पवन कुमार.अमृतसर।

यहां पर कुछ युवकों को निहंग का भाना पहन दंगा फसाद करते नजर आए। उन पर आरोप है कि शहर में स्थित शराब के ठेके तथा पान-सिगरेट बेचने वाले दुकानदारों के साथ मारपीट भी की। रविवार को कुछ तस्वीरें सोशल मीडिया में खूब तेजी से प्रसारित हुई। ऐसे में सवाल इस बात का खड़ा होता है कि उन्हें कानून हाथ में लेने का किसने अधिकार दिया। बताया जा रहा है कि यहां पर घटनाक्रम हुआ वहां से कुछ दूरी पर पुलिस चौकी तथा थाना उपस्थित है। इतना कुछ हो जाना कहीं न कहीं पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़ा होना लाजिमी बनता है। फिलहाल, किसी के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई होने की पुष्टि नहीं हो पाई।

…जानिए..क्या है पूरा मामला
मामला, अमृतसर के बस स्टैंड के पास स्थित आईडीएच मार्केट तथा बत्ती हट्टा मार्केट से जुड़ा होना बताया जा रहा हैं। करीब दोपहर उपरांत कुछ मोटरसाइकिल सवार निहंग का भना पहनकर युवक आते है। उनकी संख्या 1 दर्जन के करीब होती है। आते ही शराब का ठेका बंद कराने का प्रयास करते है, जब दुकानदार इस बात का विरोध करते है तो बवाल खड़ा हो जाता है। वे लोग उनके साथ मारपीट करने लग पड़ते है। फिर कुछ दूरी पर सिगरेट बेचने वाले दुकानदार के पास जाते है। उनके साथ भी मारपीट की जाती है।
पता चला है कि करीब 1 दर्जन सिगरेट बेचने वाले दुकानदारों को काफी बुरी तरह से पीटा गया। ऊपर से उनकी दुकानों को भी बंद करवा दिया गया। उन्हें चेतावनी दी गई कि भविष्य में फिर से इस प्रकार का उत्पाद बेचा तो अंजाम बुरा होगा। फिलहाल, पीड़ित दुकानदारों में काफी खौफ पाया जा रहा है। उनका कहना है कि अगर रोजगार का साधन बंद करवा दिया तो रोटी कहां से खाएंगे। क्या सरकार इसका इंतजाम करेंगी।
पाबंदी वाला क्षेत्राधिकार सिर्फ कुछ दायरा….बड़ा सवाल…फिर बाहरी दुकानदारों के साथ क्यों की गई गुंडागर्दी
पंजाब के राज्यपाल ने प्रदेश के 3 क्षेत्र को पवित्र शहर (हाली सिटी) घोषित किया था। इनमें अमृतसर शहर का नाम भी शामिल था। जारी किए गए पत्र में शहर के लाल लकीर (यानी श्री हरमंदिर साहिब के आसपास) क्षेत्र प्रमुख तौर पर शामिल है। उक्त क्षेत्र के आसपास शराब, मास, सिगरेट, पान जैसे पदार्थों की बिक्री पर प्रतिबंध लगाया गया। फिलहाल, जिन क्षेत्रों के दुकानदारों के साथ मारपीट की गई। उनका अधिकार क्षेत्र प्रतिबंधित क्षेत्र से काफी हटकर हैं। इसके बावजूद कुछ गुंडा तत्व ने इनके खिलाफ जुल्म ढाह कर मारपीट की तथा उन्हें समाज के समक्ष जलील किया गया। ऐसे में पुलिस प्रशासन का फर्ज बनता है कि उन्हें ढूंढ कर सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई कर जेल की सलाखों के पीछे धकेलना चाहिए, ताकि भविष्य में कोई भी कानून को हाथ में लेने से पहले विचार अवश्य करें।

