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शंभू बॉर्डर पर बीते 9 महीने ने आंदोलन पर बैठे किसान संगठनों व जत्थेबंदियों को अपनी मांगों को मनवाने के लिए अब नया तरीका तलाशना होगा, क्योंकि पंजाब और हरियाणा में हुए लोकसभा और विधानसभा चुनाव में सियासी घमासान के बीच किसान आंदोलन का असर बैकफुट पर साबित हुआ। यहां तक कि हरियाणा के पिहोवा से भारतीय किसान यूनियन के गुरनाम सिंह चढूनी को हार का सामना करना पड़ा।
किसानों की आवाज बुलंद करने वाले गुरनाम सिंह चढूनी को हरियाणा विधानसभा चुनाव में केवल 1170 वोट ही मिले। पंजाब से सटे हरियाणा के विधानसभा हलकों में भी किसान आंदोलन का कोई खास असर नहीं देखने को मिला, जबकि चुनाव से ठीक पहले पंजाब व हरियाणा के कई किसान जत्थेबंदियों ने एक साथ केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ मोर्चा खोला था।

