BIG NEWS….ARMY को लगा दाग……अग्निवीर JAWAN वाहनों की लूट का निकला MASTER-MIND, जानिए, POLICE ने किस TECHNIQUE के तहत किया ARREST.

वरिष्ठ पत्रकार.मोहाली/चंडीगढ़।  

गन प्वाइंट पर लूटपाट व वाहन चोरी करने वाले गिरोह के 3 सदस्यों को गिरफ्तार किया गया है। आरोपियों में एक युवक भारतीय सेना में अग्निवीर सिपाही भी शामिल है। अग्निवीर ही लूट का मास्टरमाइंड है। आरोपियों से पुलिस ने एक डिजायर टैक्सी, एक्टिवा और बुलेट मोटरसाइकिल बरामद किए हैं। सभी वाहनों पर फर्जी नंबर लगे हुए थे। इसके अलावा एक देसी पिस्टल 315 बोर, तीन कारतूस, छीने गए दो मोबाइल फोन भी बरामद हुए हैं।


आरोपियों की पहचान इशमीत सिंह उर्फ ईशू (अग्निवीर), प्रभप्रीत सिंह उर्फ प्रभ (दोनों सगे भाई), बलकरण सिंह तीनों निवासी गांव टाहली वाला बंदला जिला फाजिल्का के रूप में हुई है। तीनों आरोपी 18 से 22 साल की उम्र के हैं। आरोपी इशमीत 12वीं पास है। वही लुटे हुए वाहनों के जाली कागजात तैयार करता था। 

…ऐसे रची साजिश


आरोपियों ने 20/21 जुलाई की रात इन ड्राइव एप के माध्यम से कैब बुक करवाई। कैब जिस फोन के माध्यम से बुक करवाई वह फोन आरोपियों ने लुधियाना के एक व्यक्ति से छीना था। कैब चालक मनिंदर ने सुबह चार बजे इंडस्ट्रियल एरिया से उक्त आरोपियों को लोकेशन से पिक किया और उन्हें चप्पड़चिड़ी ले जा रहा था। एक सुनसान जगह पर आरोपियों ने गन प्वाइंट पर उसकी कार और 2500 रुपये छीनकर फरार हो गए थे। मनिंदर के बयान पर बलौंगी थाने में लुटेरों के खिलाफ केस दर्ज किया था।

पश्चिमी बंगाल में ड्यूटी पर तैनात था अपराधी सैनिक


पूछताछ में यह बात सामने आई कि आरोपी इशमीत सिंह उर्फ ईशू नवंबर 2022 में भारतीय फौज में बतौर अग्निवीर भर्ती हुआ था। इशमीत पश्चिमी बंगाल में ड्यूटी पर तैनात था। वह करीब दो महीने पहले एक महीने की छुट्टी पर घर आया था। छुट्टी के बाद इशमीत सिंह ड्यूटी पर वापस गया ही नहीं। इशमीत बलौंगी में किराये पर कमरा लेकर अपने सगे भाई प्रभप्रीत सिंह व अपने दोस्त बलकरण सिंह के साथ मिलकर चोरी व लूट की वारदातों को अंजाम देने लगा गया था। इशमीत ने पूछताछ में खुलासा किया कि छुट्टी आते समय उसने कानपुर यूपी से अवैध हथियार खरीदे थे।


कैसे हो जाते थे फरार, जानिए, इस पूरी डिटेल में


पूछताछ में यह बात सामने आई है कि आरोपी फाजिल्का से बस या ट्रेन में आते थे। उसके बाद बलौंगी पीजी में समय गुजारते थे। अल सुबह वह चोरी या लूटपाट की वारदात को अंजाम देकर लुटे हुए वाहन से वापस फाजिल्का फरार हो जाते थे। वहां वह लुटे हुए वाहनों पर जाली नंबर प्लेट लगाकर उसे आगे बेच देते थे। आरोपियों ने बुलेट और एक्टिवा भी बलौंगी से चोरी किए थे।

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