वरिष्ठ पत्रकार.मोहाली।
जज-साहिब, माई-बाप, कम सज़ा की भीख मांगते हुए एक पिता अदालत में खड़ा था। उस पर गुनाह पक्के सबूतों के तौर पर साबित हुआ, कि उसने ही अपनी 11 माह की मासूम बच्ची को नदी में फेंक कर हत्या की। हालांकि, शव आज तक नहीं मिला। जज ने भी माना कि एक पिता ने इतना बड़ा गुनाह किया कि उसकी सजा को बिल्कुल ही कम नहीं किया जा सकता है, बचाव पक्ष के अधिवक्ता द्वारा दी गई जितनी भी दलील थी, उसे सिरे से खारिज कर दिया गया । अदालत ने उसे 7 साल की कठोर सजा के अलावा उस पर 10,000 का जुर्माना भी लगाया। अदालत ने यह सजा पक्के सबूतों के आधार पर सुनाई हैं।
..जानिए, क्या था पूरा मामला..?
मामला, पंजाब के शहर मोहाली से जुड़ा हुआ हैं। दिन 12 जुलाई वर्ष 2022 को पति आकाश ने अपनी पत्नी पिंकी से झगड़ा किया। पत्नी से उसे प्रतिदिन शराब पीने से रोकती थी। उस दिन वह अपनी 11 माह की बेटी का अपहरण कर घर से ले जाता है। 2 दिन तक कुछ नहीं पता चलता है। आखिर, पत्नी स्थानीय थाना में पति के खिलाफ शिकायत दर्ज कराती है।
आगे पुलिस अपनी जांच प्रक्रिया का दायरा बढ़ाती है तथा घग्गर नदी के पास लगे सीसीटीवी कैमरा को खंगालती है। टीम को पता चलता है कि दोषी घग्गर नदी के पास बच्ची सहित देखा जाता है। सीसीटीवी फुटेज को पुलिस ने अदालत में ठोस सबूत के तौर पर पेश किया। अदालत ने पाया कि दोषी ने ही बेटी का अपहरण किया फिर बाद में उसे नदी में फेंक दिया।
हालांकि, बचाव पक्ष यानी दोषी के अधिवक्ता ने सीसीटीवी को सबूत नहीं मानने के लिए अदालत समक्ष अपनी दलील रखी। लेकिन, अदालत ने उनकी दलील (तर्क) को सिरे से खारिज कर दिया। दोषी अदालत के समक्ष हाथ जोड़ कर कहा कि जज-साहिब, मैं घर में अकेला कमाने वाला हूं, मेरे बुजुर्ग माता-पिता तथा एक अविवाहित बहन उसकी कमाई पर निर्भर है। अदालत ने फैसला सुनाते साफतौर पर कहा कि दोषी कठोर सजा देने के ही लायक है, क्योंकि, उसने मासूम बेटी का अपहरण करने के उपरांत नदी में फेंक कर उसकी हत्या कर दी।

