ईरान-इजरायल जंग में महंगाई का असर भारत में खूब देखने को मिल रहा हैं। ऐसे में प्रांत पंजाब के जिला अमृतसर में तो महंगाई ने तो इतनी हद कर दी है कि अब 2 समय की रोटी खाना भी आम जनता के लिए मुश्किल होने लग पड़ा हैं। ऐसे में चर्चा इस बात की खूब चल रही है कि महंगाई तो एक प्रकार का बहाना है, असल में कारोबारियों का मेन मकसद कालाबाजारी में खूब पैसा कमाना हैं। खैर, ऐसे में प्रदेश की सरकार से लेकर विभाग पर भी बहुत बड़ा सवाल खड़ा हो जाता है कि वे लोग महंगाई को नियंत्रित करने के लिए अब तक क्या कर रहे हैं। या फिर इस बात को मान लिया जाए कि ये सब कुछ उनकी छत्रछाया के नीचे हो रहा हैं। खैर, अब तक किसी तरह से न कोई आधिकारिक तौर पर बयान आया है, और न ही कोई उचित कदम उठाया गया।
खैर, इस खेल में राजनीति तो हर पार्टी कर रही है। कहने का भाव आम जनता की भावनाओं के साथ हर कोई खिलवाड़ कर रहा हैं। क्योंकि, उन्हें आम-जनता के साथ मुद्दे को लेकर किसी तरह से कुछ भी कोई लेना देना नहीं हैं। इस महंगाई की चक्की में मध्यम वर्गीय से लेकर गरीब परिवार पिस रहा है। ऐसे में उन्हें सोचने के लिए मजबूर किया जा रहा है कि वो लोग अब किस प्रकार का विकल्प चयनित करें, खैर, उनके लिए अब कोई रास्ता तो नजर नहीं आ रहा है, लेकिन, उन्होंने अभी से ही अपनी आवश्यक चीजों की खरीदारी पर लगाम लगाना ही बेहतर विकल्प के तौर पर चुना हैं।
हर राजनीति पार्टी तथा सरकार मंच पर इस बात का हमेशा ही दावा करती है कि वे लोग देश या फिर राज्य में जमाखोरी नहीं होने देंगे। लेकिन, यह बातें सिर्फ हवा हवाई ही नजर आती हैं, क्योंकि, जमीनी स्तर पर कोई कुछ नहीं करता है। क्योंकि, इन लोगों की सत्ता ही जमाखोरों के दम पर चलती है। पत्ते की बात है कि किस पार्टी को सत्ता पर बिठाना है या फिर उतारना, इस बात को तय जमाखोरी करने वालों का एक गुट करता हैं। ऐसे में साफ हो जाता है कि देश में जमाखोरी खत्म करना सिस्टम से ही बिल्कुल बाहर हो चुका है। बताया जाता है कि जमाखोरी के खिलाफ बहुत बड़ा कानून पारित हुआ है। ऐसे में यहां पर यह सवाल उठता है कि फिर लागू किन-किन पर हुआ, किन-किन के खिलाफ उचित कार्रवाई हुई। खैर, इस बारे तो कोई उचित जवाब नहीं दे पाएंगा। क्योंकि, इस सिस्टम में हर वो बड़े नेता से लेकर सरकारी बाबुओं तक मोटा माल रिश्वत के तौर पर चढ़ जाता है। जिससे, उनकी जुबान पर ताला लग जाता हैं।
ऐसे में चर्चा का बाजार इस बात पर गर्म है कि जितने कालाबजारी कारोबारी है , वे लोग नाम की ही आयकर भरते है। असल, में तो उनका 2 नंबर का काम काफी प्रफुल्लित तरीके से चल रहा हैं। सहयोग तो इन्हें सरकारी मशीनरी एवं सरकारे दरबारे से मिल रहा है। कुछ हिस्सा एक पॉलिथीन में लपेटकर समय-समय पर उन्हें भेज दिया जाता है। खैर, ऐसे में तो जनता का परेशान होना भी लाजमी है, क्योंकि, उन्हें जरूरत का सामान खरीदने के लिए इन जमाखोरी करने वाले दुकानदारों को भरना पड़ता है। ऐसे में पता चला है कि यह जमाखोरी में एक चेन चल रही है। इसमें वो सब छोटे-बड़े दुकानदार भी शामिल है, जोकि इस समय खूब कमाई कर रहे हैं। खैर, उन जमाखोरों की वजह से आम जनता कितनी असहाय हो चुकी है कि अब उन्हें मजबूरी वंश कोई गलत रास्ता अपनाने के लिए भी नहीं कोई रोक सकता हैं। ###USA###mahangai-topic###
प्रधान संपादक विनय कोछड़…एसएनई न्यूज़

