ईरान-इजरायल जंग ने पेट्रोल पदार्थों पर किल्लत की मोहर लगाने में आम जनता पर चोट का काम किया। ऐसा, इसलिए भी हो रहा है क्योंकि, भीतरघात सरकार ही अपनी लाडली कंपनियों को फायदा पहुंचाने में लगी हैं। खैर, गोदी मीडिया तो सिर्फ तो सिर्फ सरकार को अच्छा दिखाने में उनका पूरी तरह से सहयोग दे रही है। चर्चा का बाजार गर्म है कि इन गोदी मीडिया घरानों का मुंह बंद करवाने के लिए केंद्र सरकार द्वारा खूब मोटा पैसा पहुंचा दिया। इसलिए, अब टेलीविजन पर मोदी-मोदी का ही गुणगान चल रहा हैं। लेकिन, सच्चाई तो यह है कि परेशान तो मध्यमवर्गीय तथा गरीब जनता हो रही हैं। ऐसे में तो एक बात साफ है कि मोदी जी को आम जनता के साथ कोई कुछ लेना देना नहीं है क्योंकि, उनकी सरकार को तो देश के 2 उद्यमी अपने पैसों के दम पर चला रहे है।
खैर, आज तो पेट्रोल पंप पर 1-2 किलोमीटर लंबी कतार ने इस बात का पक्का संदेश दे दिया कि वाक्य में पेट्रोल की किल्लत हैं। ऊपर से परेशान आम जनता का सातवें आसमान का गुस्सा पेट्रोल पंप के कर्मचारियों पर दिखाई दिया। छिटपुट लड़ाई-झगड़े की घटनाएं अमृतसर शहर से सामने आई। लेकिन, समय रहते स्थिति नियंत्रित कर लिया गया। पता चला है कि 2 पहिया वाहन के लिए 200 रुपए, जबकि चार-पहिया स्पेशल कारों के लिए 500 तक की प्रतिदिन पेट्रोल भरवाने की सीमा तय की गई। इन परिस्थितियों से इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता है कि आने वाले दिनों में हालात काफी भयंकर हो सकते हैं। क्योंकि, वर्तमान में हर चीज पेट्रोल के साथ कहीं न कहीं जुड़ी हुई है। ताजा परिस्थितियां यह बयां कर रही है कि फिलहाल सरकार , इस संकटमय समय पर मोचन का काम करने में पूरी तरह से असहाय दिखाई दे रही है।
ऐसे में यह साफ हो जाता है कि जंग का असर अब भारत के सभी प्रांतों में देखने को मिल रही है। महंगाई, किल्लत ने तो इस बात के पक्के सबूत दे दिए हैं। फिर भी एक बात को मान कर चले तो अभी तक आम-जनता के सब्र का बांध बिल्कुल ही नहीं टूटा। अगर समय रहते सरकार ने कुछ नहीं किया तो ये सरकार के लिए बड़ी चुनौतियां पैदा कर सकती है। देखा जाए तो महंगाई, किल्लत ने देश की सत्ता को बदलने में काफी अहम रोल निभाया हैं। इतना ही नहीं, इन परिस्थितियों ने सरकार को भी इस समय सोचने के लिए मजबूर कर दिया है कि अब हालात को कैसे सुधारा जाए। माना जा रहा है कि सरकार के पास अभी तक इस विकट मय परिस्थितियों से निपटने के लिए कोई प्लान नहीं हैं,क्योंकि, देश 50 फीसद से ऊपर विदेश पर निर्भर हैं। खासकर, पेट्रोल, ईंधन, गैस से जुड़े पदार्थ।
प्रधान संपादक विनय कोछड़ की कलम से (एसएनई न्यूज़)। ###USA### CANADA###PATROL-TOPIC###

