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एडवोकेट परमिंदर सिंह विर्क। (VIDEO-IMAGE-BY-SNE-NETWORK)
पंजाब के बहुचर्चित अजनाला थाना हमला मामले मे गोइंडवाल जेल में राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत बंद गुरिंदर पाल सिंह औजला को आज देहात पुलिस ने कड़े सुरक्षा पहरे में जालंधर कोर्ट में पेश किया। पुलिस ने वर्ष 2023 में दर्ज एफआईआर नंबर 25 में आर्म्स एक्ट की धाराएं जोड़ते हुए गुरिंदर पाल सिंह को प्रोडक्शन वारंट पर लिया था। कोर्ट में पुलिस द्वारा आरोपी का 5 दिन का रिमांड मांगा गया था, लेकिन माननीय जज अर्जुन संधू की अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद पुलिस को 3 दिन का रिमांड मंजूर किया है।
मिली जानकारी के अनुसार, अमृतसर के अजनाला थाने पर हुए हिंसक हमले के मामले में वारिस पंजाब दे के प्रमुख अमृतपाल सिंह और उसके गनमैन गुरमीत सिंह बुक्कनवाला सहित कई लोगों को गिरफ्तार किया गया था। इसी कड़ी में आज जालंधर देहात पुलिस गोइंडवाल जेल से गुरिंदर पाल सिंह औजला को प्रोडक्शन वारंट पर लेकर माननीय जज अर्जुन संधू की अदालत में पहुंची।
एफआईआर नंबर 25 दर्ज की गई थी
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, गुरिंदर पाल सिंह औजला के खिलाफ साल 2023 में एफआईआर नंबर 25 दर्ज की गई थी। अब पुलिस ने इस पुरानी एफआईआर में कानूनी कार्रवाई को आगे बढ़ाते हुए और जुर्म में बढ़ोतरी करते हुए आर्म्स एक्ट का नया मामला जोड़ दिया है। इसी सिलसिले में पुलिस को पूछताछ के लिए आरोपी के रिमांड की आवश्यकता थी।
एडवोकेट परमिंदर सिंह विर्क ने पुलिसिया कार्रवाई पर कई सवाल उठाए
इस पूरे मामले पर रोशनी डालते हुए गुरिंदर पाल सिंह के एडवोकेट परमिंदर सिंह विर्क ने पुलिसिया कार्रवाई पर कई सवाल उठाए हैं। उन्होंने मीडिया को बताया कि गुरिंदर के खिलाफ पहले पुलिस ने केवल धारा 188 के तहत मामला दर्ज किया था, जिसमें उसे माननीय अदालत से बेल (जमानत) मिल चुकी थी। इसके बाद जब गुरिंदर इंग्लैंड जाने के लिए एयरपोर्ट पहुंचा, तो पुलिस ने उसे वहां से गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।
पुलिस की थ्योरी को पूरी तरह से बोगस और राजनीति से प्रेरित बताया
एडवोकेट परमिंदर सिंह विर्क ने पुलिस की थ्योरी को पूरी तरह से बोगस और राजनीति से प्रेरित बताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब गुरिंदर को पहली बार गिरफ्तार किया गया था, तब उसके खिलाफ आर्म्स एक्ट का कोई जिक्र तक नहीं था। अब पूरे 3 साल बाद अचानक राजनीतिक दबाव के चलते उसके खिलाफ यह झूठा पर्चा दर्ज किया गया है, जिसका कानूनन कोई आधार नहीं है।
कोर्ट ने पुलिस को सिर्फ 3 दिन का रिमांड दिया
अदालत की कार्रवाई के दौरान पुलिस ने माननीय जज के सामने दलील दी कि आर्म्स एक्ट के तहत दर्ज नए मामले की गहराई से जांच करने और हथियारों के स्रोत का पता लगाने के लिए आरोपी से पूछताछ बेहद जरूरी है। इसके लिए पुलिस ने कोर्ट से 5 दिनों के पुलिस रिमांड की मांग की थी। हालांकि, बचाव पक्ष की दलीलों को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने पुलिस को सिर्फ 3 दिन का रिमांड दिया है। अब देखना होगा कि इस तीन दिनों की पूछताछ में पुलिस के हाथ क्या सबूत लगते हैं।###USA###UK###CANADA######PUNJAB###CHANDIGARH###INDIA###AUSTRALIA###GERMANY###IRELAND###SWEDEN###EUROPE###CHINA###HUNGRY###FRANCE###ITLAY###ROME###RUSSIA###UKRAINE###VIETNAM###SINGAPORE###@

