपोर्ट की विस्तार से समीक्षा कर रहा है और भारत के एएआईबी के साथ संपर्क में है। भारतीय सुरक्षा जांच में ब्रिटेन के एएआईबी को विशेषज्ञ का दर्जा दिया गया है। अंतरराष्ट्रीय प्रोटोकॉल के मुताबिक, जांच से जुड़ी जानकारी का खुलासा केवल भारतीय अधिकारी ही करेंगे। हादसे पर एक 15 पन्नों की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में बताया गया कि विमान के दोनों इंजनों का फ्यूल कंट्रोल स्विच एक ही सेकंड में अचानक बंद हो गया था। इसकी वजह से विमान ने तुरंत ऊंचाई खो दी और नीचे गिरने लगा। कॉकपिट की रिकॉर्डिंग से यह बात सामने आई कि एक पायलट दूसरे से पूछता था कि तुमने फ्यूल क्यों बंद किया, जबकि दूसरा पायलट कहता है कि उसने ऐसा नहीं किया।


ब्रिटेन के जिन परिवारों ने इस हादसे में अपने प्रियजनों को खोया, उन्होंने जांच प्रक्रिया में विशेषज्ञों के जरिए अपनी भागीदारी की मांग की है। कीस्टोन लॉ नाम की एक कानूनी फर्म 20 से ज्यादा परिवारों को सलाह दे रही है। उसने यह तो माना कि अब जांच में फ्यूल कंट्रोल स्विच को लेकर दिशा साफ हो गई है, लेकिन यह भी कहा कि पुराने कानूनों की वजह से पीड़ित परिवार जांच में शामिल नहीं हो पा रहे हैं। कीस्टोन के एविएशन पार्टनर जेम्स हीली-प्रैट ने कहा, अब परिवार यह समझ रहे हैं कि जांच का दायरा पहले से ज्यादा स्पष्ट हो गया है, लेकिन उनकी सबसे बड़ी चिंताओं में से एक यह है कि उन्हें इस सुरक्षा जांच से बाहर रखा गया है। 

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