दहशतगर्दी…90 का दशक…वो खौफनाक रातें…शाम के 5 बजते ही पूरे पंजाब में पसर जाता था सन्नाटा…..तब के आतंकियों की फोटो को बिट्टू ने SOCIAL-MEDIA पर जारी किया

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SNE NETWORK.LUDHIANA/CHANDIGARH.

दलजीत दोसांझ की फिल्म सतलुज पर विवाद थम नहीं रहा है। केंद्रीय मंत्री रवनीत बिट्टू ने कल इस पर आपत्ति जताई थी। बिट्टू ने कहा था कि किसी को इस फिल्म के बारे में कुछ नहीं पता। यह फिल्म दलजीत दोसांझ के बड़े नाम के कारण देखी जा रही है। इसके बाद गुरुवार को रवनीत बिट्टू ने सोशल मीडिया पर हथियार लिए लोगों की फोटो पोस्ट कर फिल्म के विवाद को और तूल दे दिया। 

बिट्टू ने पोस्ट में लिखा- ये 90 के दशक की तस्वीरें हैं

बिट्टू ने पोस्ट में लिखा- ये 90 के दशक की तस्वीरें हैं, आज के किसी प्री-वेडिंग फोटोशूट की नहीं। एके-47 और ड्रम मैगजीन लेकर घूमने वाले ये कौन थे, जिनके सिरों पर लाखों का इनाम था। जिन्होंने निर्दोष लोगों को बसों और बाजारों से निकालकर गोलियों का निशाना बनाया। शाम के 5 बजते ही पूरे पंजाब में सन्नाटा पसर जाता था। माताओं के लाल, बहनों के भाई एक झटके में खत्म कर दिए जाते थे। आज भी उन परिवारों के बच्चे वो खौफनाक रातें याद करके कांप जाते हैं। यह था 90 का दशक—खून से लिखा इतिहास। चली हुई गोली ने कभी हिंदू या सिख नहीं देखा। हथियारों और हिंसा का दिखावा कभी भी पंजाब का भविष्य नहीं हो सकता। आज पंजाब को हथियारों की नहीं, बल्कि शांति, तरक्की और आपसी भाईचारे की जरूरत है।

किसी को खालड़ा साहिब से कोई लेना-देना नहीं

बता दें कि बिट्टू के दादा बेअंत सिंह पंजाब के मुख्यमंत्री थे जिन्हें आतंकवादियों ने बम धमाके के साथ उड़ा दिया था। इससे पहले बिट्टू ने कहा था कि किसी को खालड़ा साहिब से कोई लेना-देना नहीं है। आज तक कोई खालड़ा साहिब को नहीं जानता था। बिट्टू ने कहा कि फिल्म पर बात इसलिए हो रही है क्योंकि दलजीत दोसांझ इससे जुड़े हैं। उनके पैसे और कमाई इसमें लगी है। यह एक तरह का प्रॉपेगैंडा है।

दलजीत ने फिल्म पंजाबी और हिंदी मिलाकर बनाई

बिट्टू ने कहा कि दलजीत ने फिल्म पंजाबी और हिंदी मिलाकर बनाई है। उन्हें उस समय के हालात की जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि लोग उनके बारे में इसलिए बात कर रहे हैं क्योंकि शहीद बेअंत सिंह उनके दादा हैं। वे अमन-शांति की परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं।

..तब तक उनके दादा की शहादत हो चुकी थी

बिट्टू ने बताया कि उनके दादा 1992 फरवरी में मुख्यमंत्री बने थे। वे 31 अगस्त 1995 को शहीद हुए थे। उससे पहले खालड़ा साहिब पर कोई केस नहीं था। पुलिस ने उन्हें कभी नहीं उठाया था। खालड़ा साहिब लगातार अज्ञात शवों का श्मशान से डाटा तैयार करते थे। उनकी फैमिली पर कोई केस दर्ज नहीं था। वे लगातार कनाडा-अमेरिका आते-जाते थे। उनके खिलाफ कोई लुकआउट नोटिस जारी नहीं हुआ था। बिट्टू ने कहा कि उनके दादा 31 अगस्त 1995 को शहीद हो गए। खालड़ा साहिब को 6 सितंबर को उठाया गया। तब तक उनके दादा की शहादत हो चुकी थी। वे तब मुख्यमंत्री भी नहीं थे। ऐसे में फिल्म में उनका कैसे रोल आ गया, यह सवाल उठता है।###USA###UK###CANADA###RAVNEET-BITTU###PUNJAB###CHANDIGARH###INDIA###AUSTRALIA###GERMANY###IRELAND###SWEDEN###EUROPE###CHINA###HUNGRY###FRANCE###ITLAY###ROME###RUSSIA###UKRAINE###VIETNAM###SINGAPORE###@

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