25 साल बाद सरकारी मुलाजिम को HIGH-COURT से मिला इंसाफ…अब सरकार को 2 माह में देना होगा उसका बकाया

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SNE NETWORK.CHANDIGARH.

पंजाब सरकार के एक मुलाजिम केस लड़ते-लड़ते रिटायर हो गए। 25 साल चले केस के बाद अब उनकी याचिका पर फैसला आया और रिटायरमेंट के बाद वह प्रमोट हो गए। जिसमें पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने उन्हें करीब 27 साल बाद सीनियोरिटी और प्रमोशन के लाभ देने के आदेश दिए। हाईकोर्ट ने ये भी कहा कि पेंशन और रिटायरमेंट में मिलने वाले बैनिफिट का दोबारा हिसाब कर बकाया भी दिया जाए। कोर्ट ने सरकार को 2 महीने का टाइम दिया है।

याचिकाकर्ता नैब सिंह और अन्य इस प्रक्रिया के लिए योग्य थे, लेकिन विभागीय गलती से उनके नाम समय पर सरप्लस सूची में नहीं भेजे गए। बाद में उनके नाम रोजगार कार्यालय के जरिए भेजे गए, जबकि उनसे जूनियर कर्मचारियों के नाम पहले ही सरप्लस कर्मचारी के तौर पर भेजे जा चुके थे।

चयन प्रक्रिया पूरी होने पर सामने आया कि याचिकाकर्ताओं ने संबंधित जूनियर कर्मचारियों से ज्यादा अंक हासिल किए थे। इसके बावजूद 25 नवंबर 1999 को कम अंक वाले जूनियर कर्मचारियों को रिसर्च अफसर के पद पर प्रमोशन दे दिया गया। इसके बाद 11 अगस्त 2000 को जारी सीनियोरिटी लिस्ट में भी याचिकाकर्ताओं को उन्हीं कर्मचारियों से नीचे रखा गया।

सरकार का तर्क था कि ये कर्मचारी सरप्लस श्रेणी से आए थे और उन्हें पहले एडजस्ट किया गया था, इसलिए वे सीनियर माने जाएंगे। याचिकाकर्ताओं ने सीनियोरिटी लिस्ट और प्रमोशन को चुनौती देते हुए 2001 में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर की। कोर्ट ने 14 सितंबर 2001 को मामले में नोटिस जारी किया।

मामला करीब 25 साल तक हाईकोर्ट में लंबित रहा। इस दौरान याचिकाकर्ताओं को बाद में रिसर्च ऑफिसर पद पर प्रमोशन तो मिला, लेकिन 25 नवंबर 1999 से मिलने वाली सीनियोरिटी और उससे जुड़े वित्तीय लाभ नहीं मिले। आखिरकार फैसला आने से पहले ही सभी याचिकाकर्ता अपनी पूरी नौकरी कर सेवानिवृत्त हो गए।###USA###UK###CANADA###AUSTRALIA###NEWZEALAND###PUNJAB###CHANDIGARH###HARYANA###SINGAPORE###

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