ED की मजबूत पकड़…..’AAP’ के मंत्री उपरांत अब उनके चहेते बाबुओं पर गिरफ्तारी की लटकी तलवार

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SNE NETWORK.CHANDIGARH.

पंजाब में प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई ने सत्ता, अफसरशाही और रियल एस्टेट कारोबारियों के बीच भारी हलचल पैदा कर दी है। न्यू चंडीगढ़ भूमि सौदों, मास्टर प्लान में कथित हेरफेर और 150 करोड़ रुपये के सनटेक सिटी घोटाले की जांच अब बड़े अधिकारियों और प्रभावशाली लोगों तक पहुंचती दिखाई दे रही है।

गमाडा के मुख्य प्रशासक संदीप कुमार तलब

जालंधर ईडी ने गमाडा के मुख्य प्रशासक संदीप कुमार को तलब किया है, जबकि पावरकॉम के सीएमडी और 2005 बैच के आईएएस अधिकारी बसंत गर्ग को सोमवार को दिल्ली स्थित ईडी मुख्यालय में पेश होने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा पीपीसीएल की कमर्शियल डायरेक्टर हर्षरन कौर त्रेहन, लुधियाना के वित्तीय निवेशक हेमंत सूद और जालंधर के कारोबारी भी जांच एजेंसी के रडार पर हैं।

अब जांच का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है….?

सूत्रों के अनुसार, यह पूरा मामला पंजाब के कैबिनेट मंत्री संजीव अरोड़ा से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस की कड़ियों से भी जुड़ रहा है। पिछले दिनों पंजाब के कई बड़े रियल एस्टेट कारोबारियों पर हुई छापेमारी के बाद अब जांच का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। जांच एजेंसियों के निशाने पर न्यू चंडीगढ़ की इको सिटी-3, कमर्शियल कॉरिडोर और लो-डेंसिटी हाउसिंग प्रोजेक्ट्स हैं। आरोप है कि मास्टर प्लान में बदलाव कर कुछ जमीनों को मिक्स्ड लैंड यूज से बदलकर रिहायशी श्रेणी में किया गया, जिससे चुनिंदा बिल्डरों को फायदा पहुंचा और सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ।

नकली सहमति पत्र तैयार किए

ईडी की टीमों ने माजरी और लुधियाना के सब-रजिस्ट्रार दफ्तरों में जाकर रजिस्ट्री, म्यूटेशन, सेल एग्रीमेंट और सीएलयू से जुड़े दस्तावेजों की जांच की है। सनटेक सिटी और एल्टस स्पेस बिल्डर्स परियोजनाओं से जुड़े रिकॉर्ड भी एजेंसी ने कब्जे में लिए हैं। 150 करोड़ रुपये के सनटेक सिटी धोखाधड़ी मामले में आरोप है कि प्रमोटरों ने 15 भूस्वामियों के फर्जी हस्ताक्षर और अंगूठे के निशान लगाकर नकली सहमति पत्र तैयार किए और उन्हीं दस्तावेजों के आधार पर सीएलयू हासिल कर निवेशकों से करोड़ों रुपये वसूले।

कई और बड़े नाम जांच के घेरे में ..?

पंजाब की राजनीति में अब इस पूरे घटनाक्रम को लेकर चर्चाएं और तेज हो गई हैं। संजीव अरोड़ा के साथ-साथ अमन अरोड़ा का नाम भी राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। हालांकि एजेंसियों की तरफ से किसी नई भूमिका की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन लगातार हो रही पूछताछ और छापेमारी ने साफ कर दिया है कि आने वाले दिनों में कई और बड़े नाम जांच के घेरे में आ सकते हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या पंजाब में बिल्डर-अफसर-राजनीतिक गठजोड़ की परतें खुलने वाली हैं, या फिर यह मामला सिर्फ कुछ अधिकारियों तक सीमित रहेगा? ###USA###ED-NEWS###UK###@

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