पूर्व DIG हरचरण सिंह भुल्लर की जमानत याचिका पर  सुनवाई….“सेवा पानी” का मतलब जरूरी नहीं कि रिश्वत ही हो,  सीबीआई ने क्षेत्राधिकार का उल्लंघन किया

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वरिष्ठ पत्रकार.चंडीगढ़। 

भ्रष्टाचार मामले में गिरफ्तार पंजाब पुलिस के पूर्व DIG हरचरण सिंह भुल्लर द्वारा दायर जमानत याचिका पर आज (शुक्रवार को) चंडीगढ़ CBI कोर्ट में सुनवाई हुई। पिछली सुनवाई पर CBI की स्पेशल कोर्ट ने भुल्लर की जमानत याचिका पर चंडीगढ़ CBI से जवाब मांगा था। आज सुबह साढ़े दस बजे सुनवाई शुरू हुई और 12:15 बजे खत्म हुई।
डीआईजी भुल्लर केस की सुनवाई के दौरान डीआईजी भुल्लर के वकील एसपीएस भुल्लर ने कहा कि सीबीआई ने जो केस दर्ज किया है, उसमें न तो समय, न तारीख और न ही जगह का जिक्र किया गया है। इसके अलावा जो रिश्वत की राशि बताई गई है, उसका भी कागजों में विरोधाभास है, पहले एक लाख और फिर चार लाख का जिक्र किया गया है।


वकील ने यह भी कहा कि सीबीआई ने चालान में रिश्वत के तौर पर जिस शब्द का इस्तेमाल किया है, वह “सेवा पानी” है। “सेवा पानी” का क्या मतलब है, इसका कुछ भी अर्थ हो सकता है, यह जरूरी नहीं कि इसका मतलब रिश्वत ही हो। वकील ने आगे कहा कि सेक्टर-9 डी, चंडीगढ़ में बचौलिया, शिकायतकर्ता आकाश और सीबीआई के अधिकारी सचिन की लोकेशन आ रही है। इसके अलावा सीबीआई ने गिरफ्तारी के समय पंजाब के किसी भी सीनियर अधिकारी को इसकी जानकारी नहीं दी।


इसके बाद सीबीआई के वकील नरेंद्र सिंह ने कहा कि डीआईजी भुल्लर के खिलाफ जो केस दर्ज किया गया है, वह नॉन-बेलेबल है। भुल्लर पुलिस की एक बड़ी पोस्ट पर तैनात था। उन्होंने कहा कि भुल्लर के वकील द्वारा यह कहा गया कि कोई विटनेस नहीं है, तो उन्हें बता दिया जाए कि इंस्पेक्टर आरएम शर्मा और इंस्पेक्टर पवन लांबा दोनों इस केस में गवाह हैं। पहला गवाह पवन लांबा और दूसरा गवाह आरएम शर्मा है।


सीबीआई वकील ने कहा कि भुल्लर इतनी बड़ी पोस्ट पर बैठा था, इसलिए पूरे सबूत पहले ही इकट्ठा करने शुरू कर दिए गए थे। उन्होंने कहा कि सेक्टर-9 डी, चंडीगढ़ का जो जिक्र किया जा रहा है, वह केवल लोकेशन की बात है, पार्किंग में किसी का भी कोई काम हो सकता है। इसके अलावा सीबीआई वकील नरेंद्र सिंह ने कहा कि डीआईजी भुल्लर द्वारा बिचौलिए को भेजे गए मैसेज से साफ पता चलता है कि रिश्वत मांगी जा रही थी। मैसेज में कहा गया था कि “जितने देता है, उतने ले लो और पूरे आठ लाख करने हैं।”


उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के मंत्रालय द्वारा जारी नोटिफिकेशन में साफ लिखा है कि सीबीआई के डीएसपी के पास गिरफ्तारी की पावर है और इसमें जगह नहीं देखी जाती, खासकर जब करप्शन इतनी बड़ी हो और इतने बड़े पद पर बैठे अधिकारी के खिलाफ हो। यह करप्शन किसी कॉन्स्टेबल के खिलाफ नहीं, बल्कि एक डीआईजी के खिलाफ शिकायत थी।
इसके बाद सीबीआई वकील नरेंद्र सिंह ने कहा कि डीआईजी भुल्लर के पिता पंजाब के डीजीपी रह चुके हैं, इसलिए नेक्सस काफी मजबूत है। इसी के चलते पूरे सबूत इकट्ठा किए गए। इस ऑपरेशन के पूरा होने के बाद पूरा पंजाब और पूरा देश हिल गया था। जितनी रफ्तार इन्होंने पकड़ रखी थी, काफी तेज थी।


भुल्लर के वकील विक्रम चौधरी ने रिहाई की अंतरिम राहत ठुकराने वाले हाईकोर्ट के आदेश का विरोध करते हुए कहा कि हाईकोर्ट ने लंबी सुनवाई करने के बाद अंतरिम राहत देने से यह कहते हुए इनकार कर दिया कि मांगी गई अंतरिम राहत फाइनल राहत के समान है। हाईकोर्ट ने आदेश में कोई कारण भी नहीं दिया। वकील ने कहा कि यह मामला व्यक्ति की निजी स्वतंत्रता से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि इस मामले में सीबीआई ने क्षेत्राधिकार का उल्लंघन किया है। पंजाब राज्य ने सीबीआई जांच की सहमति वापस ले ली है, उसके बावजूद सीबीआई पंजाब में घुसी।

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