BREAKING NEWS…..परमराज सिंह उमरानंगल को राज्य सरकार ने नौकरी से किया बहाल….5 साल पहले कर दिया था निलंबित

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वरिष्ठ पत्रकार.चंडीगढ़। 

पंजाब सरकार ने गुरुवार को आईपीएस अधिकारी परमराज सिंह उमरानंगल को बहाल कर दिया, जिन्हें 2015 में गुरु ग्रंथ साहिब की कथित बेअदबी को लेकर प्रदर्शन कर रहे लोगों पर पुलिस फायरिंग के मामले में आरोपी बनाए जाने के बाद 5 साल पहले निलंबित कर दिया गया था। गृह मामलों और न्याय विभाग के एक आदेश के अनुसार, उमरानंगल को तत्काल प्रभाव से बहाल कर दिया गया है।


अदालत का था फैसला


पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने इस साल फरवरी में उमरानंगल के निलंबन को रद्द कर दिया था। हालांकि, उमरानंगल ने अदालत की अवमानना ​​याचिका के साथ उच्च न्यायालय का रुख किया, जिसके बाद अदालत ने 5 जुलाई को कहा कि ऐसा कोई आधार नहीं है जिसके आधार पर राज्य सरकार उमरानंगल को काम पर लौटने से रोक सके और सुनवाई की अगली तारीख 15 जुलाई तय की।

निलंबित होने के समय पुलिस महानिरीक्षक थे  उमरानंगल


उमरानंगल 2019 में निलंबित होने के समय पुलिस महानिरीक्षक थे। वह बेअदबी की घटनाओं के बाद 2015 में पुलिस गोलीबारी के मामलों में आरोपियों में से एक थे। राज्य सरकार ने फरवरी 2019, नवंबर 2020 और मार्च 2021 में तीन निलंबन आदेश जारी किए, जिसमें पुलिस गोलीबारी तथा नारकोटिक ड्रग्स और साइकोट्रोपिक पदार्थ मामले में दर्ज एफआईआर से संबंधित था।


वर्ष 2023 में किया था उच्च न्यायालय का रुख


केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण द्वारा बहाली के उनके दावे को खारिज करने के बाद उमरानंगल ने 2023 में उच्च न्यायालय का रुख किया था। फरीदकोट में वर्ष 2015 में गुरु ग्रंथ साहिब की एक ‘बीर’ (प्रति) चोरी होने, पवित्र ग्रंथ के अपवित्र पोस्टर लगाने और बरगाड़ी में बिखरे पड़े पवित्र ग्रंथ के फटे हुए पन्ने मिलने जैसी घटनाएं हुई थीं। इन घटनाओं के कारण फरीदकोट में विरोध प्रदर्शन हुए थे। अक्टूबर 2015 में प्रदर्शनकारियों पर पुलिस की गोलीबारी में फरीदकोट के बेहबल कलां में 2 लोग मारे गए थे, जबकि कोटकपुरा में कुछ लोग घायल हो गए थे।

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