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कनाडा में फेडरल इमिग्रेशन पॉलिसी में सख्ती के कारण 70,000 से अधिक विदेशी छात्रों पर वतन वापसी की तलवार लटकने लगी है। इनमें अधिकतर पंजाबी मूल के छात्र हैं, जो एक नए जीवन की उम्मीद में कनाडा गए थे।

अब जस्टिन ट्रूडो सरकार के एजुकेशन परमिट को सीमित करने और स्थायी निवास के नामांकन को कम कर रही है। 2 दिन पहले कनाडा के हेलीफैक्स में भी पीएम और कनाडा मंत्री ने साफ कहा कि सर्दी के मौसम में काफी चौंकाने वाले कदम उठाए जा सकते हैं। कई ग्रेजुएट का इसी साल वर्क परमिट खत्म होने जा रहा और वर्ष के अंत में इमिग्रेशन का सामना कर सकते हैं। स्थिति विशेष रूप से गंभीर हो गई है क्योंकि नई प्रांतीय नीतियों ने स्थायी निवास नामांकन में 25 फीसदी की कटौती की है, जिससे कई छात्र अप्रत्याशित रूप से असुरक्षित हो गए हैं।
हाल ही में प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने घोषणा की कि संघीय सरकार कनाडा में अस्थायी विदेशी श्रमिकों की संख्या में ऐतिहासिक वृद्धि के बाद कमी करेगी। क्योंकि कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि इससे अप्रवासियों और युवा लोगों में बेरोजगारी बढ़ी है। अप्रवासी बेरोजगारी दर अब 11.6 प्रतिशत है जो जून में दर्ज की गई 6.4 प्रतिशत की समग्र बेरोजगारी दर से काफी अधिक है। 15 से 24 वर्ष की आयु के लोगों में बेरोजगारी दर 13.5 प्रतिशत है।
युवाओं पर होगा असर..
कनाडा में दिन प्रतिदिन सख्ती हो रही है, जिसका सीधा असर पंजाब पर हो रहा है। अब ट्रूडो सरकार पीआर व वर्क परमिट पर अंकुश लगा रही है। पंजाब से एक लाख से अधिक बच्चे डिप्लोमा करने के लिए कनाडा जाते हैं, जिनका मकसद पढ़ना नहीं पीआर लेना होता है। यह पंजाबी युवाओं के लिए झटका है।

