VINAY कोछड़.अमृतसर/चंडीगढ़।
हिंदुस्तान का एक मजदूर प्रतिदिन के हिसाब से 500 रुपए दिहाड़ी (प्रतिमाह पगार 15000) ले रहा हैं, जबकि, सरकार के लिए सरकारी काम करने वाले सिविल अस्पताल के बाहरी स्रोत (OUTSOURCE) कर्मचारी को प्रतिदिन 400 रुपए (प्रतिमाह पगार 12000) देकर उनके साथ सरासर भद्दा मजाक किया जा रहा है। ऊपर से पिछले 2 माह से उनकी पगार अटकी पड़ी है। 2 वक्त की रोटी के लाले पड़े है। बाजार से ऋण या फिर रिश्तेदार से उधारी पैसे लेकर घर का बड़ी मुश्किल से गुजारा किया जा रहा है। यह हाल है प्रदेश की आम आदमी पार्टी का नेतृत्व करने वाली मान सरकार का। सत्ता हासिल करने से पूर्व सभी मुलाजिमों को पक्का करने तथा पगार बढ़ाने का वादा किया था। लेकिन, इन कर्मचारियों के साथ बहुत बड़ा धोखा हुआ।
अमृतसर के सिविल अस्पताल में लगभग 50 बाहरी स्रोत (OUTSOURCE) कर्मचारी वर्ष 2015 से अलग-अलग विभाग में ड्यूटी दे रहे है। खास बात यह है कि कम पगार में वे लोग काफी मेहनत तथा तनदेही से अपनी ड्यूटी को निभा रहे है। कभी भी उनकी विभाग की तरफ से कोई शिकायत नहीं आई। लेकिन, पिछले 2 माह से पेंडिंग पगार ने इनके घरों का बजट बिल्कुल ही बिगाड़ दिया। इनके मुताबिक, अगर वे लोग विरोध करते है तो भयं इस बात का सताने लग पड़ता है कि कहीं उनकी नौकरी हाथ से न छीन जाए।
पता चला है कि वर्ष 2015 में पूरे पंजाब के सिविल अस्पताल में अलग-अलग में बाहरी स्रोत (OUTSOURCE) कर्मचारी नियुक्त किए गए। नियुक्त एक निजी कंपनी द्वारा की गई। पता चला है कि कंपनी का नाम इनोविजन OUTSOURCE है। कंपनी का कार्यालय गुरुग्राम में है। इनका अनुबंध सरकार के साथ है। सरकार प्रति कर्मचारी का लगभग 17000 प्रतिमाह देता है। आगे ये कर्मचारी को सिर्फ 12 हजार ही देते है। प्रारंभिक समय में प्रत्येक कर्मचारी 9200 रुपए के हिसाब से रखा था। लगभग 9 साल में सिर्फ 2800 रुपए ही बढ़ाया गया।
कर्मचारियों के मुताबिक, सरकार से लेकर अनुबंध करने वाली कंपनी सरासर मजाक कर रही है। इतनी पगार में घर का गुजारा इतना मुश्किल हो जाता है कि कई बार मन करता है कि वे इस नौकरी को छोड़ ही दे, लेकिन, जब परिवार नजर आता है तो हिम्मत से आगे बढ़ने के लिए मन को दिलासा देना पड़ता है। अगर, उन्हें डीसी रेट पर भी प्रतिमाह पगार मिल जाए तो शायद वह उनके जीवन के लिए अच्छा हो सकता है। लेकिन, सरकार ऐसा बिल्कुल भी नहीं करना चाहेगी। सरकार तो सिर्फ एक बात ही कहती है कि उनके लिए पर्याप्त बजट नहीं है।
विभाग नहीं लेता कोई सिरदर्दी
दरअसल, एक पहलू यह भी सामने आया है कि विभाग भी इन बाहरी स्रोत (OUTSOURCE) कर्मचारियों की पगार को जल्द लाने में कोई खास यत्न नहीं करता है। जांच में सामने आया है कि विभाग का प्रत्येक अधिकारी अपने पाले की गेंद दूसरे के हिस्से में फेंक कर खुश है। कुल मिलाकर कोई सिरदर्दी नहीं लेता है। हां, उन्हें मालूम है कि उनकी वेतन प्रतिमाह उनके खाता में पहुंच जाता है। अब उन्हें इन कर्मचारियों के लिए कोई प्रयास करने की अधिक आवश्यकता नहीं है। जिस प्रकार से सिविल अस्पताल की ओपीडी है, अगर इन बाहरी स्रोत (OUTSOURCE) की सेवाएं न हों तो एक दिन में पूरा सिस्टम डगमगा जाएगा। ऊपर से विभाग द्वारा इनसे एक्स्ट्रा काम भी लेता है।
सरासर हो रहा है धक्का
बाहरी स्रोत (OUTSOURCE) कर्मचारियों ने दबी जुबान में कहा कि वे लगातार 9 वर्ष से अलग-अलग विभाग में अपनी सेवाएं दे रहे है। सुबह से लेकर शाम तक पूरी तनदेही से काम करते है। किसी मरीज को कोई समस्या उनके विभाग की आए, उन्हें प्राथमिकता के साथ डील किया जाता है। वह हमेशा ही काम को अपनी धर्म तथा कर्म समझते है। लेकिन, दुख इस बात है कि उन्हें प्रतिमाह पगार कभी समय पर नहीं मिली है। उनके साथ सरासर धक्का हो रहा है। ऊपर से प्रतिमाह 12000 वेतन ही मिल रहा है। बड़ी मुश्किल से घर का गुजारा चल रहा है। मन में एक उम्मीद आवश्यक है कि शायद कभी वे लोग भी स्थायी कर्मचारी बनेंगे। विरोध करने में डर लगता है, क्योंकि उन्हें नौकरी से निकाल दिया जाएगा तथा अन्य को उनकी जगह अवसर दे दिया जाएगा।
शर्म की बात…..अधिकारियों के पास नहीं है कोई जवाब
शर्म इस बात की है कि सिविल अस्पताल के किसी भी बड़े अधिकारी के पास इस समस्या का कोई जवाब तक नहीं है। एक अधिकारी बोल रहे है कि सरकार के पास पैसा नहीं है, इसलिए अब कुछ नहीं हो सकता है। इनकी समस्या के बारे अन्य अधिकारी मेरे से बेहतर बता सकते है। इस विभाग को डील करने वाली एक महिला अधिकारी को तो इतना तक नहीं पता कि बाहरी स्रोत (OUTSOURCE) कर्मचारी कितने है तथा कितने माह से उनकी पगार पेंडिंग है। वह सिर्फ तो सिर्फ वीसी में व्यस्त होने का दावा करती रही।

