चिंता का विषय….हर 10वें अपराध के पीछे किशोर शामिल…जानेंगे, कैसे ‘ISI’ फंसा रहा अपने जाल में…?

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एडिटर-इन-चीफ विनय कोछड़.अमृतसर.चंडीगढ़। 

अपराध की दुनिया में किशोर की संख्या में इजाफा होना काफी चिंता का विषय है। बताया जा रहा है कि पिछले 5 साल के सर्वे मुताबिक, उनकी संख्या सैकड़ों पार कर चुकी है। इस पर लगाम लगाना कोई इतना आसान भी नहीं लग रहा हैं। हैरान करने वाली बात यह है कि अब हर 5 से 10वें अपराध के पीछे 1 अपराधी किशोर ही पाया जा रहा है। इसके पीछे की वजह सोशल मीडिया प्लेटफार्म भी बताया जा रहा है। अधिकतर किशोर बड़े-बड़े अपराधियों के जाल में इसी प्रकार से फंस जाते है। ऊपर से उन्हें पैसों का लालच देकर अपनी तरफ खींच लिया जाता है। एक पुलिस के शीर्ष अधिकारी ने इस बात को माना भी है तथा एक प्रकार से समाज के लिए चिंता का विषय भी बताया हैं। 

एक अध्ययन में सामने आया है कि 14 वर्ष उपरांत किशोर की बुद्धि कुछ उलट कामों की तरफ चलती है। ऐसे में अगर वह अपने रास्ते से भटक जाता है तो उसे ठीक मार्ग पर लाना हर किसी के लिए मुश्किल हो जाता है। क्योंकि, वह इस दुनिया में कदम रखने के उपरांत पीछे की तरफ बिल्कुल ही नहीं देखता है। ऐसे में उसकी अपराध की दुनिया में संख्या बढ़ती जाती है। कहीं न कहीं हमारे जानकार, इसके पीछे भ्रष्ट सिस्टम को भी कसूरवार समझते है। उनके मुताबिक, कुछ किशोर की संख्या ऐसी भी होती है कि जो सिस्टम से तंग आकर जुर्म का रास्ता अपना लेते है। जबकि, कुछ पैसों की लालच की वजह से इस सिस्टम का हिस्सा बन जाते है। ऐसे में किशोर के मां-बाप को चाहिए, कि वे लोग अपने बच्चे पर हर समय नजर रखें। दिनचर्या में वह क्या कुछ करता है, उसके बारे उन्हें पता होना चाहिए। 

..कौन-से क्षेत्र है सबसे प्रभावित

आंकड़ों के  मुताबिक, अपराध की दुनिया में कदम रखने वाले पंजाब के सीमांत क्षेत्र में रहने वाले किशोर पाए जा रहे हैं। हैरान करने वाली बात तो यह है कि उनकी आयु करीब 14-16 वर्ष पाई गई हैं। जितने बड़े गैंग है, वो सब इन्हें सोशल मीडिया के माध्यम से संपर्क करते है। इतना ही नहीं, काम के बदले महंगे फोन तथा मोटा पैसा दिया जाता हैं। पूर्व में इनसे छोटे-मोटे काम लिए जाते है, ताकि पुलिस तथा सुरक्षा एजेंसी की नजर से दूर रहें। जब, उनका हौसला बढ़ जाता है तो इनसे बड़े-बड़े काम लिए जाते हैं।

एक रिपोर्ट में पता चला है कि कुछ समय से अमृतसर, तरनतारन, गुरदासपुर, पठानकोट, फिरोजपुर जैसे क्षेत्रों से अपराध में शामिल किशोरों को जब पुलिस ने पकड़ा तो उनकी नींद उड़ गई। उन्हें इस बात का बिल्कुल अंदाजा भी नहीं हुआ कि वे लोग इतना बड़ा काम कर सकते हैं। 

कुछ इस प्रकार के लिए जाते है काम

माना जा रहा है कि इन किशोरों का इस्तेमाल अपराध की दुनिया में पड़ोसी देश की खुफिया एजेंसी (आईएसआई) कर रही है। पंजाब के जितने बड़े गैंग तथा तस्करों को खास हिदायत दी गई कि अब अपराध में ज्यादा से ज्यादा किशोरों का भर्ती किया जाए, ताकि वे लोग अपने नापाक मंसूबों में कामयाब हो सकें। ऐसा करने में वे लोग कई बार कामयाब भी रहे चुके हैं। 

पता चला है कि पाकिस्तान से जितना नशा, हथियार ड्रोन के माध्यम से भारतीय सीमा पर पहुंचता है , उसे आगे ठिकाने लगाने के लिए किशोरों का इस्तेमाल किया जाता हैं, ऐसा इसलिए भी क्योंकि, इन पर कोई शक भी नहीं करता हैं। ये किशोर चंद पैसों के लालच की वजह से अपना भविष्य ही दांव पर लगा लेते है। 

नेटवर्क तोड़ना इतना आसान नहीं

विशेषज्ञों की मुताबिक, इनका नेटवर्क तोड़ना इतना आसान नहीं है, क्योंकि, किशोर तो तस्करों तथा गैंगस्टरों के हाथ की सिर्फ कठपुतली है, वे उन्हें सिर्फ पैसा तथा महंगे फोन के उपहार देकर उनका इस्तेमाल करते है। पकड़े जाने के उपरांत उनका अपनी सूची से ही नाम मिटा देते हैं। इसमें एक बात जो हैरान करने वाली सामने आई है वो है कि किशोर को इनका अता-पता तथा पहचान तक नहीं मालूम होती है। ऐसे में अगर वे लोग पकड़े भी जाते है तो पुलिस के लिए किसी काम के नहीं रहते है। ऐसे में एक बात तो साफ है कि इनका नेटवर्क तोड़ पाना पुलिस तथा एजेंसी के लिए कोई आसान नहीं है। 

हथियारों का शौकीन है पंजाब का किशोर

कई मामलों का अध्ययन करने पर पता चला है कि पंजाबी किशोर हथियारों का काफी शौकीन है। वह हमेशा चाहता है कि उसके पास किसी न किसी प्रकार का हथियार होना चाहिए, उसे पाने के लिए वे लोग गलत राह की तरफ चल पड़ते है। मालूम हुआ है कि किशोर के पास 30 फीसद हथियार 2 नंबर का है, जिन्हें, उन्होंने किसी न किसी तरीके से गैंग या फिर आपराधिक गतिविधियों में शामिल अपराधियों से हासिल किया है। इतना ही नहीं हथियार रखने की मंशा ने ही उन्हें अपराध के रास्ते की तरफ धकेल दिया हैं। 

सोशल मीडिया कर रहा बेड़ागर्क

एक रिपोर्ट में सामने आया 80-90 फीसद किशोरों का बेड़ागर्क सोशल मीडिया ने ही कर रखा है। इनमें 70 फीसद किशोर सोशल मीडिया की गलत साइड को खोज करते है। फिर उसका पूरी तरह से मतलब को समझ कर , उसका इस्तेमाल गलत काम के लिए करते है। इतना ही नहीं, इसके बारे उनके अभिभावकों को जरा सी भनक भी नहीं होती है कि उनके बच्चे क्या कुछ कर रहे हैं। इतना ही नहीं, अक्सर ही देखने में पाया गया है कि किशोर अवैध हथियारों सहित अपनी फोटो या फिर वीडियो अपने सोशल मीडिया पर डाउनलोड कर लेते है। जो कि कानूनी तौर पर एक तरह से अपराध माना जाता है। पता चला है कि जब पुलिस उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करती है तब जाकर अभिभावकों को पता चलता है कि उनके किशोर ने यह करतूत को अंजाम दिया। 

कानून के दायरे में लाना पुलिस-सरकार के लिए चुनौती

विशेषज्ञों का मानना है कि किशोर का अपराध की दुनिया में कदम रखना एक बहुत बड़ी चिंता का विषय हैं। क्योंकि, किशोर ही देश का भविष्य होता है। गलत राह पर चलने से राज्य तथा देश की अर्थव्यवस्था पर भी असर डालता है। ऐसे में अब सवाल खड़ा होता है कि जो सही रास्ते से भटक गए है, उन्हें कानून के दायरे पर कैसे वापस लाया जाए। इसके लिए सरकार तथा पुलिस के लिए चुनौती तो है, लेकिन काम असंभव नहीं है। इसके लिए उन्हें सही-गलत के लिए अवेयर मुहिम चलाना बहुत आवश्यक हैं। अगर, ऐसा संभव हो जाता है तो किशोरों को सही रास्ते की तरफ एक सुधारात्मक कदम माना जा सकता हैं।    

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