शर्म की बात…….सरकारी बाबू नहीं कर रहे उनका काम……बार-बार बेवजह के खाने पड़ रहे धक्के
बड़ा-सवाल…….भगवंत मान सरकार क्यों भूली शहीद स्वर्ण सिंह की शहादत……अंग्रेजों को धूल चटाने में नहीं छोड़ी थी कोई कसर
EDITOR-IN-CHIEF विनय कोछड़।

देश शहीद भगत सिंह की कुर्बानी का कभी भी मूल नहीं चुका सकता हैं। क्योंकि, उन्होंने स्वतंत्र भारत बनाने में अहम भूमिका निभाई थी। छोटी ही आयु में वे देश के लिए कुर्बान हो गए थे। वर्तमान में पंजाब की सत्ता में आम आदमी पार्टी (आप) की सरकार है। सच कहे तो सत्ता हासिल करने के लिए इस पार्टी (आप) ने शहीद भगत सिंह की विचारधारा को ही अपनाया था। लेकिन, बड़े शर्म की बात है इस पार्टी की सरकार पंजाब की सत्ता में होने के बावजूद शहीद परिवार की बेटी जसमीत कौर उर्फ सराभा (लुधियाना) अपने मूल अधिकारों से वंचित है। हैरान करने वाली बात है कि सरकारी बाबू इनके अधिकारों की फाइल पर पिछले कई सालों से काम तक नहीं कर रहे हैं। बार-बार बेवजह उन्हें सरकारी कार्यालयों में धक्के खाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।

बड़ा सवाल तो प्रदेश की भगवंत मान सरकार पर तब खड़ा है कि उन्होंने तो शहीद स्वर्ण सिंह की शहादत को सरकारी किताबों से बिल्कुल ही भुला दिया। ये वो स्वतंत्रता सेनानी थे, जिनकी आवाज़ के दम तथा आजादी के जुनून से डरते थे। बहन जसमीत कौर के मुताबिक, उनके पापा जी ने अंग्रेजों को धूल चटाने के लिए लाहौर की अदालत में बम भी फोड़ा था। उस समय वह घायल तो जरुर हो गए थे, लेकिन, उन्हें किसी ने वहां से ले जाकर किसी अज्ञात जगह में उनका इलाज किया। बहन के मुताबिक, शहीद भगत सिंह रिश्ते में उनके चाचा लगते है। पापा जी और चाचा जी का आपस में बेहद प्यार था। अंग्रेजों के खिलाफ कई बार इकट्ठे होकर रणनीति तैयार की।

यहां एक दिलचस्प पहलू यह भी है कि स्वर्ण सिंह की शहादत को किताबों में अलग-अलग तरीके से बयां किया है। कई जगह तो उनके जन्म स्थान तथा दिनांक को ही अलग दर्शाया है। इस बात को लेकर उनकी बेटी जसमीत कौर काफी चिंतित भी है। उनके मुताबिक, पिता की पहचान को सही ढंग से उजागर करने के लिए वह कई वर्षों से सरकार तथा प्रशासनिक दायरों में चक्कर काट रही है। लेकिन, उनका दिल तब टूट जाता है, जब बाबू लोग उन्हें सही ढंग से ढील तक नहीं करते है। लेकिन, वह भी हिम्मत हारने वालों में से नहीं है, क्योंकि, उनके भीतर का रक्त तो शहीद पिता का दौड़ रहा है। पिता ने हमेशा से ही उन्हें जीवन कठिन परिस्थितियों से लड़ने के बारे सिखाया।

….अब सीएम तक कर रहे नजरअंदाज
बहन जसमीत कौर के मुताबिक, पंजाब की सत्ता में आने से पहले सीएम भगवंत मान का शहीद परिवारों के साथ खासा लगाव था। सप्ताह में उनसे मुलाकात करने के लिए आया जाया करते थे। उनकी दुख तकलीफ का समाधान करने का उन्होंने वचन दिया था। इतना ही नहीं, सीएम शपथ समारोह में तो शहीद की विचारधारा तथा उन्हीं का पहरावा डालकर जनता के बीच एक अच्छे देशभक्त का संदेश दिया था। लेकिन, अब तो उनके पास उनकी दुख-तकलीफ तथा कोई भी समस्या सुनने का तो समय ही नहीं है। वह तो अब वीआईपी सुरक्षा में रहते है तथा हमें उनसे मुलाकात करने के लिए एकदम मना कर दिया जाता है। इसका ताजा उदाहरण हालिया पिछले दिनों का है, जब उन्हें सीएम से मुलाकात करने ही नहीं दिया गया। इससे साफ साबित हो जाता है कि सीएम भगवंत मान उन्हें साफतौर पर नजरअंदाज कर रहे है।
……बार-बार भेजा जाता है पत्र…लेकिन, बाबू लोग नहीं करते है काम
बहन जसमीत कौर ने बताया कि उन्हें राज्य सरकार ने स्वतंत्रता सेनानी परिवार की श्रेणी का हिस्सा कई बार मान चुकी हैं। इसके लिए संबंधित विभाग को चंडीगढ़ कार्यालय पत्र भी भेजा गया। लेकिन, लुधियाना की सरकारी बाबू उनकी फाइल को पास करने के लिए उन्हें बार-बार खराब करते है। इतना ही नहीं अब तक उनका काम भी नहीं किया गया। जब कई बार उन्हें शिकायत करने का बोला गया, फिर उन्हें अगली बार काम करने का झूठा हवाला दे दिया जाता है। ऐसा करते-करते, कई साल बीत चुके है। जबकि, एक छोटा सा काम इन भ्रष्ट बाबुओं ने नहीं किया।
….पिता ने अंतिम समय तक किया संघर्ष
पिता शहीद स्वर्ण सिंह का कुछ साल पहले बीमारी की वजह से निधन हो गया। लेकिन, देश की स्वतंत्रता के उपरांत भी उन्होंने समाज की बुराई के खिलाफ काफी लंबा संघर्ष किया। बीच में उन्हें टीबी जैसी खतरनाक बीमारी हुई तब भी वह अपने विचारों को नहीं दबा सकें तथा तब भी समाज की भलाई के लिए काम करते रहें। दुख की बात तो यह है कि देश की सरकार ने उनके इलाज के लिए एक फूटी कौड़ी तक नहीं दी।देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने उनसे मुलाकात तो अवश्य की, लेकिन, उनके तथा परिवार के लिए उनकी सरकार ने कुछ नहीं किया। ऐसा कहना था, स्वर्ण सिंह की बेटी बहन जसमीत कौर का।
……नेताओं ने सिर्फ प्यार दिया, लेकिन, किसी ने परिवार के दुख को नहीं समझा
बहन जसमीत के मुताबिक, देश के प्रथम प्रधानमंत्री तथा प्रदेश के कई मुख्यमंत्रियों ने उनके परिवार को हर संभव मदद देने का आश्वासन दिया, लेकिन किसी ने इस वादे को आज तक पूरा नहीं किया। वंचित हालत में उन्हें कई दुखों के पहाड़ का सामना करना पड़ा, किसी ने कोई मदद नहीं की। सिर्फ अपनी हिम्मत तथा लोगों के प्यार ने उन्हें किसी के आगे झुकने नहीं दिया। वर्तमान में भी कई लोगों की जो सरकार बात नहीं सुनती, उनके साथ वह खड़ा होकर उनकी हर संभव मदद करते है। जसमीत के मुताबिक, उन्हें ऐसा करने से अच्छा लगता है। वह इसे अपना धर्म तथा कर्म मानते है।
बंदी सिंहों के मुद्दे पर कई दिनों तक धरने में हुए शामिल
बहन जसमीत कौर ने पिछले समय बंदी सिंहों के मुद्दे पर लगाए पक्के मोर्चे में शामिल होकर , इस बात का संदेश दिया कि शहीद का परिवार उनके साथ सदैव खड़ा है। उनके मुताबिक, यह मुद्दा एकदम जायज था। सबसे बड़ी बात समाज के साथ जुड़ा था। हमेशा ही सरकारें , जुल्म के खिलाफ आवाज उठाने वालों को झूठा केस दर्ज कर उन्हें जेल में डाल देती है। अगर उनकी रिहाई के लिए मुझे जान भी देनी पड़े तो पीछे नहीं हटूंगी। हैरान करने वाली बात है कि एक बार भी प्रदेश सरकार ने बंदी सिंहों के समर्थन में कोई बात आज नहीं की। इन लोगों का तो एक ही काम है कि लोगों से मत कैसे हासिल करना है। जब काम पूरा हो जाए, तो सब वादे भूल जाती है। कोई बात नहीं है, ये सरकार जल्द ही अब जाने वाली है। क्योंकि, इन्होंने जायज मुद्दों को पूरा नहीं किया।
पत्रकारों के समर्थन में कई बार उठाई आवाज
बहन जसमीत कौर ने कई बार पत्रकारों के समर्थन में सड़कों तक धरना दिया। उनके मुताबिक, पत्रकार एक सच्चा तथा ईमानदारी पेशे से जुड़ा होता है। बिना लालच के वह जनता के लिए आवाज उठाता है। उनके मुद्दों को दुनिया के सामने लाता है। पत्रकार की आवाज को दबाने के लिए सरकार तथा प्रशासन हमेशा ही लगी रहती है, लेकिन, यह शहीद परिवार उनकी हर संभव मदद करता है। परिवार के मुताबिक, सच्चे पत्रकारों की मदद करने से उन्हें दिल से सुकून मिलता है। वह इस सेवा को आगे भी जारी रखेंगे। क्योंकि, उनका परिवार हमेशा ही देश की सेवा करने वाले लोगों के साथ खड़ा है।

