बेबाक बोलना उनकी फितरत में था लिखा…..समाज के हर मुद्दे को उठाने में थी उनमें क्षमता
रंजीत सिंह मसोन.अमृतसर.चंडीगढ़।
बेबाक बोलना लिखा था उनकी फितरत में, समाज के हर मुद्दे को उन्होंने अपने पत्रकारिता के जीवन में पूरी क्षमता से उठाने में शायद ही कोई कसर छोड़ी हों। ये बात हो रही है , जो हर दिल को छू लेने में काबिलियत रखता था हम सबके पत्रकारिता शैली से जुड़े वरिष्ठ पत्रकार हरजीत सिंह ग्रेवाल, जिनका शनिवार को एक सड़क हादसे के दौरान देहांत हो गया। पत्रकारिता जगत में एकदम दुख की लहर चल पड़ी है। कोई विश्वास भी नहीं कर पा रहा है कि उनका मित्र एकदम दुनिया छोड़ कर चला गया है। परिवार सदमे में है। 2 बेटियां एक बेटा हैं। आंसू किसी के थम नहीं रहे हैं। हौसला देने वाले भी खुद डगमगा रहे हैं, क्योंकि, जो सब से प्यार करने वाला ही उनके बीच से एकदम हमेशा के लिए अलविदा कह कर चला गया हैं।
संघर्ष भरा रहा है जीवन
दिवंगत ग्रेवाल के पेशे से जुड़े जितने भी उनके मित्र तथा जानकार है, वे बताते है कि इनका जीवन काफी संघर्ष पूर्ण रहा हैं। क्योंकि, उन्होंने बचपन में ही पढ़ाई के साथ-साथ रोजगार के लिए कठिन परिश्रम करना आरंभ कर दिया था। पत्रकारिता के पेशे से वे पिछले 20 वर्ष से काम कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने कई चैनल के साथ काम किया। समाज से जुड़े कई मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। इसका पीड़ित लोगों को फायदा भी हुआ। जिन-जिन के लिए उन्होंने आवाज उठाई, उन सब की आंखों में सिर्फ आंसू ही दिखाई दे रहे थे। किसी को इस बात का विश्वास भी नहीं हो रहा था कि एकदम वे उन्हें छोड़ कर चले जाएंगे। पिछले समय से वह एक पंजाबी लोक चैनल के लिए एक वरिष्ठ पत्रकार के नाते काम कर रहे है। हादसे के दौरान भी वह स्थानीय एयरपोर्ट पर एक खबर करने के लिए अपनी मोटरसाइकिल पर सवार हो कर निकले थे।
धार्मिक ख्याल में अट्टू विश्वास था
ग्रेवाल बचपन से धार्मिक विचार तथा गुरुओं के बताए मार्ग पर हमेशा चलते थे। बेजुबान प्राणियों से उनका बहुत प्यार था। प्रतिदिन उन्हें खाने के लिए भोजन डालते थे। गुरु घर में सेवा करना वह हमेशा अपना सौभाग्य मानते थे। उनके मुताबिक, गुरु से ऊपर कोई भी नहीं है। मित्र लोग बताते है कि जब भी खबर से समय मिल जाए तो श्री गुरुद्वारा साहिब में वह बर्तन की सेवा करते थे। उनका विश्वास था कि गुरु की सेवा करना एक सच्ची सेवाभाव मानी जाती हैं।
मां-बाप के थे श्रवण बेटे
एक दूर के रिश्तेदार ने बताया कि ग्रेवाल अपने मां-बाप के साथ बहुत प्यार करते थे। हमेशा से ही उन्होंने उनका कहना माना हैं। मां-बाप उन्हें श्रवण पुत्र कहते थे। जानकार ने उनके पिता कुछ समय पहले काफी बीमार हो गए थे। कई दिनों तक उनका इलाज अस्पताल चलता रहा। ग्रेवाल ने तब अपने पिता की खूब सेवा की तथा वाहेगुरु से उनके जल्द स्वस्थ होने के लिए दुआ मांगता रहा। खैर, वो भी इस दुनिया से जा चुके है, लेकिन, उनकी जान को बचाने में ग्रेवाल ने कोई कसर नहीं छोड़ी थी।
एक अच्छे पत्रकार होने के साथ-साथ गरीबों की आवाज के तौर पर जाने जाते थे हरजीत ग्रेवाल। उनके निधन की खबर सुनते ही परिवार के सदस्यों, रिश्तेदारों और पत्रकार कम्युनिटी में गहरे दुख और सदमे की लहर दौड़ पड़ी हैं। उनके जाने से परिवार को काफी नुकसान हुआ है। इसके साथ ही पूरी पत्रकारिता की दुनिया ने एक ऐसा निडर पत्रकार खो दिया है जो सच की आवाज़ था और लोगों के मुद्दों को प्रमुखता से उठाता था।
रंजीत सिंह मसोन शहीद भगत सिंह जर्नलिस्ट एसोसिएशन (रजि.) अध्यक्ष।

