ARTICLE-MUST-READ..गली-गली में एक ही है शोर..अमृतसर ट्रैफिक पुलिस थप्पड़ जड़ने में खूब है माहिर…?

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संपादकीय -लेखक विनय कोछड़ (एडिटर-इन-चीफ).

इन दिनों अमृतसर की ट्रैफिक पुलिस के थप्पड़ जड़ने की चर्चा खूब हो रही हैं। एक थप्पड़ का किस्सा इतना मशहूर हो चुका है कि उसकी गूंज पंजाब पुलिस निदेशक (डीजीपी) के कार्यालय से लेकर मुख्यमंत्री आवास तक पहुंच चुका हैं। ऐसे में पुलिस विभाग से लेकर खासकर पुलिस आयुक्त कार्यालय (अमृतसर) की खूब किरकिरी हो रही हैं। अब चर्चा इस बात की है मामले को ठंडा करने के लिए पुलिस ने जांच कमेटी तो गठित कर दी है, लेकिन, पीड़ित परिवार गाल में लगा थप्पड़ का निशाना नहीं भूला पा रहा है। परिवारिक सूत्र इस बात की भी पुष्टि कर रहे है कि वे लोग इंसाफ के लिए जल्द ही अदालत का रास्ता अपनाने लगे है। अगर ऐसा संभव हो जाता है तो इससे पुलिस से लेकर सरकार की खूब बदनामी हो सकती है। अब लग नहीं रहा है कि तूल पकड़ने वाला मामला जल्द शांत हो सके।  

ऐसे में इस मामले ने अब पीड़ित परिवार को राजनीति से लेकर समाजिक प्रवृत्ति से जुड़े लोगों की सहानुभूति मिलनी आरंभ हो चुकी है। उन लोगों ने तो इस बात का भी दावा कर दिया है कि अगर आवश्यकता पड़ी तो वे लोग पीड़ित परिवार के साथ एक मजबूत स्तंभ की तरह खड़े हो जाएंगे। सभी पुलिस की गलती मान रहे है तथा जो इस साजिश को रचने का हिस्सा रहा , उसे कानूनी कार्रवाई तथा नौकरी से निष्कासित करने का विभाग पर भी दबाव डाल रहे है। ऐसे में अब देखना होगा कि पुलिस का अगला कदम क्या होता है। खैर गले की फांस बना उक्त मामला भी पुलिस विभाग की तरफ इस बात का संकेत देता है कि उन्हें अपने पुलिस कर्मचारी को हर हालत में निष्कासित करना ही पड़ेगा। अन्यथा मामला कब राजनीति रंगत ले जाए, शायद ही इस बात किसी ने अंदाजा लगाया हों। ऐसे में विभाग किसी प्रकार का जोखिम लेने में भी नहीं नजर आ रहा हैं, क्योंकि , हर किसी को अपनी नौकरी तथा सम्मान सर्वापरि है। 

चर्चा, इस बात की भी है कि अमृतसर की ट्रैफिक पुलिस एक नंबर की घूसखोर तक धौंस जमाने में अव्वल नंबर पर चल रही हैं। ऐसे में अच्छे अधिकारियों की आम जनता के प्रति किए सराहनीय कार्य भी कुछ घोसखोर तथा धौंस जमाने वाले पुलिस कर्मचारियों की वजह से खूब सुर्खियां बटोर रहे हैं। अब चूंकि, मामला काफी संजीदा हैं, ऐसे में पुलिस आयुक्त पर भी पूरा -पूरा दबाव है कि विभाग में जो गंदगी फैल रखी है , उसे किसी न किसी तरीके से सफाई करनी हैं। अटकलों का बाजार गर्म है कि ट्रैफिक पुलिस के कुछ अधिकारियों की छुट्टी होना लगभग तय माना जा रहा है। इतना ही इस मामले को शांत करने की एक उच्च स्तरीय योजना तैयार हो चुकी है। बस सिर्फ उसे अंतिम मोहर लगना शेष हैं। 

खैर, इस बात को भी बिल्कुल नहीं नकारा जा सकता है कि ट्रैफिक पुलिस के कुछ ईमानदार तथा निष्ठावान अधिकारियों तथा कर्मचारियों की बदौलत हमारा सिस्टम एकदम सही चल रहा है। लेकिन, कहते है कि कुछ गंदे तथा भ्रष्ट अधिकारियों तथा कर्मचारियों की वजह से सारा सिस्टम ही बदनाम हो जाता है। लेकिन, सिस्टम को सुधारा भी जा सकता है। उसके लिए एक ईमानदार तथा निष्ठावान अधिकारी की उपस्थित काफी अहमियत रखती है। 

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