MUST READ..कितनी बेदर्द थी मां……11 साल पहले अपनी ममता को मार कर बेटे का कत्ल कर प्रेमी संग मिलकर दफना दिया था जमीन में……पकड़े जाने पर जरा सा भी नहीं था पछतावा

दफनाए हुए शव को जमीन से बाहर निकालते हुए।

वरिष्ठ पत्रकार प्रदीप बेदी. श्री हरगोबिंदपुर / बटाला / गुरदासपुर। 

जिला बटाला पुलिस के अधीन श्री हरगोबिंदपुर पुलिस ठीक 11 साल पहले हुए 14 वर्षीय संदीप सिंह उर्फ जगदीप सिंह के अंधे कत्ल कांड को सुलझाने का दावा कर रही है। कत्ल को अंजाम मृतक बच्चे की मां रंजीत कौर तथा उसके प्रेमी सतनाम सिंह उर्फ सत्ता ने दिया था। किसी को कोई शक न हो, इसलिए बच्चे का शव पास में स्थित एक खाली प्लाट में दबा दिया था। 11 साल उपरांत पकड़े कथित अपराधियों की निशानदेही पर शव को मजिस्ट्रेट की निगरानी में निकाल लिया गया हैं। 

पकड़े कथित अपराधियों के साथ पुलिस पार्टी । (2)

कल सिविल अस्पताल में विशेष चिकित्सकों की टीम पोस्टमार्टम करेगी। हैरान करने वाली बात है कि 11 साल तक पुलिस कथित अपराधियों को क्यों नहीं पकड़ पाई। यह एक प्रकार से जांच का विषय है। जांच में पुलिस के अधिकारियों की नाकामी भी सामने आ सकती है। बताया जा रहा है कि मामला मरने वाले बच्चे के ताया हरजीत सिंह के बयान पर दर्ज हुआ था। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि बच्चा अपनी मां के प्यार में रोड़ा था, इसलिए वारदात को अंजाम दिया गया। 

पुलिस को दिए बयान में ताया हरजीत सिंह ने बताया था कि उसकी भाभी का पास में रहने वाले सत्ता से प्रेम चल रहा था। कई बार भाभी को समझाया गया था कि वह उससे दूर रहे। इससे बच्चे की परवरिश पर प्रतिकूल असर पड़ेगा। इस बात से आहत रंजीत कौर ने अपने प्रेमी के साथ मिल कर योजना बनाई कि वह अब संदीप को अपने रास्ते से हटा देंगे। पता चला है कि बच्चे को काफी बेरहमी से मारा गया था। किसी को शक न हो तो शव को पास ही जमीन में दफना दिया गया। 

कोई पछतावा नहीं था

मां की ममता के चेहरे को देख साफ पता लग रहा था कि उसे अपने किए पर कोई पछतावा नहीं था। पता चला है कि वह पूरे 11 साल अपने प्रेमी के साथ अपनी पहचान छुपा कर रहती रही। पता चला है कि पुलिस की एक विशेष टीम को किसी अपने सूत्र से पता चला था कि वह किसी घर में अपनी पहचान छिपा कर रह रहें है। पुलिस ने दबिश देकर दोनों को गिरफ्तार कर लिया। 

पुलिस पर भी खड़े होते है सवाल

पूरे 11 साल तक कथित अपराधी अगर अपनी पहचान छुपा कर रहते रहें तो पुलिस को तब भनक क्यों नहीं लगी ?  पुलिस का खुफिया विंग इस मामले को लेकर क्या करता रहा ?विभाग ने अब जाकर क्यों नई टीम को काम सौंपा ? इन बातों को लेकर पुलिस पर बहुत बड़ा सवाल खड़ा होता है। जिसका जवाब हर कोई नागरिक जानना चाहता है। अब मांग यह भी हो रही है कि इस मामले में अधिकारियों तथा कर्मचारियों की जांच भी होनी चाहिए, ताकि पता लग सके, किन-किन की गलती थी।   

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